बंगाल की खाड़ी कछुओ के लिए समर्पित, भुवनेश्वर से लगी मछुआरों पर प्रतिबंध

खबर सार :-

मछली पकड़ने पर प्रतिबंध केवल बंगाल की खाड़ी मेें है। यह कछुओं के प्रजनन और उनके अंडे देने का समय है। इनकी संख्या और महत्व को देखते हुए ओडिसा सरकार ने यह निर्णय लिया है।
ओलिव रिडले कछुओं का गहिरमाथा में संरक्षण, सात महीने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध

खबर विस्तार : -

भुवनेश्वर, ओडिसा सरकार ने समुद्री अभयारण्य के प्रति चिंता जताई है। भुवनेश्वर के करीब गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य के भीतर कछुओं केे संकटग्रस्त जीवन को लेकर कई किमी दायरे में केंद्रापड़ा तट से बंगाल की खाड़ी में 20 किलोमीटर तक  समुद्री क्षेत्र में मछली पकड़ने पर रोक रहेगी। यह विश्व समुदाय की चिंता बन गई है कि वह इसकी संख्या और जीवन शैली पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को रोकने में सहयोग करे।

इसीलिए सरकार ने संकटग्रस्त ओलिव रिडले कछुओं को प्रजनन, अंडे देने और उनके सामूहिक आगमन के दौरान सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। इसबात पर वैज्ञानिकों की चेतावनी व शोधों को लेकर गंभीरता दिखाई जा रही है। इसी कड़ी में 1 नवंबर से समुद्री एरिया के निश्चित भाग पर मछली पकड़ने पर रोक लागू हो गया है। यह क्षेत्र ओडिशा के गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में हैं। इनमें ओलिव रिडले समुद्री कछुओं के संरक्षण के लिए सात महीने का मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू किया गया है। यह प्रतिबंध 31 मई 2027 तक जारी रहेगा।

प्रजनन और अंडे देने का प्राकृतिक आवास माना जाता

इस निर्णय के पीछे वातावरण मुहैया कराना मकसद है। यह मौसम कछुओं के प्रजनन एवं सामूहिक अंडे देने के लिए सुरक्षित माना जाता है। इसीलिए इसका चुनाव किया गया है। राजनगर मैंग्रोव वन एवं वन्यजीव प्रभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जानकारी दी है कि  ओडिशा समुद्री मत्स्य विनियमन अधिनियम, 1982, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 तथा ओडिशा समुद्री मत्स्य नियम, 1983 के प्रावधानों के तहत यह फैसला किया गया है। यह ऐसा स्थान है जो दुनिया में ओलिव रिडले समुद्री कछुओं का सबसे बड़ा प्रजनन एवं सामूहिक अंडे देने का स्थल माना जाता है। गहिरमाथा को इस महत्वपूर्ण अवसर बनाए रखने के लिए सरकार ने सहायोग मांगा है। यह प्रजाति हमेशा से संकटग्रस्त रही है। यह स्थान इनके अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजनन और अंडे देने का प्राकृतिक आवास माना जाता है। 

समुद्र तट पर एकत्रित होते ओलिव रिडले कछुए 

यहां समुद्र तट पर प्रत्येक वर्ष हजारों ओलिव रिडले कछुए एकत्रित होते हैं। जिन दिनों तक मछुआरों को रोका गया है। वन विभाग स्थानीय मछुआरा समुदायों के बीच जागरूकता अभियान चलाएगा। अधिकारी और कर्मचारी इन कछुओं के संरक्षण और सुरक्षा के लिए मछुआरा समुदायों के अलावा नाविकों को भी जागरूक करेंगे। सरकार की कोशिश है कि इन कछुओं के प्रजनन और अंडे देने की प्रक्रिया  सुरक्षित एवं निर्बाध रहे। वन विभाग भारतीय तटरक्षक बल, समुद्री पुलिस और मत्स्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर काम करेगा। जहां कहीं भी जरूरत महसूस की जाएगी, प्रतिबंध की अवधि के दौरान समुद्री क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी जाएगी।

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को मदद मिलेगी

माना जा रहा है कि कछुआ संरक्षण से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण को मदद मिलेगी। सरकार इस क्षेत्र को संरक्षित जलक्षेत्र कह रही है। इसमें अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों को रोकने की सख्ती बनाई जा रही है। कछुआ को वन्यजीव संरक्षण की जरूरत है, इस दृष्टिकोण से मछली पकड़ने पर वार्षिक प्रतिबंध महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे ओलिव रिडले कछुओं के प्राकृतिक प्रजनन स्थलों की सुरक्षा बढ़ जाती है। 

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