वामपंथी दलों ने की ईरान, अमेरिका और इजराइल की लड़ाई रुकवाने की मांग, सौंपा ज्ञापन

खबर सार :-
वामदलों ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया और अमेरिका द्वारा भारत के मामलों में बार-बार हस्तक्षेप को देश की संप्रभुता को कमजोर करने वाला कदम बताया। इस संबंध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया।

वामपंथी दलों ने की ईरान, अमेरिका और इजराइल की लड़ाई रुकवाने की मांग, सौंपा ज्ञापन
खबर विस्तार : -

अयोध्या: शनिवार को अयोध्या के तहसील सदर पर वामपंथी दलों ने ईरान पर अमेरिकी और इज़राइली सैन्य हमलों का कड़ा विरोध किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैकड़ों निर्दोष छात्राओं की हत्या हुई है। उन्होंने इसे अमेरिका और इज़राइल की साम्राज्यवादी नीति और वैश्विक दादागीरी का नतीजा बताया।

बताया युद्ध नियमों का उल्लंघन 

वामदलों ने इस युद्ध को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए इसे तत्काल रोके जाने की मांग की। नेताओं का कहना था कि अमेरिका और इज़राइल अंतरराष्ट्रीय कानून, राष्ट्रीय संप्रभुता और वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। उनका उद्देश्य अन्य देशों के ऊर्जा संसाधनों, सामरिक क्षेत्रों और व्यापार पर कब्जा करना है।

प्रदर्शन में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और प्रभावित भारतीय कामगारों तथा उनके परिवारों के लिए समयबद्ध निकासी और सहायता योजना बनाई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि युद्ध से उत्पन्न तेल संकट, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का बोझ मजदूरों, किसानों और गरीब तबकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

शांति की अपील

प्रदर्शन में भाकपा जिला सचिव अशोक कुमार तिवारी, माकपा जिला सचिव अशोक यादव, भाकपा (माले) जिला प्रभारी अतीक अहमद, फारवर्ड ब्लॉक संयोजक हरीशचंद्र श्रीवास्तव, माले राज्य कमेटी सदस्य राम भरोस, संयुक्त किसान मोर्चा संयोजक मया राम वर्मा, भाकपा नेता सूर्यकांत पांडेय, अयोध्या प्रसाद तिवारी, उदयचंद यादव, यासीन बेग, ओमप्रकाश यादव, मुजीब, कृष्ण कुमार मौर्य, यशोदा नंदन कृष्ण, राम सिंह, दिलीप गुप्ता, भोजराज वर्मा, राजेश मौर्य और राम प्रसाद सहित कई वामपंथी कार्यकर्ता शामिल रहे।

प्रदर्शनकारियों ने हाथ में पोस्टर, नारों और बैनरों के माध्यम से युद्ध के विरोध और शांति की अपील की। इस दौरान उपस्थित लोग लगातार “युद्ध बंद करो, शांति कायम करो” जैसे नारे लगाते रहे। इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से वामपंथी दलों ने न केवल अमेरिका और इज़राइल के सैन्य हमलों की निंदा की, बल्कि सरकार से यह भी मांग की कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

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