कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नए समीकरण तेजी से उभर रहे हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने बुधवार को कोलकाता में संयुक्त पत्रकार वार्ता कर अपने राजनीतिक गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन आगामी चुनावों में एक मजबूत विकल्प के रूप में सामने आएगा।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली एजेयूपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि यह गठबंधन जमीनी स्तर पर मजबूती के साथ काम करेगा और जनता का विश्वास जीतने में सफल रहेगा। ओवैसी ने बताया कि अधिकांश सीटों पर आपसी सहमति बन चुकी है, जबकि एक-दो सीटों पर बातचीत अंतिम चरण में है।
ओवैसी ने उपमुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं को भी खारिज करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य केवल सत्ता में भागीदारी नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभाना है। उन्होंने कहा, “हम उपमुख्यमंत्री पद के लिए नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ेंगे। उपमुख्यमंत्री का पद हाथ की छठी उंगली की तरह होता है, जिसकी कोई विशेष आवश्यकता नहीं होती।”
तृणमूल कांग्रेस द्वारा एआईएमआईएम को भाजपा की “बी टीम” बताए जाने के आरोपों पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा, “हम किसी की बी टीम नहीं हैं, हम अपनी टीम हैं।” उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जनता ने उन्हें सत्ता दी है, इसलिए उन्हें अहंकार से बचना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होने की बात दोहराई और डर की राजनीति का विरोध किया।
इस दौरान ओवैसी ने भाजपा पर भी तंज कसते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को लेकर उन पर आरोप लगाए जाते हैं, लेकिन वह स्वयं इतने ताकतवर नहीं हैं कि किसी पार्टी को इस स्तर तक पहुंचा दें। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अब जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
धार्मिक स्थलों को लेकर पूछे गए सवाल पर ओवैसी ने कहा कि जैसे मंदिर, चर्च और गुरुद्वारे अपने-अपने समुदायों के लिए आस्था के केंद्र हैं, वैसे ही मस्जिदें भी मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद पवित्र हैं। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति सम्मान बनाए रखने की अपील की।
वहीं, हुमायूं कबीर ने इस गठबंधन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह केवल चुनावी समझौता नहीं, बल्कि एक मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारी है। उन्होंने कहा, “यह गठबंधन कभी नहीं टूटेगा। जब तक मैं जिंदा हूं, मेरी पार्टी एआईएमआईएम के साथ खड़ी रहेगी।” उन्होंने ओवैसी को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए उनके नेतृत्व में काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
कबीर ने आगे बताया कि आगामी चुनावों के मद्देनजर 20 संयुक्त जनसभाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें दोनों दलों के नेता एक साथ जनता के बीच जाएंगे। उन्होंने 23 और 29 अप्रैल को प्रस्तावित चुनावों के लिए सभी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया।
इस गठबंधन के जरिए दोनों दल राज्य में एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह साझेदारी पश्चिम बंगाल की राजनीति में कितना प्रभाव डाल पाती है।
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