डीपफेक और साइबर सुरक्षा पर सरकार का जोर, AI नियमों पर आएगा परामर्श पत्र

खबर सार :-

एआई नियमन पर अगले महीने सरकार परामर्श पत्र जारी करेगी। अश्विनी वैष्णव ने डीपफेक, साइबर सुरक्षा, मानव हित और टेक्नो-लीगल समाधान पर जोर दिया।
एआई नियमों पर अगले महीने आएगा परामर्श पत्र

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सरकार अगले महीने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े नियमों को लेकर एक परामर्श पत्र जारी करेगी। प्रस्तावित चर्चा पत्र का मुख्य फोकस एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को सुनिश्चित करना तथा तेजी से बढ़ते डीपफेक के खतरे से निपटना होगा। सरकार का मानना है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों को गंभीरता से संबोधित करना जरूरी है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि वह संबंधित विभाग से एआई नियमन पर एक ऐसा चर्चा पत्र तैयार करने का अनुरोध करेंगे, जिसमें सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा सुरक्षा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

डीपफेक को बताया गंभीर चुनौती

केंद्रीय मंत्री ने डीपफेक को समाज के लिए बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सोच और निर्णय लेने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। डीपफेक तकनीक के जरिए तैयार की गई तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो वास्तविक प्रतीत हो सकते हैं। ऐसे में आम लोग कई बार फर्जी सामग्री को सच मान लेते हैं। वैष्णव के मुताबिक, डीपफेक के कारण लोगों के बीच गलत धारणाएं पैदा हो सकती हैं और वे भ्रामक जानकारी के आधार पर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकते हैं। इसलिए एआई गवर्नेंस में डीपफेक की पहचान, कंटेंट की प्रामाणिकता और जिम्मेदारी तय करने जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

सिर्फ कानून से नहीं होगा एआई का नियमन

सरकार के प्रस्तावित परामर्श पत्र का दायरा केवल एआई से जुड़े कानून और नियमन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें कौशल विकास, सुरक्षा और यह सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा कि एआई के तेजी से विस्तार के दौर में समाज का कोई वर्ग पीछे न छूटे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एआई से जुड़े नियामक ढांचे में मानव हित सबसे ऊपर होना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित करने की कोशिश पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए तकनीकी उपायों और नियामक व्यवस्था को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने इस दिशा में 'टेक्नो-लीगल' समाधान विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। इसका मतलब ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें तकनीकी सुरक्षा उपायों के साथ कानूनी और नीतिगत प्रावधान भी प्रभावी तरीके से काम करें।

उद्योग और विशेषज्ञों की भागीदारी जरूरी

एआई गवर्नेंस को प्रभावी बनाने के लिए सरकार उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण मान रही है। मंत्री ने कहा कि एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों का सामना करने में उद्योग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। एआई तकनीक लगातार तेजी से विकसित हो रही है। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर नवाचार को बढ़ावा देने और दूसरी ओर इससे जुड़े संभावित नुकसान को नियंत्रित करने के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती है। प्रस्तावित परामर्श प्रक्रिया के जरिए सरकार विभिन्न पक्षों से सुझाव लेकर भविष्य के नियामक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश करेगी।

जोखिमों की पहचान

गौरतलब है कि सरकार इस वर्ष पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है। इन दिशा-निर्देशों में विश्वसनीयता, लोगों को केंद्र में रखने वाले प्रशासन और जिम्मेदार एआई नवाचार को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। गाइडलाइन्स में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से होने वाले संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों के रूप में चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान करने और जवाबदेही से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। दिशा-निर्देशों में डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की सिफारिश की गई है। इसके अलावा एआई गवर्नेंस ग्रुप, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

FAQ

1. सरकार एआई नियमन पर परामर्श पत्र कब जारी करेगी?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सरकार अगले महीने एआई नियमन से जुड़ा परामर्श पत्र जारी करेगी।

2. प्रस्तावित एआई परामर्श पत्र का मुख्य फोकस क्या होगा?

इसका मुख्य फोकस एआई सुरक्षा होगा। इसके साथ डीपफेक, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास और जिम्मेदार एआई के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

3. सरकार डीपफेक को लेकर चिंतित क्यों है?

डीपफेक सामग्री वास्तविक दिखाई दे सकती है। इससे गलत सूचना फैलने, लोगों में भ्रम पैदा होने और भ्रामक जानकारी के आधार पर निर्णय लिए जाने का खतरा बढ़ता है।

4. क्या एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित किया जा सकता है?

नहीं। अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि एआई से जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए टेक्नो-लीगल समाधान की जरूरत है, जिसमें तकनीकी सुरक्षा उपायों के साथ प्रभावी नियमन भी शामिल हो।

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