भागलपुर के खरीक प्रखंड: गंगा के भीषण कटाव से 300 मीटर रेलवे बांध ध्वस्त, गांवों में मची अफरा-तफरी

खबर सार :-

भागलपुल में गंगानदी का बांध कट गया है। इसके कटान की जानकारी जनप्रतिनिधियों को भी थी। लेकिन वह जानकारी देने वालों से बड़े जानकार बन रहे थे। उन्होंने दावा किया था कि बांध कट जाएगा तो वह इस्तीफा दे देंगे।
जानकारी के बाद भी टूटने दिया भागलपुर का बांध, नहीं टूटने की भविष्यवाणी कर रहे थे इंजीनियर

खबर विस्तार : -

भागलपुर, बिहार में भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड अंतर्गत राघोपुर में शुक्रवार की रात एक बड़ा हादसा हो गया। यहां उफनाती गंगा नदी के भीषण कटाव के कारण ब्रह्म बाबा स्थान के पास रेलवे बांध पूरी तरह ध्वस्त हो गया। इसकी जानकारी पाते ही लोगों में दहशत व्याप्त हो गई। लोग जितना जल्दी हो सका घर छोड़ने के लिए विवश हो गए। बांध का पानी लगातार क्षेत्र में बढ़ रहा था। इसकी जानकारी अधिकारियों को दी गई तो वह भी मौके पर निगरानी के लिए पहुंच गए। इस दौरान बांध को कंट्रोल करने की भी कोशिश की गई, लेकिन यह सामान्य प्रक्रिया नहीं थी। 

कई दिनों से कट रही थी बांध की मिट्टी

हनुमान मंदिर से लेकर ब्रह्म बाबा स्थान तक करीब 300 मीटर के दायरे में बांध ताश के पत्तों की तरह ढह गया। आखिर बांध को बनाने में लाखों रुपए लगे होंगे, लेकिन वह पानी को रोक नहीं पाया। जानकारी पाते ही आसपास के ग्रामीण इलाकों में अचानक हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। घटना शुक्रवार देर रात की है। शुरूआत में बांध की मिट्टी धंस रही थी। मिट्टी के कटकर पानी में गिरने की आवाज भी आ रही थी। यही कटान जब बढ़ता रहा तो बांध का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी की तेज धारा में चला गया।

पानी अब निचले हिस्सों से टकरा रहा

संभावित बाढ़ और तबाही के खतरे को देखते हुए शंकरपुर और अलालपुर गांव के लोग आधी रात को ही अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। यदि वह स्थान नहीं छोड़ते तो उन्हें ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था। नदी का पानी अब सीधे रेलवे लाइन और तटबंध के निचले हिस्सों से टकरा रहा है। इससे रेल परिचालन और स्थानीय आबादी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। कई पक्के मकान और झोपड़ियां भी इस भीषण कटाव की चपेट में आकर नदी में समा गई हैं।

बांध टूटने की सूचना मिलते ही नवगछिया के एसपी वैभव शर्मा और एसडीएम के परीक्षित तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और देर रात ही जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू कराया।
वैसे तो यह हर बाढ़ ग्रस्त एरिया की पहचान है, जब कभी कोई बड़ा मामला हो जाता है तो अधिकारी बाद में बचाव दल के रूप में पहुंच जाते हैं। ट्रैक्टरों में या अपनी गाड़ियों में भर के लोगों को यहां से वहां पहुंचाने लगते हैं। इस दौरान भी उनके जीवन भर की कमाई की निगरानी तक करने वाला कोई नहीं रह जाता है।

कई दिनों से कट रही थी बांध की मिट्टी

जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल की पूरी टीम मुख्य अभियंता की निगरानी में मौके पर कैंप कर रही है। विभाग के लोग उसी कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं, जिसमें कहा जाता है का वर्षा जब कृषि सुखाने, यानी कि जब समय निकल गया और बांध टूट गया था। वह निगरानी करने के लिए आए, इससे पहले लोगों की समस्याओं पर गौर नहीं फरमा रहे थे। लोगों का आरोप है कि अधिकारी ठीक से बात भी नहीं कर रहे थे। कह रहे हैं कि बचे हुए तटबंध को सुरक्षित करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए युद्धस्तर पर फ्लड फाइटिंग का कार्य किया जा रहा है।

पहले जब पूरी तरह से बंध को बचाया जा सकता था, तब दफ्तर से बाहर नहीं निकाल पाए। अब बचे हुए बंध को बचाएंगे । इस बीच, बांध ध्वस्त होने के बाद स्थानीय जनता में जनआक्रोश भी बढ़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, बांध पर चल रहे कटाव निरोधी कार्य की गुणवत्ता को लेकर बीती 4 सितंबर को सरपंच प्रमोद मंडल ने आमरण अनशन किया था। लेकिन अधिकारियों और नेताओं ने उनकी बात पर गंभीरता नहीं दिखाई और बंध लगातार कमजोर होता चला गया। इसका परिणाम सामने है। पहले भी स्थानीय लोगों को परेशानी झेलने की आशंका थी और वर्तमान में भी यही लोग समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा था बांध टूट जाएगा तो इस्तीफा दे देंगे

उस दौरान पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेंद्र ने आश्वासन दिया था कि यदि बांध टूटता है, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। स्थानीय लोगों का मानना है कि मंत्री जी अगर अपनी जुबान के पक्के हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। इस्तीफा मांगने का कारण है कि बांध पूरी तरह से टूट चुका है। अब बांध पूरी तरह टूट जाने के बाद मंत्री के इस पुराने बयान को लेकर पूरे इलाके में चर्चा और आक्रोश का माहौल है।

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