शाहिद सत्यदेव का पार्थिव शरीर पहुंचा अपने पैतृक गांव, अंतिम दर्शन को उमड़ा जन सैलाब

खबर सार :-
थाना क्षेत्र बंडा क्षेत्र बाबूपुर गांव निवासी सत्यदेव का ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया। गांव में शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारे गूंजते रहे और लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

शाहिद सत्यदेव का पार्थिव शरीर पहुंचा अपने पैतृक गांव, अंतिम दर्शन को उमड़ा जन सैलाब
खबर विस्तार : -

शाहजहांपुरः उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के बंडा थाना क्षेत्र के बाबूपुर गांव में उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब भारतीय सेना के जवान सत्यदेव का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। गांव में जैसे ही शहीद का शव पहुंचा, पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन हो गया।

हार्ट अटैक से निधन

जानकारी के अनुसार बाबूपुर गांव निवासी सत्यदेव भारतीय सेना में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान उनकी यूनिट में अचानक हार्ट अटैक आने से उनका निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई। भारतीय सेना ने उन्हें पूरा सम्मान देते हुए उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव भेजा, जहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

शहीद सत्यदेव के परिवार में पिता रामकृष्ण, माता रामकली और पत्नी गोदावरी हैं। उनके तीन पुत्र—निलेश कुमार, अंश कुमार और सूरज कुमार हैं। सत्यदेव तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभा रहे थे। उनके अचानक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर पर मातम का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

बताया गया कि सत्यदेव की तैनाती पंचकूला के पास चंडीगढ़ क्षेत्र में थी। वहीं ड्यूटी के दौरान उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया। सेना के अधिकारियों ने पूरी सैन्य परंपरा के साथ उनके पार्थिव शरीर को उनके गांव पहुंचाया।

‘शहीद सत्यदेव अमर रहें’ के गूंजे नारे

शनिवार को जब शहीद सत्यदेव का पार्थिव शरीर बाबूपुर गांव पहुंचा, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिजन और क्षेत्रीय लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हो गए। गांव की गलियां “भारत माता की जय” और “शहीद सत्यदेव अमर रहें” जैसे नारों से गूंज उठीं। हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए उमड़ा हुआ था।

इसके बाद पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान सेना के जवानों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम संस्कार की रस्म शहीद के बड़े पुत्र निलेश कुमार ने निभाई और अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह भावुक पल वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों को नम कर गया।

अंतिम संस्कार के दौरान क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। इस मौके पर उपेंद्र पाल, सुबोध कुमार कनौजिया, बसपा के तहसील अध्यक्ष जयपाल गौतम, क्षेत्रीय विधायक चेतराम, पूर्व सैनिक राजवंत सिंह, कुलवंत सिंह और सिकंदर सिंह सहित कई लोग उपस्थित रहे। सभी ने नम आंखों से शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

गांव में शहीद की अंतिम यात्रा के दौरान देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने पुष्प अर्पित कर अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। हर किसी के मन में गर्व भी था और गहरा दुख भी कि गांव का एक बहादुर जवान अब इस दुनिया में नहीं रहा।

शहीद सत्यदेव की शहादत ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है। गांव के लोग उन्हें हमेशा एक बहादुर सैनिक और सरल स्वभाव के व्यक्ति के रूप में याद करेंगे। उनका बलिदान और देश के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
 

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