2030 तक पानी बनेगा सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर! भारत के वाटर सेक्टर में 20 लाख करोड़ रुपये निवेश की संभावना
खबर सार :-
बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के बीच भारत में जल प्रबंधन भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र बनता जा रहा है। पीएल कैपिटल की रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संभावित निवेश जल सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल, सीवेज प्रबंधन और औद्योगिक जल शोधन को नई दिशा देगा तथा सतत विकास की मजबूत नींव रखेगा।
खबर विस्तार : -
PL Capital Report: भारत में तेजी से बढ़ती जल मांग और सीमित जल संसाधनों के बीच आने वाले वर्षों में वाटर सेक्टर देश के सबसे बड़े निवेश क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। पीएल कैपिटल की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध जल आपूर्ति से लगभग दोगुनी होने की आशंका है। इस चुनौती से निपटने के लिए अगले दशक में जल शोधन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर और जल वितरण परियोजनाओं में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना जताई गई है।
देश में पानी की बढ़ती खपत और जल संकट
रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की करीब 18 प्रतिशत आबादी का घर है, जबकि वैश्विक मीठे पानी के संसाधनों में उसकी हिस्सेदारी केवल 4 प्रतिशत है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण, भू-जल के अत्यधिक दोहन और कृषि क्षेत्र में पानी की बढ़ती खपत के कारण देश में जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। यही वजह है कि जल सुरक्षा अब राष्ट्रीय विकास और आर्थिक नीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जल शोधन संयंत्र, जल भंडारण, पाइपलाइन नेटवर्क, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और आधुनिक सीवेज सिस्टम जैसी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश करना अनिवार्य होगा। इससे न केवल पेयजल उपलब्धता में सुधार होगा बल्कि उद्योगों और शहरों की जल जरूरतों को भी टिकाऊ तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
जल सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स की जरूरत क्यों ?
पीएल कैपिटल के चीफ बिजनेस ऑफिसर (एडवाइजरी) विक्रम कसाट ने कहा कि अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों की तुलना में जल क्षेत्र में निवेश आर्थिक उतार-चढ़ाव पर कम निर्भर करता है। जल सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट दीर्घकालिक, नीतिगत और सतत विकास के लिए आवश्यक हैं। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में जल शुद्धिकरण, समुद्री जल को मीठा बनाने, अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और रिसाइक्लिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ती रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएं भी इस क्षेत्र में निवेश को गति दे रही हैं। जल जीवन मिशन, अमृत 2.0 और नमामि गंगे जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वच्छ पेयजल, सीवरेज नेटवर्क और अपशिष्ट जल शोधन परियोजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वहीं जल शक्ति मंत्रालय के बढ़ते बजट आवंटन से राज्यों और शहरी निकायों को नई परियोजनाएं शुरू करने में मदद मिल रही है।
सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ा निवेश अवसर
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे वाटर सेक्टर में सबसे बड़ा निवेश अवसर सीवेज ट्रीटमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में दिखाई दे रहा है। भारत में प्रतिदिन 72,000 मिलियन लीटर से अधिक सीवेज उत्पन्न होता है, जबकि इसके उपचार की क्षमता काफी कम है। परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में बिना शोधन किया गया गंदा पानी नदियों और अन्य जल स्रोतों में पहुंच जाता है, जिससे पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अंतर को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, वेस्टवॉटर रिसाइक्लिंग सिस्टम और जल पुन: उपयोग परियोजनाओं में निवेश की जरूरत होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ उद्योगों के लिए वैकल्पिक जल स्रोत भी उपलब्ध होंगे।
अत्यधिक शुद्ध औद्योगिक जल की मांग बढ़ी
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और स्पेशलिटी केमिकल्स जैसे उभरते उद्योगों के विस्तार से अत्यधिक शुद्ध औद्योगिक जल की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे वाटर ट्रीटमेंट, अल्ट्रा-प्योर वाटर सिस्टम और रिसाइक्लिंग तकनीकों से जुड़ी कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि जल क्षेत्र में होने वाला निवेश न केवल आर्थिक विकास को गति देगा बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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