गायत्री परिवार ने दिलाया विश्व कल्याण का महासंकल्पः महापुरुषों के विचारों को अपनाएं

खबर सार :-

इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी महोत्सव का आज तीसरे दिन भव्यता के साथ समापन किया गया।
ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों के अनुरूप आचरण करेंः डीवाई चंद्रचूड़

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी महोत्सव के आज तीसरे दिन धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों पर वक्ताओं ने अपनी बात रखी। यह पुस्तकें अनुरूप आचरण करने वाले व्यक्ति संतोष और प्रसन्नता का अनुभव करने वाले व्यक्ति की ओर से वर्णिय हैं या नहीं? इस पर भी बहस छिड़ चली है। 

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विचारों में क्रांति का मतलब कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा

पिछले कई महीनों से तो राष्ट्रीय स्तर पर इनकी जांच पड़ताल और सत्यता परखने की बात की जा रही है। कुछ पुस्तकों को तोड़मरोड़ कर उनकी कापी बनवाकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। ऐसी पुस्तकें अध्ययन या ग्रह्य योग्य है? इस पर फिलहाल मंथन करने की जरूरत है। दरअसल, देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी महोत्सव के समापन समारोह में कहा कि संसार के सभी प्राणी द्वेष और शत्रुता त्यागकर एक-दूसरे के प्रति मैत्रीभाव विकसित करें। यह बात संसार के लिए कही गई है।

इस समारोह में विचारों में क्रांति, मानवीय एकता, सामाजिक सद्भाव और नवयुग निर्माण का संदेश दिया गया। विचारों में क्रांति का मतलब कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आयोजन का उद्देश्य अच्छे विचार लाना हो सकता है, न कि अपनी बात मनवाने का असभ्य तरीके का प्रदर्शन करना। वक्ताओं ने कहा कि जन्मशताब्दी महोत्सव का समापन युग निर्माण की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि गुरुदेव-माताजी के संकल्पों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने का अवसर है। यानी यह निरंतर प्रयास चलता रहेगा। कार्यक्रम आगे भी होंगे और बदलाव के प्रयास भी किए जाते रहेंगे। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संत ज्ञानेश्वर रचित ‘पसायदान’ के छंदों का उल्लेख भी किया।

दूर हो रही मानवीय चेतना को जोड़ना सिखाता है परिवार

मानवीय मूल्यों की महत्ता कहां से शुरू होती है। इसकी जरूरत कहां पर पड़ती है? उन्होंने दुष्प्रवृत्तियों के अंत, सत्कर्मों के प्रति अनुराग और सभी प्राणियों के बीच मैत्रीभाव विकसित करने के संदेश की व्याख्या की। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने धार्मिक ग्रंथों में वर्णित जीवन मूल्यों के अनुरूप आचरण करने पर जोर दिया। यह गं्रथ अपनी बातों से मानव जीवन को संतोष और प्रसन्नता से भरता है। सदाचार, परस्पर प्रेम और मानवीय संवेदनाओं को जीवन में उतारना आवश्यक है। कई ऐसी पुस्तकें हैं, जिनमें अपवाद नहीं है। संसार के सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति द्वेष और शत्रुता की भावना त्यागकर मित्रवत व्यवहार करें।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी अपने विचार रखे। माता भगवती देवी शर्मा का संपूर्ण जीवन सेवा, समर्पण, सादगी और गायत्री परिवार पर प्रकाश डाला। बताया कि मानवीय मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और समाज कल्याण के आदर्श तो इस परिवार से जुड़ते ही हैं। उनका कहना था कि गुरुदेव-माताजी के तप, त्याग और लोकमंगल के संकल्प के चलते ही परिवार को व्यापक स्वरूप मिल सका है। कार्यक्रम का विदाई सत्र में ‘ज्योति कभी नहीं बुझेगी’ विषय पर समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने वर्ष 2026 को गायत्री परिवार के लिए ‘सौभाग्य का प्रयाग’ बताया।

आदर्शाें को जीवन में उतारकर अनुसरण करने पर जोर

इस सत्र में लोगों को एक दूसरे से जुड़ने का मार्मिक अवसर मिला। कार्यक्रम हिंदुओं के रीतिरिवाज और धार्मिक परंपराओं के साथ आगे चलता रहा। डॉ. पण्ड्या ने कहा कि ‘गायत्री परिवार गुरुदेव का खोया-पाया विभाग है।’ यह ऐसा परिवार है जो गुरुदेव के विचारों और आदर्शों से दूर होती मानवीय चेतना को पुनः जोड़ना सिखाता है। उनके संकल्पों को समाज में प्रतिष्ठित करने की जरूरत बताई और कहा कि प्रत्येक गायत्री परिजन का यह दायित्व है।
इन तीन दिनों में समापन अवसर पर निकाली गई ज्ञान यज्ञ की मशाल रैली महत्वपूर्ण आयोजन रहा।

इसने विश्व शांति, मानवीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक चिंतन का संदेश देने की भूमिका निभाई। इसके साथ ही लोगों के हाथ मशाल के माध्यम से गुरुदेव-माताजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। व्यक्ति का निर्माण, परिवार का निर्माण और राष्ट्र का  निर्माण उत्थानपरक हो, इन संकल्पों को व्यापक जनांदोलन का स्वरूप देने की अपील की गई। लोगों ने संकल्प लिया कि गुरुदेव-माताजी के युग निर्माण संकल्पों की यात्रा निरंतर जारी रहेगी। इस अवसर पर दिल्ली सहित आयोजन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले साधकों को सम्मानित किया गया।

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