फेड का बड़ा फैसला: ब्याज दरों में नहीं हुआ बदलाव, महंगाई पर सख्त रुख बरकरार; एआई निवेश बना अमेरिकी अर्थव्यवस्था का नया इंजन
खबर सार :-
फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि उसकी प्राथमिकता महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक स्थिरता है। साथ ही एआई आधारित निवेश, उत्पादकता और औद्योगिक विस्तार को भविष्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है। अब वैश्विक बाजारों की नजर फेड के अगले नीतिगत कदम और महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी।
खबर विस्तार : -
Federal Reserve: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी मौद्रिक नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करते हुए ब्याज दरों को 3.5 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रखने का फैसला किया है। अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष अपनी पहली पेशी में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक का सबसे बड़ा लक्ष्य महंगाई को नियंत्रित करना और मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। उन्होंने दोहराया कि 2 प्रतिशत महंगाई लक्ष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी के सामने वार्श ने कहा कि जून में हुई फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक में आर्थिक परिस्थितियों का विस्तृत आकलन करने के बाद ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया गया। उनका कहना था कि फेडरल रिजर्व किसी भी स्थिति में लंबे समय तक ऊंची महंगाई को स्वीकार नहीं करेगा और उपलब्ध सभी मौद्रिक उपकरणों का उपयोग कर कीमतों को नियंत्रण में लाएगा।
वैश्विक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव
केविन वार्श ने कहा कि हालिया वैश्विक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोग में कुछ नरमी जरूर देखने को मिली है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां लगातार विस्तार कर रही हैं। इसके साथ ही श्रम बाजार भी संतुलित और मजबूत स्थिति में बना हुआ है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि हाउसिंग सेक्टर अब भी अपेक्षित रफ्तार हासिल नहीं कर पाया है। उन्होंने कहा कि विदेशों में चल रहे युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक घटनाएं फेडरल रिजर्व के नियंत्रण से बाहर हैं, लेकिन ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट के प्रभावी प्रबंधन के जरिए महंगाई को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि फेडरल रिजर्व के पास अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए आवश्यक संसाधन, नीतिगत क्षमता और प्रतिबद्धता मौजूद है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ता निवेश सकारात्मक संकेत
वार्श ने सुनवाई के दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ते निवेश को सबसे सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष की पहली तिमाही में मशीनों और औद्योगिक उपकरणों में निवेश लगभग 8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि हाई-टेक उपकरणों पर खर्च में करीब 25 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उनके अनुसार इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण देशभर में तेजी से बन रहे डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों की बढ़ती मांग है। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि एआई से अर्थव्यवस्था को कितनी दीर्घकालिक बढ़त मिलेगी, लेकिन भविष्य में इससे जुड़ा निवेश सामान्य पूंजी निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएगा। साथ ही फेडरल रिजर्व इस बात पर भी नजर बनाए हुए है कि एआई का रोजगार, उत्पादकता और महंगाई पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि उत्पादकता में सुधार जारी है, श्रमबल स्थिर बना हुआ है और रोजगार सृजन भी कार्यबल की वृद्धि के अनुरूप हो रहा है।

भविष्य की नीतियों को और प्रभावी बनाने का निर्णय
केविन वार्श ने यह भी घोषणा की कि फेडरल रिजर्व अपनी नीतियों और कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा शुरू करेगा। इसके तहत संचार व्यवस्था, बैलेंस शीट नीति, आर्थिक आंकड़ों के उपयोग, उत्पादकता एवं रोजगार और महंगाई के ढांचे जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों पर अलग-अलग टास्क फोर्स बनाई जाएंगी। ये सभी समितियां वर्ष के अंत तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी, जिनके आधार पर भविष्य की नीतियों को और प्रभावी बनाया जाएगा। कांग्रेस की सुनवाई के दौरान राजनीतिक मतभेद भी सामने आए। रिपब्लिकन समिति अध्यक्ष फ्रेंच हिल ने फेडरल रिजर्व से मूल्य स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की, जबकि डेमोक्रेटिक सदस्य मैक्सीन वॉटर्स ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के संदर्भ में केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए।
फेडरल रिजर्व एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक
इन सवालों के जवाब में केविन वार्श ने स्पष्ट कहा कि फेडरल रिजर्व एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक है और अपनी संस्थागत स्वायत्तता पर उसे गर्व है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दबाव का उनकी नीतिगत जिम्मेदारियों पर असर नहीं पड़ेगा और वे पूरी निष्पक्षता के साथ अपना काम जारी रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसलों का प्रभाव केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। इन फैसलों से डॉलर की मजबूती, कर्ज की लागत, वैश्विक निवेश प्रवाह, उभरते बाजारों की पूंजी व्यवस्था और दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में फेड का यह निर्णय आने वाले महीनों में वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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