इक्विटी निवेशकों को राहत नहीं: एलटीसीजी टैक्स हटाने से केंद्र का साफ इनकार, संसद में सरकार ने बताई वजह
खबर सार :-
केंद्र सरकार के ताजा रुख से स्पष्ट है कि इक्विटी निवेश पर एलटीसीजी टैक्स फिलहाल जारी रहेगा। सरकार इसे महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत मानते हुए तत्काल कोई बदलाव नहीं करना चाहती। हालांकि, बजट प्रक्रिया के दौरान आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों के सुझावों के आधार पर कर व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा होती रहेगी, लेकिन अभी राहत के संकेत नहीं हैं।
खबर विस्तार : -
Equity LTCG tax no removal : शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों खुदरा निवेशकों को फिलहाल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स से राहत मिलने की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में स्पष्ट कर दिया कि इक्विटी निवेश पर लगने वाले एलटीसीजी टैक्स को समाप्त करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। सरकार ने कहा कि मौजूदा कर व्यवस्था आर्थिक परिस्थितियों और राजस्व आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है तथा इसमें समय-समय पर समीक्षा की जाती है।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर सरकार की सफाई
लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार के पास रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इक्विटी लेनदेन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को समाप्त करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कर नीतियों की नियमित समीक्षा बजट प्रक्रिया और आवश्यक कानूनी संशोधनों के दौरान व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की जाती है। इसमें कैपिटल गेन्स टैक्स की दरें भी शामिल रहती हैं। सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी लेनदेन पर एलटीसीजी टैक्स से होने वाला राजस्व लगातार बढ़ा है। असिसमेंट ईयर 2024-25 (वित्त वर्ष 2023-24) में सरकार को इस मद से 72,249 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि असिसमेंट ईयर 2025-26 (वित्त वर्ष 2024-25) में यह आंकड़ा बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस प्रकार केवल दो वर्षों में सरकार ने एलटीसीजी टैक्स के जरिए कुल 2.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाया है। ये आंकड़े इस कर के राजकोषीय महत्व को भी दर्शाते हैं।
इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश
दरअसल, मौजूदा नियमों के तहत सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से एलटीसीजी टैक्स लगाया जाता है। हालांकि, यह कर तभी लागू होता है जब किसी वित्त वर्ष में कुल पूंजीगत लाभ 1.25 लाख रुपये से अधिक हो। इसके अलावा, किसी निवेश को दीर्घकालिक परिसंपत्ति मानने के लिए उसे कम से कम 12 महीने तक अपने पास रखना आवश्यक है। संसद में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को एलटीसीजी टैक्स में कोई विशेष छूट दी गई है, जबकि घरेलू और खुदरा निवेशकों को यह कर देना पड़ता है। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इक्विटी निवेश के मामले में एफपीआई, घरेलू निवेशक और खुदरा निवेशक सभी के लिए एलटीसीजी टैक्स की दर समान रूप से 12.5 प्रतिशत ही निर्धारित है। यानी इस मामले में किसी भी श्रेणी के निवेशकों को अलग कर लाभ नहीं दिया गया है।
आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026
सरकार ने यह भी बताया कि आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से केवल सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश से जुड़ी कर व्यवस्था को तर्कसंगत बनाया गया है। इसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और सरकारी प्रतिभूति बाजार को अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विशेषज्ञों ने करों में राहत देने की मांग उठाई
एलटीसीजी और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) टैक्स को लेकर शेयर बाजार के निवेशकों के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है। कई निवेशक संगठनों और बाजार विशेषज्ञों ने इन करों में राहत देने की मांग भी उठाई है। इसी वर्ष मई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार निवेशकों की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है और कर व्यवस्था से जुड़े सुझावों पर विचार किया जाएगा। हालांकि उन्होंने उस समय भी एलटीसीजी या एसटीसीजी टैक्स की दरों में किसी प्रकार की कटौती या बदलाव का कोई आश्वासन नहीं दिया था।
राजस्व संग्रह और वित्तीय संतुलन को प्राथमिकता
संसद में सरकार के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल केंद्र सरकार राजस्व संग्रह और वित्तीय संतुलन को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशकों को निकट भविष्य में एलटीसीजी टैक्स से किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने यह जरूर दोहराया है कि आर्थिक परिस्थितियों और बजटीय आवश्यकताओं के अनुसार कर नीतियों की समीक्षा भविष्य में भी जारी रहेगी।
Equity LTCG tax no removal : शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों खुदरा निवेशकों को फिलहाल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स से राहत मिलने की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में स्पष्ट कर दिया कि इक्विटी निवेश पर लगने वाले एलटीसीजी टैक्स को समाप्त करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। सरकार ने कहा कि मौजूदा कर व्यवस्था आर्थिक परिस्थितियों और राजस्व आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है तथा इसमें समय-समय पर समीक्षा की जाती है।
लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स पर सरकार की सफाई
लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार के पास रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इक्विटी लेनदेन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को समाप्त करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि कर नीतियों की नियमित समीक्षा बजट प्रक्रिया और आवश्यक कानूनी संशोधनों के दौरान व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की जाती है। इसमें कैपिटल गेन्स टैक्स की दरें भी शामिल रहती हैं। सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी लेनदेन पर एलटीसीजी टैक्स से होने वाला राजस्व लगातार बढ़ा है। असिसमेंट ईयर 2024-25 (वित्त वर्ष 2023-24) में सरकार को इस मद से 72,249 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि असिसमेंट ईयर 2025-26 (वित्त वर्ष 2024-25) में यह आंकड़ा बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस प्रकार केवल दो वर्षों में सरकार ने एलटीसीजी टैक्स के जरिए कुल 2.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाया है। ये आंकड़े इस कर के राजकोषीय महत्व को भी दर्शाते हैं।
इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश
दरअसल, मौजूदा नियमों के तहत सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से एलटीसीजी टैक्स लगाया जाता है। हालांकि, यह कर तभी लागू होता है जब किसी वित्त वर्ष में कुल पूंजीगत लाभ 1.25 लाख रुपये से अधिक हो। इसके अलावा, किसी निवेश को दीर्घकालिक परिसंपत्ति मानने के लिए उसे कम से कम 12 महीने तक अपने पास रखना आवश्यक है। संसद में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को एलटीसीजी टैक्स में कोई विशेष छूट दी गई है, जबकि घरेलू और खुदरा निवेशकों को यह कर देना पड़ता है। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इक्विटी निवेश के मामले में एफपीआई, घरेलू निवेशक और खुदरा निवेशक सभी के लिए एलटीसीजी टैक्स की दर समान रूप से 12.5 प्रतिशत ही निर्धारित है। यानी इस मामले में किसी भी श्रेणी के निवेशकों को अलग कर लाभ नहीं दिया गया है।
आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026
सरकार ने यह भी बताया कि आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से केवल सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश से जुड़ी कर व्यवस्था को तर्कसंगत बनाया गया है। इसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और सरकारी प्रतिभूति बाजार को अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विशेषज्ञों ने करों में राहत देने की मांग उठाई
एलटीसीजी और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) टैक्स को लेकर शेयर बाजार के निवेशकों के बीच लंबे समय से चर्चा होती रही है। कई निवेशक संगठनों और बाजार विशेषज्ञों ने इन करों में राहत देने की मांग भी उठाई है। इसी वर्ष मई में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार निवेशकों की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है और कर व्यवस्था से जुड़े सुझावों पर विचार किया जाएगा। हालांकि उन्होंने उस समय भी एलटीसीजी या एसटीसीजी टैक्स की दरों में किसी प्रकार की कटौती या बदलाव का कोई आश्वासन नहीं दिया था।
राजस्व संग्रह और वित्तीय संतुलन को प्राथमिकता
संसद में सरकार के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल केंद्र सरकार राजस्व संग्रह और वित्तीय संतुलन को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशकों को निकट भविष्य में एलटीसीजी टैक्स से किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि, सरकार ने यह जरूर दोहराया है कि आर्थिक परिस्थितियों और बजटीय आवश्यकताओं के अनुसार कर नीतियों की समीक्षा भविष्य में भी जारी रहेगी।
अन्य प्रमुख खबरें
-
निफ्टी का लक्ष्य घटा, दिसंबर तक 25,000 की उम्मीद; बढ़े जोखिम
2026-10-19
-
सोना ₹1.48 लाख के पार, चांदी भी चमकी; जानें आगे के संकेत
2026-10-19
-
DELHI में प्रदर्शनों के चलते माल डंप, व्यापारियों को 3,000 करोड़ का नुकसान
2026-10-17
-
Windfall Tax: सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर 5 गुना विंडफॉल टैक्स बढ़ाया
2026-10-16
-
Jio IPO: 21 अक्टूबर को खुलेगा इश्यू, RIL शेयरधारकों को बड़ा मौका
2026-10-15
-
वैश्विक गिरावट बेअसर! सेंसेक्स 570 अंक उछला, निफ्टी भी झूमा
2026-10-15
-
इंडिगो फ्लाइट में आग के बाद DGCA का बड़ा फैसला, पावरबैंक बैन
2026-10-14
-
महंगाई का डबल अटैक! थोक दर 11.39% पर, बाजार से रसोई तक मार
2026-10-14
-
त्योहारी सीजन में धनवर्षा जारी, 7 लाख करोड़ पार होगा कारोबार
2026-10-14
-
सेबी की राहत: मार्च 2027 तक IPO साइज में 50% बदलाव की छूट
2026-10-14
-
मोदी की कनाडा यात्रा से पहले भारत-कनाडा CEPA पर तेज हुई वार्ता
2026-10-14
-
आईटी शेयरों के दम पर सेंसेक्स चढ़ा, निफ्टी में मामूली गिरावट
2026-10-14
-
आईबीएम-एमईआईटीवाई की डील, डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगी उड़ान
2026-10-13
-
रुपये में गिरावट पर RBI की नजर, उतार-चढ़ाव थामने की तैयारी
2026-10-13
-
IMF का 7% ग्रोथ अनुमान: भारत की ताकत पर दुनिया का भरोसा
2026-10-13