FCRA Bill 2026 Monsoon Session: संसद में शाह लाएंगे एफसीआरए बिल? कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप

खबर सार :-

संसद के मानसून सत्र में FCRA Bill 2026 Monsoon Session पेश होने की अटकलों के बीच कांग्रेस ने अपने लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। मिजोरम के सीएम लालदुहोमा और अमित शाह की मुलाकात के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।
FCRA Bill 2026 Monsoon Session: क्या संसद में शाह लाएंगे बिल? कांग्रेस का व्हिप जारी

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: संसद के जारी मानसून सत्र के अंतिम चरण में अचानक राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। केंद्र सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले संभावित विधेयकों को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। आगामी 10, 11 और 12 अगस्त को लोकसभा में भारी गहमागहमी के आसार हैं। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सदस्यों को इन तीनों दिनों के दौरान सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का कड़ा रुख अपनाते हुए 'तीन लाइन का व्हिप' जारी कर दिया है। विपक्ष की इस लामबंदी के पीछे सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सरकार आगामी सप्ताह में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA Bill 2026 Monsoon Session के दौरान पटल पर रख सकती है।

चूंकि यह विधेयक सीधे तौर पर गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए ऐसी प्रबल संभावना जताई जा रही है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सदन में मौजूद रहकर इसे पेश करेंगे। विपक्ष लंबे समय से गृह मंत्री के सदन में आने का इंतजार कर रहा है, लिहाजा उसने भी अपनी घेराबंदी मजबूत कर ली है।

विपक्ष की रणनीति और खड़गे के कक्ष में हुई अहम बैठक

संसद परिसर में शुक्रवार का दिन रणनीतिक बैठकों के नाम रहा। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कक्ष में विपक्षी गठबंधन के प्रमुख घटक दलों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सहयोगी दलों के नेताओं से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे भी अपने-अपने सांसदों की सौ प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें। विपक्षी खेमे का मानना है कि यदि FCRA Bill 2026 Monsoon Session में पेश किया जाता है, तो उस पर चर्चा और मतदान के दौरान सरकार को घेरने का यह सबसे माकूल मौका होगा। विपक्षी दल अपनी पूरी विधायी संख्या का ताकत के साथ प्रदर्शन करना चाहते हैं।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी अगले सप्ताह पेश होने वाले एफसीआरए संशोधन विधेयक और परिसीमन से जुड़े किसी भी संभावित मसौदे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री बीते कई दिनों से सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए हैं। टैगोर के अनुसार, हाल ही में छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और जन-आंदोलनों से देश का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से ही सरकार इस तरह के विधेयक को अचानक एजेंडे में ला सकती है।

गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति पर क्यों टिकी हैं निगाहें?

दरअसल, विपक्ष और गृह मंत्री के बीच जारी तल्खी का एक प्रमुख कारण 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और छात्रों पर हुआ पुलिस लाठीचार्ज है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस घटना को लेकर सरकार पर हमलावर हैं और गृह मंत्री से सीधे जवाब की मांग कर रहे हैं।

सदन के भीतर गतिरोध को देखते हुए राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी हस्तक्षेप किया था। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को निर्देश दिया था कि वे विपक्षी सदस्यों की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराएं और उनसे सदन में उपस्थित रहने का अनुरोध करें। अब चूंकि एफसीआरए संशोधन का सीधा ताल्लुक गृह मंत्रालय से है, इसलिए FCRA Bill 2026 Monsoon Session के दौरान पेश होने की सूरत में शाह को सदन में आना ही पड़ेगा। विपक्ष इसी मौके की तलाश में है ताकि वह पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री को कटघरे में खड़ा कर सके।

संसदीय गणित और व्हिप का महत्व:

  • कांग्रेस ने 10 से 12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप।
  • विपक्षी दलों को भी एकजुट रहने की सलाह।
  • एफसीआरए बिल पर वोटिंग की स्थिति में आंकड़े जुटाने की होड़।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा की शाह से मुलाकात और मिले संकेत

इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा की गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई हालिया मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई दिल्ली में हुई इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर अपने राज्य की चिंताएं गृह मंत्री के सामने रखीं। बैठक के बाद लालदुहोमा ने इस बात की पुष्टि की कि वार्ता के दौरान गृह मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि 12 अगस्त को यह विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है। पूर्वोत्तर के इस राज्य के मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में एक बेहद राहत भरी जानकारी भी साझा की।

पूर्वोत्तर की चिंताएं और गृह मंत्री का आश्वासन:

मुख्यमंत्री लालदुहोमा के मुताबिक, अमित शाह ने उन्हें आश्वस्त किया है कि इस नए कानून को 'रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट' यानी भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जाएगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि कानून बनने की तिथि से पहले के मामलों पर यह लागू नहीं होगा। जिन गैर-सरकारी संगठनों या संस्थाओं का एफसीआरए पंजीकरण पहले ही रद्द या समाप्त हो चुका है, उनके पुराने मामलों पर इस नए संशोधन का असर नहीं पड़ेगा।

मानसून सत्र के अंतिम दिनों में तीखी बहस के आसार

संसद के FCRA Bill 2026 Monsoon Session का यह अंतिम चरण विधायी दृष्टिकोण से बेहद हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ जहां केंद्र सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की जल्दी में है, वहीं दूसरी तरफ एकजुट विपक्ष सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को कड़ा करने या उसमें बदलाव करने वाले इस विधेयक को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) और नागरिक समाज में भी उत्सुकता बनी हुई है। देखना दिलचस्प होगा कि सोमवार को जब संसद की कार्यवाही दोबारा शुरू होगी, तो क्या सरकार FCRA Bill 2026 Monsoon Session की कार्यसूची में इसे आधिकारिक तौर पर शामिल करती है या विपक्ष के तेवरों को देखते हुए रणनीति में कोई फेरबदल होता है। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने सांसदों को दिल्ली में ही डटे रहने का फरमान सुना दिया है।

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