मानवता की अनूठी मिसाल, एक ही परिवार की तीन महिलाओं ने दान किए बाल

खबर सार :-
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शाहपुरा की इन महिलाओं की यह पहल विशेष रूप से प्रेरणादायक बन गई। यह घटना बताती है कि महिलाओं में सेवा, करुणा और संवेदनशीलता की जो भावना होती है, वह समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मानवता की अनूठी मिसाल, एक ही परिवार की तीन महिलाओं ने दान किए बाल
खबर विस्तार : -

शाहपुरा: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के शाहपुरा क्षेत्र में मानवता, संवेदनशीलता और समाज सेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। यहां एक ही परिवार की तीन महिलाओं ने कैंसर से जूझ रहे बच्चों की मदद के लिए अपने बाल दान कर समाज के सामने सेवा और करुणा का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। इस पहल ने न केवल लोगों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि यह भी साबित किया कि छोटी-सी पहल भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।

 बालों से तैयार होगी विग 

शाहपुरा की मेना धाकड़, उनकी सगी बहन आशा धाकड़ और उनकी भाभी सरोज धाकड़ ने मिलकर यह सराहनीय कदम उठाया। तीनों महिलाओं ने अपने बाल कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए दान किए, ताकि इन बालों से विग तैयार कर उन बच्चों को दी जा सके, जो बीमारी के इलाज के दौरान अपने बाल खो देते हैं। अक्सर कीमोथेरेपी के कारण बच्चों के बाल झड़ जाते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास प्रभावित होता है। ऐसे में विग उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने का साहस और आत्मबल देती है।

इन महिलाओं के इस निर्णय के पीछे एक छोटी-सी बच्ची की प्रेरणा छिपी है। शाहपुरा की नन्ही बालिका श्रेया कुमावत द्वारा कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए बाल दान करने की खबर पढ़ने के बाद तीनों महिलाएं बेहद प्रभावित हुईं। एक छोटी बच्ची द्वारा समाज सेवा की इस पहल ने उनके मन में भी दूसरों के लिए कुछ करने की भावना जगाई। उन्होंने तय किया कि वे भी इस नेक कार्य में अपना योगदान देंगी और जरूरतमंद बच्चों की मदद करेंगी।

अन्य लोगों से की समाजसेवा की अपील

मेना धाकड़, जो ज्ञानचंद धाकड़ (पूर्व पालिका उपाध्यक्ष) की पुत्रवधू हैं और वर्तमान में डाबला कचरा ग्राम पंचायत की सरपंच के रूप में सेवाएं दे रही हैं, ने बताया कि जब छोटे-छोटे बच्चे भी समाज सेवा के लिए आगे आ रहे हैं, तो हम बड़ों की भी जिम्मेदारी बनती है कि हम समाज के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायक कार्य करें। उनका कहना है कि अगर उनके बाल किसी कैंसर पीड़ित बच्चे के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं और उसे आत्मविश्वास दे सकते हैं, तो इससे बड़ी खुशी उनके लिए कोई नहीं हो सकती।

उन्होंने समाज के अन्य लोगों से भी अपील की कि वे इस तरह के मानवीय कार्यों में आगे आएं। उनके अनुसार, समाज में बदलाव लाने के लिए हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए। चाहे वह छोटा ही क्यों न हो, लेकिन उसका प्रभाव किसी जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

लोगों को मिलेगी प्रेरणा

तीनों महिलाओं ने अपने बाल श्रेया कुमावत के माध्यम से जयपुर स्थित संस्था “इन्वेटिव हेल्पिंग हेड सोसायटी” को दान किए। यह संस्था कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए विग तैयार करने का सराहनीय कार्य कर रही है। संस्था की संस्थापक और डायरेक्टर हिमांशी गहलोत इस सेवा कार्य के माध्यम से कई जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रही हैं। संस्था का उद्देश्य उन बच्चों को आत्मबल और आत्मविश्वास देना है, जो गंभीर बीमारी के कारण मानसिक और शारीरिक रूप से कठिन दौर से गुजरते हैं।

इस पहल ने समाज में यह संदेश भी दिया कि प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है। एक छोटी बच्ची की संवेदनशीलता और साहस ने तीन महिलाओं को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया और अब उनकी यह पहल अन्य लोगों को भी मानवता के कार्यों के लिए प्रेरित कर रही है।

इस प्रेरक कदम ने यह साबित कर दिया कि समाज में बदलाव लाने के लिए बड़े पद या बड़ी ताकत की जरूरत नहीं होती। अगर मन में सेवा की भावना हो, तो एक छोटा-सा कदम भी किसी के जीवन में नई उम्मीद और मुस्कान ला सकता है। शाहपुरा की इन महिलाओं की यह पहल समाज के लिए एक प्रेरक संदेश बनकर सामने आई है।
 

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