Madhya Pradesh में विद्यार्थियों और लाभार्थियों से जुड़ी व्यवस्था बदली

खबर सार :-

दिव्यांग बच्चों की शिक्षा और उनके प्रशिक्षण एवं पुनर्वास की तमाम दिक्कतों का समाधान कर दिया गया है। हर छोटी-बड़ी परेशानी के लिए भोपाल के चक्कर काटने पड़ते थे। उनकी ऐसी समस्याएं जिलास्तर पर ही निपटाई जाएंगी।
Madhya, Pradesh में दिव्यांग संस्थाओं का भुगतान आसान, Bhopal पर निर्भरता घटी

खबर विस्तार : -

भेपाल, मध्य प्रदेश में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा उनके प्रशिक्षण और पुनर्वास में आ रही दिक्कतें अब दूर कर ली जाएंगी। अभी तक इन परेशानियों को भोपाल के अधिकारी देखा करते थे, लेकिन इनका विकेंद्रीकरण कर दिया गया है। छोटी और बड़ी, सभी समस्याएं जिले के अधिकारी ही निपटाएंगे। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने इस संबंध में एक आदेश भी जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत नीधि के उपयोग और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है।

अब भुगतान की गति पर नजर

बच्चों की समस्याएं और उनके पुनर्वास को लेकर कलेक्टरों और विभागीय अधिकारियों को इनसे जुड़ी परेशानियों और उनके कार्यों को निष्पादित करने की जिम्मेदारी दी गई है। दरअसल, अभी तक कई तरह की दिक्कतें आ रही थी। सरकार की ओर से धनराशि जारी करने के बाद भी उन पर काम नहीं होता था। नई व्यवस्था के तहत कभी धन की कमी और कभी धन का पेंडिंग रह जाना, दोनों का समाधान हो सकेगा। विभाग के आदेश के बाद एक नई बात सामने यह आई है कि मामलों में पर्याप्त ब्याज निधि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान नहीं किया जाता था। कई ऐसे भी मौके आते थे, जबकि महीने की राशि एक साथ ही पेमेंट ऑनलाइन माध्यम से जारी कर दी जाती थी। इस तरह से दिक्कतें हावी हो रही थी। 

समय से भुगतान नहीं किया जाता था

जिला स्तर की समस्याओं को लेकर लोग प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच जाया करते थे, इसलिए अब जिला स्तर पर उपलब्ध निधि के अनुसार ही भुगतान और कार्यवाही आगे बढा़ने पर जोर दिया जाएगा। मध्य प्रदेश में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के तहत कुल 1574 विद्यार्थी हैं। इनमें से 944 आवासी और 630 गैर आवासी बताए गए हैं।

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विकेंद्रीकरण के साथ जवाबदेही भी

सरकार की ओर से 20 शासकीय संस्थाएं संचालित की गई हैं। इनमें 18 विद्यालय एक प्रशिक्षण केंद्र और एक छात्रावास शामिल है। सरकार की ओर से मुहैया कराए गए धन से शिक्षक का वेतन बिजली, पानी, रखरखाव, छात्रावास का संचालन और भोजन के अलावा जरूरी चीजों पर खर्च किया जाता था। विभागीय बजट के संबंध में एक आंकड़ा कहता है की संस्थानों के लिए 24 से 25 करोड़ रुपए सालाना खर्च जाता है। 

सरकार की इन योजनाओं के अंतर्गत ही 35 अनुदान प्राप्त संस्थाएं भी दायरे में हैं। इनकी पेमेंट की राशि निर्धारण सीमा से अधिक होने पर उपलब्ध राशि स्वीकृति के अनुसार, जिला स्तर पर भुगतान की कार्यवाही करने का प्रावधान है। इसके साथ ही विषम परिस्थितियों में लोगों को भोपाल पर निर्भर रहना पड़ता था। अब विकेंद्रीकरण हो जाने के बाद भुगतान और रिकॉर्ड के अलावा सभी जिम्मेदारियों का उत्तरदायित्व जिला स्तर पर होगा। 

3410 विद्यार्थियों के लिए भुगतान की है जिम्मेदारी

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अनुसार, सरकार की ओर से किया गया बदलाव यह केवल निधि का समय के भुगतान तक ही सीमित नहीं है, योजना के अनुसार लंबित भुगतान समय पर हो, जारी भुगतान का क्रियान्वयन सही से हो और नई प्रक्रिया जरूरत के अनुसार ही उपयोग करने पर जोर दिया गया है। इस व्यवस्था को लागू करने से एक फायदा यह भी है कि संबंधित मामलों को निपटाने में जिला स्तर के अधिकारियों को ही आगे रहना होता है।

इसलिए, अब उन्हें फैसले लेने में देर नहीं होगी। वह तत्काल ही समस्याओं को निष्पादित कर सकते हैं। 20 शासकीय और 23 शैक्षणिक अनुदान प्राप्त संस्थाओं में पढ़ने वाले 3410 विद्यार्थियों के लिए भुगतान में तेरी का असर संस्थाओं के संचालक को प्रभावित कर रहा है। इससे कर्मचारियों का वेतन, बिजली, पानी, प्रशिक्षण, भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकताएं प्रभावित होती हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शासन की ओर से जारी की गई धनराशि जिला स्तर पर समय से पहुंचे और हितग्राहियों को लंबित भुगतान समय में कर दिया जाए।

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