परिषदीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर, पहले सीखेंगे और फिर सिखाएंगे

खबर सार :-

शिक्षकों के लिए नवाचारों, बेहतरीन शिक्षण पद्धतियों और सफल प्रयोगों को साझा करने के लिए बैठक करने पर जोर दिया जा रहा है। इनमें बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के साथ लक्ष्यों के अनुरूप, बच्चों में तार्किक क्षमता और उच्च-स्तरीय सोच को विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है।
डीएम के पास होगी सारी जिम्मेदारी, बच्चों में तार्किक शक्ति का विकास करेंगे

खबर विस्तार : -

लखनऊ:  उत्तर प्रदेश सरकार परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। नई व्यवस्था में शिक्षा को मजबूत करने और छात्रों के सीखने की कठिनाई दूर की जाएगी। समय-समय पर प्रयासों के रिजर्ल्ट देखे जाएंगे। पढ़ाई में सुधार लाने के लिए शिक्षकों की क्षमता को भी परखा जाएगा। उनकी भी समस्याएं दूर की जाएंगी। 

इस संदर्भ में, न्याय पंचायत स्तर पर एक मासिक शिक्षक संकुल की बैठक की जाएगी। इन मासिक बैठकों को अधिक प्रभावी बनाने का इरादा साफ कर दिया गया है। इन बैठकों के जरिए शिक्षकों को अपने नवाचारों, उत्कृष्ट शिक्षण विधियों और सफल शैक्षिक प्रयोगों को साझा करने का अच्छा मौका मिला करेगा। अनुभव को साझा करने का मौका कम ही मिल पाता है। इसलिए यह पहल अभी से अच्छी मानी जा रही है।

तार्किक सोच को बढ़ावा भी है मिल सकता

इससे विद्यालयों में सीखने का बेहतर माहौल बनाने में सफलता मिलेगा। साथ ही लक्ष्यों को प्राप्त करने और बच्चों में तार्किक व विश्लेषणात्मक सोच को बढ़ावा भी मिल सकता है। बच्चों के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि बच्चों के साथ इन शिक्षकों को भी संकुल बैठकों का लाभ मिल सकता है।

इस आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों की पेशेवर क्षमताओं को विकसित करना है। विद्यालयों में अपनाए जा रहे प्रभावी शिक्षण के तरीकों को व्यापक स्तर पर साझा करना है। यदि प्रयास सफल होंगे तो उनको आगे भी बढ़ाया जाएगा। प्रभावी शैक्षिक प्रयोगों को लागू करने के लिए यहां ठोस कदम उठाए जाएंगे। शिक्षकों को (रोटेशन के आधार पर) नवाचारों और अनुभवों को प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। इससे शिक्षक एक-दूसरे की सफल पहलों से सीख सकेंगे। वह अपना अनुभव बच्चों के समक्ष रखेंगे। 

शिक्षक संकुल बैठक आयोजित की जाएगी

किसी महीने का तीसरा मंगलवार अवकाश का दिन होता है, तो शिक्षक संकुल बैठक अगले कार्य दिवस पर आयोजित की जाएगी। पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि इस निर्धारित एजेंडे का सख्ती से पालन किया जाएगा। इसमें किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक की अवधि का समय निर्धारित किया गया है। इसके लिए बैठक का समय दोपहर 12ः00 बजे से 2ः00 बजे तक रख गया है। वहीं 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक की बैठक का समय दोपहर 1ः00 बजे से 3ः00 बजे तक रख गया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की बैठकेें और उनका समय अलग रहेगा। सबसे ज्यादा ध्यान अतिरिक्त मुख्य सचिव के निर्देश पर दिया जा रहा हैं।

इसमें कक्षा शिक्षण में हायर-ऑर्डर थिंकिंग स्किल्स यानी उच्च-स्तरीय चिंतन कौशल को प्रभावी किया जाना है। इसमें शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। वह छात्रों में सवाल करने की आदत डालेंगे। इससे छात्रों की विश्लेषणात्मक सोच, तार्किक क्षमता और समस्या-समाधान करने की आदत पड़ेगी। पाठ योजनाओं में वाद-विवाद और समस्या-आधारित गतिविधियों को शामिल किया गया है। इससे बच्चों की आदत में बदलाव किया जा सकता है। इन प्रयासों में प्रत्येक शिक्षक संकुल बैठक में आकर कुछ अनुभव पाएगा। वह अपना प्लान भी बताएगा।

बच्चों की आदत में बदलाव है किया जा सकता

आने वाले महीने के लिए स्पष्ट और मापने योग्य शैक्षिक लक्ष्य बनाएंगे। इन बैठकों में छात्रों की शैक्षणिक प्रगति, निपुण लक्ष्यों की प्राप्ति और प्रभावी शिक्षण रणनीतियों के क्रियान्वयन के विकल्प तय किए जाएंगे। सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि शिक्षक संकुल की ये बैठकें नियमित रूप से हों। यानी जिलाधिकारी के पास इन बैठको के प्लान से लेकर नतीजा तक की जानकारी करनी होगी। संबंधित शिक्षा अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, पूरी तैयारी और तय एजेंडे के पालन के माध्यम की जाएगी। 

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