कीमती धातुओं पर दबाव जारी; एमसीएक्स पर सोना 1.54 लाख और चांदी 2.30 लाख रुपये के नीचे
खबर सार :-
सोना और चांदी फिलहाल ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल की तिहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। एमसीएक्स पर चांदी करीब दो प्रतिशत और सोना भी दबाव में रहा। आगे इनकी दिशा फेड की ब्याज दर नीति, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व तनाव से तय होगी। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने या दर कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर फिर तेजी लौट सकती है।
खबर विस्तार : -
Gold Silver Rate Today: वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच बुधवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और निवेशकों की बदलती धारणा ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। इसका असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर साफ नजर आया, जहां सोना 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे फिसल गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की चमक कमजोर रही। हाजिर सोना 4,350 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता नजर आया, जबकि हाजिर चांदी करीब 62.8 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर संघर्ष करती रही। वैश्विक बाजार में कमजोरी का असर घरेलू वायदा बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों की बिकवाली बढ़ गई।
चांदी में सबसे ज्यादा गिरावट
एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। पिछले कारोबारी सत्र में 2,32,419 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई चांदी गिरकर 2,27,931 रुपये के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गई। इस दौरान इसमें 4,488 रुपये यानी 1.93 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हालांकि, बाद में निचले स्तर से कुछ रिकवरी देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक चांदी 3,734 रुपये यानी 1.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,28,685 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक व्यापक कमोडिटी बाजार में कमजोरी और हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली ने चांदी पर अपेक्षाकृत ज्यादा दबाव बनाया। चांदी की कीमतें औद्योगिक मांग के साथ-साथ निवेश मांग से भी प्रभावित होती हैं। ऐसे में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और जोखिम वाली परिसंपत्तियों में बदलाव का असर इस धातु पर सोने की तुलना में अधिक तेज दिखाई दे सकता है।
सोना भी 1.54 लाख के नीचे
सोने की कीमतों में भी बुधवार को कमजोरी रही। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स अपने पिछले बंद स्तर 1,54,262 रुपये प्रति 10 ग्राम से 858 रुपये यानी 0.55 प्रतिशत गिरकर 1,53,404 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। बाद में सोने ने भी कुछ रिकवरी की, लेकिन यह अब भी लाल निशान में रहा। खबर लिखे जाने तक सोना 581 रुपये यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,53,681 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कमजोरी और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने भी घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ाया।
बॉन्ड यील्ड बनी बड़ी चुनौती
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे प्रमुख कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में लगातार बढ़ोतरी है। 30 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 19 वर्षों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। अन्य सरकारी बॉन्ड की यील्ड में भी मजबूती देखी जा रही है। ऊंची बॉन्ड यील्ड निवेशकों को निश्चित रिटर्न देने वाली परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित करती है। इसके चलते सोने और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग पर असर पड़ सकता है। मजबूत डॉलर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर आधारित कीमती धातुओं के लिए प्रतिकूल माना जाता है।
महंगा तेल बढ़ा रहा दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी सोने-चांदी के लिए माहौल चुनौतीपूर्ण बनाया है। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 85.5 डॉलर और ब्रेंट क्रूड लगभग 91.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। महंगे तेल से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा होती है। इससे केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना मजबूत हो सकती है। ऊंची ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर गैर-ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग के लिए नकारात्मक माना जाता है।
आगे फेड और भू-राजनीति पर नजर
विशेषज्ञों के मुताबिक निकट अवधि में सोने और चांदी की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और मध्य पूर्व की स्थिति से तय होगी। यदि बॉन्ड यील्ड और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो दबाव जारी रह सकता है। वहीं, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होने या वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने की स्थिति में सोना फिर सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में आकर्षण हासिल कर सकता है। निवेशक फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड चेयरमैन के संकेतों पर भी नजर रख रहे हैं।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल).....
1. सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, मजबूत डॉलर, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों में मुनाफावसूली के कारण सोने-चांदी पर दबाव बना।
2. चांदी में कितनी गिरावट दर्ज हुई?
एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 1.93% गिरकर 2,27,931 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंची।
3. आगे सोने-चांदी की कीमतों पर किन कारकों का असर पड़ेगा?
अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, बॉन्ड यील्ड, डॉलर, कच्चे तेल की कीमतें और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति अहम रहेंगी।
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