श्रीगंगानगर: वीबी-जीरामजी अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन और विकास के नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। इस अधिनियम के उद्देश्य को लेकर जिला भाजपा ने प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र पाल सिंह टीटी ने अधिनियम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि यह कानून रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को समग्र रूप से जोड़ता है और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक स्थायी विकास मॉडल प्रस्तुत करता है। टीटी ने बताया कि वीबी-जीरामजी अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली संपत्तियां बनाई जाएं, भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाए, और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जाए। इस कानून के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर गरीब, पिछड़ा और जनजातीय वर्ग रोजगार प्राप्त कर सके, और उनके जीवनस्तर में सुधार हो। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करना है, जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 के भारत के राष्ट्रीय विजन में कहा है। यह पूरी योजना महात्मा गांधी जी की विचारधारा के अनुरूप है, जो राम राज्य की स्थापना की दिशा में एक कदम है।"
पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष निहालचंद मेघवाल ने कांग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि "कांग्रेस चाहे जितनी भी साजिशें रच ले, लेकिन भारत 2047 तक 'विकसित भारत' बनकर रहेगा।" उन्होंने वीबी-जीरामजी योजना की सराहना करते हुए कहा कि इसमें मजदूरों को अधिक काम के दिन मिलेंगे और उनकी मजदूरी का भुगतान जल्दी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि 2005 में मनरेगा की शुरुआत हुई थी, लेकिन अब ग्रामीण भारत की परिस्थितियां बदल चुकी हैं। 2011-12 में जहां ग्रामीण गरीबी 25.7% थी, वहीं अब 2023-24 में यह घटकर सिर्फ 4.86% रह गई है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में कनेक्टिविटी में भी सुधार हुआ है।
भा.ज.पा. जिला अध्यक्ष शरणपाल सिंह ने इस अवसर पर कहा, "नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वीबी-जीरामजी अधिनियम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में मनरेगा में कोई पारदर्शिता नहीं थी, जबकि अब इस योजना में रियल टाइम डेटा अपलोड किया जाएगा और जीपीएस व मोबाइल मॉनिटरिंग की प्रणाली होगी, जिससे लाभार्थियों तक सही सहायता पहुंच सकेगी।
नए कानून के तहत जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण, और आजिविका संबंधी बुनियादी ढांचे का निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि कार्यों में जो समस्याएं आती हैं, उनका समाधान भी इस योजना के तहत किया जाएगा। अधिनियम के अनुसार, बुआई और कटाई के मौसम में काम बंद कर दिया जाएगा, जिससे मजदूरों की कमी का संकट हल हो सके। इसके अलावा, अब मजदूरी का भुगतान हर सप्ताह किया जा सकेगा, जबकि मनरेगा में यह भुगतान 15 दिनों में होता था।
वीबी-जीरामजी अधिनियम का उद्देश्य न केवल ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन करना है, बल्कि कृषि, जलवायु अनुकूल कार्यों और बुनियादी ढांचे के निर्माण के जरिए गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रेस वार्ता में शरणपाल सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह टीटी, निहालचंद मेघवाल सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे, जिन्होंने इस योजना की अहमियत को रेखांकित किया।
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