23 साल से बाप को ढूंढ़ रहा था बेटा, हरिद्वार में पूरी हुई मन्नत

खबर सार :-

बिहार से हरिद्वार दर्शन करने आया युवक वह चीज पा गया, जिसको 23 साल से तलाश रहा था। यहां मंदिर के सामने उसकी मुलाकात घर से 23 साल पहले अचानक निकले उसके पिता से हो गई। उसने पहचानने में देर नहीं की और बाबूजी कहते ही उसके पिता की आंखों में भी आंसू आ गए।
23 साल पहले घर छोड़ गए थे पिता, हरिद्वार में दर्शन के दौरान मिले

खबर विस्तार : -

हरिद्वार, जिस पर भगवान की कृपा हो जाए, उसका उद्धार हो जाए। यह केवल कहावत ही नहीं, सच्चाई भी है। वरना, 23 साल पहले जो पिता अपने परिवार को छोड़कर वनवासियों की जिंदगी जी रहा था, वह परिवार वालों को उसी मंदिर के पास दिख गया, जहां सभी लोग दर्शन करने के लिए गए हुए थे। बाप और बेटे को पहचानने में कुछ पल लगे, लेकिन जब वह मिले तो मानो संसार मिल गया। 

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गंगा स्नान करने के बाद मंदिर दर्शन के लिए गया था

यह सच्चाई बिहार के रहने वालों की है। बिहार से हरिद्वार तीर्थ पर गए एक परिवार को गंगा स्नान के बाद युवक को पितास्वरूप भगवान मिल गए। दरअसल, बिहार से हरिद्वार आए एक युवक ने बताया कि हरिद्वार में वह गंगा स्नान करने के बाद मंदिर दर्शन के लिए गया था। वहां उसने एक बुजुर्ग को दूर से देखा। उसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी, बाल बिखरे थे। मगर वह उसके पिता की शक्ल जैसा दिख रहा था। पहले तो वह धोखा खाया, लेकिन उसे लगा कि नहीं जो वह सोच रहा है, वही सत्य है। वह कनखल के दक्ष मंदिर परिसर के पास था। 

युवक ने बताया कि वह बिहार के औरंगाबाद जिले के वेलसार गांव का रहने वाला है। उनके पिता करीब 70 वर्षीय जवाहर मिस्त्री 2003 में घर छोड़कर चले गए थे। शशि कुमार शर्मा नाम का युवक उस समय काफी छोटा था। अचानक पिता के चले जाने से परिवार को संभलने में कई साल लग गए। रिश्तेदार, बाजार, मेला और पुलिस तक गए, लेकिन कहीं उनका पता नहीं चल सका। जवाहर मिस्त्री घूमते-फिरते हरिद्वार पहुंच गए थे।

कनखल और आसपास के इलाकों में घूमकर बिता दिए

अपनी जिंदगी के 23 साल कनखल और आसपास के इलाकों में घूमकर बिता दिए। मंदिरों के आसपास रहकर उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल बिता दिए। दो दिन पहले शशि कुमार शर्मा अपने परिजनों के साथ तीर्थयात्रा पर हरिद्वार आए थे। इस दौरान वह कनखल स्थित पौराणिक दक्षेश्वर महादेव मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। यहां उनकी नजर मंदिर परिसर में बैठे एक बुजुर्ग पर पड़ी। उसका चेहरा कुछ जाना-पहचाना लग रहा था। दिल नहीं माना तो वह उसके पास देखने पहुंचा।

अब उसे यकीन हो गया कि 23 साल पहले घर से निकले पिता ही हैं। वही आंखें, वही चेहरा, जिसे वह 23 साल से यादों में बसाए थे। वह पास गया और धीरे से बोला बाबूजी, इतना बोलते ही बुजुर्ग ने भी बेटे को पहचान लिया। उस समय मंदिर में कई  पुजारी एवं श्रद्धालु भी थे। सब ने बाप-बेटे का यह मिलन देखा तो उनकी आंखें नम हो गईं। किसी ने इसे महादेव का चमत्कार कहा, तो किसी ने गंगा मैया का आशीर्वाद। यह जानकारी पाकर कनखल की पुलिस भी मौके पर पहुंची।

शशि अपने पिता को लेकर ट्रेन से रात औरंगाबाद लौट गए

इंस्पेक्टर देवेंद्र रावत ने एक दूसरे के बारे में जानकारी भी की। बाद में उन्होंने बताया कि दोनों से पूछताछ की गई है। बुजुर्ग कई साल पहले घर से निकला था। इसके बाद पिता-पुत्र बिहार के लिए रवाना हो गए। शशि अपने पिता को लेकर ट्रेन से सोमवार रात औरंगाबाद लौट गए हैं। उसने बताया कि 23 साल तक हर जगह पिता को तलाशता रहा। धीरे-धीरे उम्मीद लगभग खत्म हो गई थी। यह तो हरिद्वार की गंगा मैया और भोले बाबा की कृपा थी। यहां वह दर्शन के लिए आए थे। महादेव की कृपा से उनके पिता मिल गए। इससे बड़ा चमत्कार और क्या हो सकता है।

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