झारखंड सरकार और छात्रों के बीच हुई वार्ता, छात्रों में 10 और सरकार के पांच प्रतिनिधि रहे मौजूद
खबर सार :-
रांची, झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ 14 दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा था। राज्य सरकार ने छात्रों को समझाने, मनाने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए बीती देर शाम छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को औपचारिक वार्ता के लिए बुलाया था। करीब डेढ़ घंटे चली छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत अंततः अनुकूल दिशा पर बंद हुई।
खबर विस्तार : -
रांची : झारखंड में दो परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप था। इन दोनों परीक्षाओं जेपीएससी-जेएसएससी की जांच की मांग कर 14 दिनों से छात्रों का आंदोलन चल रहा था। इसी समाधान के लिए मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में बीती रात एक बैठक हुई थी। इसमें राज्य सरकार ने छात्रों की समस्याओं को समझने के लिए कुछ छात्रों को औपचारिक वार्ता के लिए बुलाया था। करीब डेढ़ घंटे चली छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत रात 9.25 बजे खत्म हुई। छात्र के दल ने बातचीत को सकारात्मक बताया।
यद्यपि अभी बातचीत अंतिम समझौते पर नहीं पहुंची है। यही कारण है कि छात्रों ने अंतिम रूप से समझौता होने तक सत्याग्रह जारी रखने का निर्णय लिया है। मोरहाबादी स्थित राजकीय अतिथिशाला में करीब डेढ़ घंटे तक छात्र अपनी समस्याएं गिनाते रहे। रात 9.25 बजे तमाम आश्वासन के साथ वार्ता को विराम दिया गया। छात्र प्रतिनिधियों ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए अंतिम रूप से समझौता होने और अपनी मांगें पूरी होने तक सत्याग्रह जारी रखने का फैसला किया है। वार्ता के दौरान सरकार की पांच सदस्यीय टीम बेंच पर थी। सामने छात्रों का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मौजूद रहा।
प्रमुख मांग - जेपीएससी पीटी और जेएसएससी से जुड़े विवादों की जांच
छात्रों ने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। 14वीं जेपीएससी पीटी और जेएसएससी सीजीएल से जुड़े विवादों की जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार इनकी प्रमुख मांग है। सरकार और छात्रों के बीच आमने-सामने बातचीत हुई। छात्रों ने अपनी मांगों को एक-एक कर सरकार के सामने रखा। इनमें उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने की मांग की। इसके बाद दो परीक्षाओं में अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की।
छात्रों ने कहा- वे आश्वासन नहीं ठोस कार्रवाई की उम्मीद लेकर आए हैं
बेंच पर मौजूद छात्रों ने कहा कि वे आश्वासन नहीं ठोस कार्रवाई की उम्मीद लेकर आए हैं। उन्होंने कहा बाहर वाले भी यही चाहते हैं। वार्ता में सरकार की ओर से चार मंत्री चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव शामिल थे। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह को भी सरकार की बैठक में ले जाया गया। छात्र प्रतिनिधिमंडल में रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार ने आंदोलन की मांगें गिनाईं।
मीडिया के सामने सीएम ने अपनी बात रखी
मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा था कि सरकार छात्रों की हर बात सुनेगी। इसीलिए बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता खोजने के लिए सरकारी दल भेजा गया था। छात्रों की जिज्ञासाएं खुलकर सामने आईं, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि युवाओं की भागीदारी से भर्ती और शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए जा सकते हैं? इन सिद्धांतों की ओर मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान है। उन्होंन कहा था कि संवाद में राज्य के सभी छात्र अपनी राय रखें। उनके विचारों के आधार पर सरकार सुधार का प्रयास करेगी।
सरकारी दल को भी है बात बन जाने की उम्मीद
सरकारी दल ने कहा कि छात्रों के एक-एक मुद्दे के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि सरकार के चार मंत्रियों की कमेटी मुख्यमंत्री को छात्रों की मांगें बताएगी। इसके बाद जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में पहले ही कहा था कि सरकार छात्रों की समस्याओं के प्रति गंभीर है। इससे पहले गुरुवार को सरकार और छात्रों के बीच प्रतिनिधिमंडल को लेकर गतिरोध था। सरकार ने केवल छात्रों से बातचीत की शर्त रखी थी।
FAQ...
1. क्या सरकार सभी समस्याओं को निपटाएगी?
राज्य सरकार की ओर से अभी आश्वासन मिला है। केेंद्र सरकार ने भी छात्रों की बात मान ली है। यदि परीक्षाओं की जांच राज्य सरकार के हाथ है तो सरकार इस पर फैसला कर सकती हैै।
2. चार मंत्रियों की कमेटी की भूमिका क्या होगी?
सरकार के भेजे गए मंत्रियों की भूमिका खास होगी। सीएम के चार मंत्रियों की कमेटी छात्रों की मांगें बताएगी। इसके बाद जल्द ही दूसरे दौर की वार्ता हो सकती है। यह दल छात्रवार्ता को लेकर गंभीर है।
3. छात्रों पर बातचीत के दौरान किसी प्रकार का दबाव था?
सरकार और छात्रों के बीच आमने-सामने बातचीत हुई। छात्रों ने अपनी मांगों को एक-एक कर सरकार के सामने रखा। यदि किसी प्रकार का दबाव होता तो रात में डेढ घंटे वार्ता न चलती।
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