NEET विवाद पर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, बोले- युवाओं को भड़काने की हुई कोशिश

खबर सार :-

केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से त्यागपत्र देने के 14 दिनों बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। ओडिशा के संबलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि परीक्षा विवाद के दौरान युवाओं को गुमराह किया गया था
इस्तीफे के बाद धमेन्द्र प्रधान NEET विवाद पर पहली बार बोले

खबर विस्तार : -

संबलपुर (ओडिशा):  पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को पद छोड़ने के बाद पहली बार इस बड़े फैसले के पीछे की वजहों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। अपने गृह राज्य ओडिशा के संबलपुर स्थित जीएम यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि नीट परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर चले व्यापक आंदोलन के दौरान देश के युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास किया गया था। नीट (NEET) पेपर लीक विवाद को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में छात्रों और युवाओं का कई हफ्तों से लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा था। इस राष्ट्रव्यापी विरोध, संसद में हुए भारी हंगामे और सड़कों पर बढ़ते जनआक्रोश के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

'मंत्री पद से बड़ा बच्चों का भविष्य'

संबलपुर में विश्वविद्यालय के छात्रों और नागरिकों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि युवा वर्ग देश की आधारशिला है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "जेन ज़ी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें 'भ्रमित' करने की कोशिश की।" उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए व्यक्तिगत स्वार्थ या मंत्रालय की जिम्मेदारी से अधिक महत्वपूर्ण देश की नई पीढ़ी के सपने हैं। धर्मेंद्र प्रधान ने जनसांख्यिकीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 सालों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनके अपने सपने हैं और वही भारत को विश्व गुरु बनाएंगे। मेरे लिए मंत्री पद महत्वपूर्ण नहीं था।"

इस्तीफे की प्रक्रिया और नैतिक जिम्मेदारी

कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अपना त्यागपत्र स्वीकार करने की पेशकश की थी। उनके अनुसार, यह निर्णय किसी बाहरी दबाव के बजाय नैतिक आधार पर व्यक्तिगत स्तर पर लिया गया था ताकि निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ हो सके। हालांकि, विपक्षी नेताओं ने धर्मेंद्र प्रधान के इन दावों को खारिज करते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों का तर्क है कि धर्मेंद्र प्रधान को युवाओं के व्यापक आक्रोश, सड़कों पर उतरे छात्रों और सीजेपी द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के भारी दबाव में आकर मजबूरी में पद छोड़ना पड़ा है।

अचानक बदले राजनीतिक हालात

राजनीतिक प्रेक्षकों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 25 जुलाई को इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा से 48 घंटे पहले तक सरकार के स्तर पर ऐसे किसी फेरबदल की संभावना नजर नहीं आ रही थी। हालांकि, संसद में लगातार होते हंगामे, सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की बढ़ती उग्रता और प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद स्थिति न संभलने के कारण अंततः यह प्रशासनिक फैसला लेना पड़ा। मंत्रालय छोड़ने के बाद से ही धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से दूरी बना रखी थी। संबलपुर में दिया गया उनका यह बयान अब राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सामने आई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर के परीक्षार्थियों और अभिभावकों में भारी असंतोष फैल गया था। सीजेपी के बैनर तले जंतर-मंतर पर शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे देशव्यापी रूप ले चुका था। इस गतिरोध को समाप्त करने, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख बहाल करने के उद्देश्य से सरकार पर कड़े कदम उठाने का नैतिक दबाव बना हुआ था।

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