तमिलनाडुः ब्रेकफास्ट स्कीम के लिए टेंडर जारी, 34 लाख से ज्यादा बच्चों को लाभ  मिलेगा

खबर सार :-

तमिलनाडु सरकार ने पेरुंथलाइवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम को नए अंदाज में लागू करने एवं नीट को पूरी तरह खत्म करने पर जोर दिया है। सीएम ने दोनों योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
तमिलनाडु सरकार ने किया नीट का विरोध, विकल्प के लिए केंद्र को भेजा प्रस्ताव

खबर विस्तार : -

चेन्नई, राज्य सरकार ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 34 लाख से अधिक बच्चों को लेकर एक बड़ा फैसला करने जा रही है। इस दिशा में पहला कदम भी पढ़ा दिया है। योजना के अंतर्गत तमिलनाडु सरकार ने पेरुंथलाइवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम के लिए टेंडर मांगे हैं। यह टेंडर आवश्यक खाद्य सामग्री खरीदने के लिए हैं। यह पूरे राज्य के लिए हैं।

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प्रोग्राम को बिना किसी रुकावट के है लागू करना

योजना के अनुसार टेंडर में किसी प्रकार का घपला न हो, इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक टेंडर स्वीकार किए जाएंगे। योजना के अनुसार सरकार इस स्कीम से बच्चों को भोजन की व्यवस्था करेगी। खरीद प्रक्रिया राज्य के कंज्यूमर कोऑपरेटिव नेटवर्क के जरिए की जाएगी।  सरकार चाहती है कि सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालय के बच्चे 1 जनवरी, 2027 मुहैया कराए जाने वाले भोजन को स्कूल में ले सके। योजना शुरू होने वाले तीन महीने के समय के दौरान ब्रेकफास्ट प्रोग्राम को बिना किसी रुकावट के लागू करना है। इस संबंध में टेंडर नोटिफिकेशन जारी किए जा चुके हैं। 

इसके मुताबिक, सरकार ने किलोग्राम के पैकेट में 1,300 मीट्रिक टन डबल-रोस्टेड रवा और एक किलोग्राम के पैकेट में पैक किया हुआ 1,200 मीट्रिक टन सांबा रवा, साथ ही 200 ग्राम के पैकेट में सप्लाई की जाने वाली खाद्य सामग्री की एक और कैटेगरी खरीदने की अनुमति दी है। सरकार की ओर से सूचना दी गई है कि पूरे भारत के सप्लायर इलेक्ट्रॉनिक टेंडरिंग प्रोसेस में हिस्सा ले सकते हैं। जिसमें टेंडर डॉक्यूमेंट्स 2 नवंबर को डाउनलोड करा दिए गए हैं। दो दिसंबर तक बिड जमा किए जाने हैं। इस पहल में आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के बच्चों को पौष्टिक भोजन कराया जाना है।

कुछ चुने हुए स्कूलों को ही शामिल किया गया

यह सुबह का खाना होगा। ब्रेकफास्ट की यह पहल 15 सितंबर, 2022 को एम.के. स्टालिन की डीएमके सरकार की ओर से इसे शुरू किया गया था। यह प्रोग्राम प्राइमरी स्कूल के बच्चों, खासकर आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के लिए था। जब यह योजना शुरू की गई थी, तब इसमें कुछ चुने हुए स्कूलों को ही शामिल किया गया था। बाद में इस स्कीम को तमिलनाडु के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शामिल करने के लिए कई योजनाएं बनाई गईं। इसे कई चरणों में बढ़ाया भी गया। जो विद्यालय किसी भी प्रकार की सरकारी मदद पाते हैं, उन संस्थानों को भी इसमें शामिल कर लिया गया।

इससे फायदा उठाने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई। दरअसल सितंबर में ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने इस योजना पर ध्यान दौड़ाया। उनको क्लास 6 से 8 तक के छात्रों तक इसे बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई। इससे 44,984 स्कूलों के लगभग 34.64 लाख बच्चों को लाभ होगा। 217.63 करोड़ रुपए के अतिरिक्त आवंटन की जरूरत भी महसूस की गई। अब यह प्रोग्राम का कुल आवंटन 724 करोड़ रुपए हो गया। इस स्कीम में कहा गया है कि क्लासरूम एक्टिविटी शुरू होने से पहले छात्रों को ताजा नाश्ता दिया जाता है। 

प्रवेश का आधार केवल 12वीं कक्षा के अंक हों

दूसरी ओर तमिलनाडु की वर्तमान टीवीके सरकार ने मेडिकल पाठ्यक्रमों व अन्य उच्च शिक्षा कार्यक्रमों में बदलाव की जरूरत महसूस की है। इसमें प्रवेश के लिए नीट और ऐसी ही अन्य परीक्षाओं को पूरी तरह से समाप्त करने की मांग दोहराई है।

केंद्र सरकार की टीम के सामने नीट और ऐसी ही अन्य परीक्षाओं को पूरी तरह से समाप्त करने की सिफारिश के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव भी दिया गया है।  मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस संबंध में एक पोस्ट में लिखा, “इस बैठक के दौरान, तमिलनाडु सरकार की ओर से उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए नीट या इसी तरह की अन्य परीक्षाओं के आयोजन पर विरोध जताया गया। इसके बजाय, सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि प्रवेश का आधार केवल 12वीं कक्षा के अंक होने चाहिए।”

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