B.Ed. Bridge Course 2026: बीएड वालों के लिए बड़ा अपडेट, शुरू हुई ये योजना
खबर सार :-
शिक्षा मंत्रालय ने प्राइमरी क्लास में पढ़ाने वाले B.Ed. क्वालिफ़ाइड शिक्षकों के लिए छह महीने का ब्रिज कोर्स शुरू किया है। इस कोर्स में ऑनलाइन क्लास, स्कूल-बेस्ड अनुभव और थ्योरेटिकल करिकुलम शामिल हैं। इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद NCTE ने तैयार किया था। योग्यता: 28 जून, 2018 और 11 अगस्त, 2023 के बीच नियुक्त B.Ed. क्वालिफ़ाइड शिक्षक।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने B.Ed. डिग्री वाले प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों के लिए एक खास 'ब्रिज कोर्स' शुरू किया है। यह कोर्स उन शिक्षकों के लिए है जिनके पास B.Ed. तो है, लेकिन D.El.Ed. (एलिमेंट्री एजुकेशन में डिप्लोमा) की योग्यता नहीं है और वे अभी क्लास 1 से 5 तक पढ़ा रहे हैं। यह कोर्स छह महीने का होगा और इसमें थ्योरी की पढ़ाई, कम से कम 10 दिन की ऑनलाइन क्लास और कम से कम 20 दिन का स्कूल-बेस्ड अनुभव शामिल होगा। इस कोर्स का मुख्य मकसद प्राइमरी लेवल पर पढ़ाने के लिए ज़रूरी स्किल्स को बेहतर बनाना है।
किसके लिए है ये कोर्स
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह ब्रिज कोर्स खास तौर पर उन प्राइमरी शिक्षकों के लिए बनाया गया है जिन्हें 28 जून, 2018 और 11 अगस्त, 2023 के बीच क्लास 1 से 5 तक पढ़ाने के लिए नियुक्त किया गया था। इन शिक्षकों के पास B.Ed. डिग्री तो है, लेकिन D.El.Ed. योग्यता नहीं है। ऐसी नियुक्तियाँ नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) के 28 जून, 2018 के नोटिफिकेशन के तहत सुरक्षित हैं। यह कोर्स उन्हें D.El.Ed. के बराबर योग्यता देगा, जिससे उनकी नियुक्तियाँ मान्य हो जाएँगी और वे अपनी नौकरी जारी रख पाएँगे।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे निर्देश
यह कोर्स सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल, 2024 के फैसले के बाद तैयार किया गया है। देवेश शर्मा बनाम भारत संघ और अन्य मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने NCTE को ऐसे शिक्षकों के लिए एक ब्रिज कोर्स तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद, NCTE ने कोर्स तैयार किया और इसे केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंपा, जिन्होंने इसे लॉन्च किया। इस फैसले से हज़ारों शिक्षकों को राहत मिली है जिनकी नौकरी खास योग्यता न होने के कारण जाने का खतरा था।
कोर्स का स्ट्रक्चर
ब्रिज कोर्स में छह थ्योरी मॉड्यूल होंगे, जिनमें एकेडमिक पढ़ाई और स्कूल-बेस्ड प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दोनों शामिल होंगे। इसमें प्रैक्टिस टीचिंग, रिफ्लेक्टिव डायरी बनाए रखना और पोर्टफोलियो तैयार करना जैसी गतिविधियाँ शामिल होंगी। इसका मकसद शिक्षकों को सिर्फ़ थ्योरी की जानकारी देने के बजाय क्लासरूम में प्रैक्टिकल अनुभव देना है। कोर्स छोटे बच्चों की सीखने की अलग-अलग ज़रूरतों को समझने और उसी के अनुसार उन्हें पढ़ाने पर फोकस करेगा। इसमें टीचिंग स्किल्स, प्रोफेशनल रवैया और खुद के काम पर विचार करने की क्षमता विकसित करने पर ज़ोर दिया जाएगा। इसका मकसद प्राइमरी क्लास के सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन भर सीखने के मौके देने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना है। कोर्स में बच्चों का विकास, पढ़ाने के तरीके, मूल्यांकन के तरीके और समावेशी शिक्षा जैसे विषय शामिल होंगे। स्कूल में काम करने के दौरान, शिक्षक क्लास में सीखे गए तरीकों का अभ्यास करेंगे और अपने अनुभवों को एक रिफ्लेक्टिव डायरी में लिखेंगे। उनकी गतिविधियों, लेसन प्लान और मूल्यांकन कार्यों का एक पोर्टफोलियो बनाया जाएगा और उसका मूल्यांकन किया जाएगा।
पढ़ाई का तरीका और एडमिशन प्रोसेस
यह कोर्स दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस एजुकेशन) के ज़रिए चलाया जाएगा, जिसमें ऑनलाइन प्रोग्राम, वीडियो ट्यूटोरियल, ई-लर्निंग मटीरियल और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि शिक्षक अपनी नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई भी कर सकें। हालांकि कोर्स हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध होगा, लेकिन शिक्षक संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी भी भाषा में थ्योरी परीक्षा के जवाब दे सकते हैं। यह सुविधा अलग-अलग राज्यों के शिक्षकों को लचीलापन देती है।
एडमिशन प्रोसेस पूरी तरह से ऑनलाइन होगा। योग्य शिक्षक NIOS (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) के आधिकारिक ब्रिज कोर्स पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। उन्हें ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने होंगे और वे डैशबोर्ड के ज़रिए अपने एडमिशन का स्टेटस देख सकते हैं। स्टडी मटीरियल डिजिटल रूप में उपलब्ध होगा, साथ ही ऑडियो, वीडियो और इंटरैक्टिव कंटेंट जैसे ऑनलाइन रिसोर्स भी मिलेंगे। शिक्षकों को तय समय के अंदर कोर्स पूरा करना होगा और परीक्षा पास करनी होगी। परीक्षा पास करने पर उन्हें एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा जिसे D.El.Ed. क्वालिफिकेशन के बराबर माना जाएगा।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
यह ब्रिज कोर्स प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। यह B.Ed. क्वालिफाइड शिक्षकों को प्राइमरी लेवल के लिए ज़रूरी खास स्किल्स से लैस करेगा, जिससे क्लासरूम में उनकी प्रभावशीलता बढ़ेगी। इसके अलावा, यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करता है और हज़ारों शिक्षकों के करियर को सुरक्षित रखने में मदद करता है। जानकारों का मानना है कि यह कोर्स न केवल शिक्षकों की क्वालिफिकेशन को बढ़ाएगा बल्कि प्राइमरी क्लास के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा भी सुनिश्चित करेगा। यह पहल नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के अनुरूप है, जो शिक्षकों के प्रोफेशनल विकास पर खास ज़ोर देती है। इससे देश भर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
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