Bangladesh Islamic Radicalism: बांग्लादेश एक बार फिर इस्लामिक कट्टरपंथ और उग्रवाद की बढ़ती गतिविधियों को लेकर गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। हालिया खुफिया रिपोर्टों और सुरक्षा एजेंसियों को मिले इनपुट्स ने देशभर में चिंता बढ़ा दी है। संभावित आतंकी हमलों की आशंका के बाद प्रशासन ने राष्ट्रीय स्तर पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश पुलिस मुख्यालय ने संसद भवन, सैन्य प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक इलाकों पर संभावित हमलों की चेतावनी जारी की है। यह अलर्ट एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सदस्य की गिरफ्तारी के बाद सामने आया, जिसने पूछताछ के दौरान दो बर्खास्त सैन्य अधिकारियों के संपर्क में होने का दावा किया था। इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों के मुताबिक, 2024 के जुलाई आंदोलन और उसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद देश की कानून-व्यवस्था कमजोर हुई। राजनीतिक अस्थिरता के दौरान हिंसा, लूटपाट और जेलों से कैदियों के फरार होने जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ीं। रिपोर्टों के अनुसार, इसी अवधि में 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदी जेल से भाग निकले, जिनमें कई प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हुए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि जेल से फरार हुए इन चरमपंथी तत्वों ने देश में कट्टरपंथी नेटवर्क को फिर से मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि ये संगठन युवाओं को प्रभावित कर नए मॉड्यूल तैयार कर सकते हैं। यही वजह है कि धार्मिक स्थलों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंतरिम सरकार के दौरान कई विवादित और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े लोगों को जमानत दी गई। इनमें 2013 में ब्लॉगर और शाहबाग आंदोलन के कार्यकर्ता राजीब हैदर की हत्या के आरोपी जशीमुद्दीन रहमानी की रिहाई को सबसे ज्यादा चिंताजनक माना जा रहा है। रहमानी को कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने वाले प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है।
इसके अलावा, प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश की दोबारा सक्रियता ने भी सुरक्षा एजेंसियों की परेशानी बढ़ा दी है। संगठन ने हाल के महीनों में इस्लामिक खिलाफत की मांग को लेकर कई प्रदर्शन किए। कुछ प्रदर्शनों में युवाओं द्वारा आईएसआईएस के झंडे लहराने की घटनाएं भी सामने आईं, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में मौजूदा हालात केवल आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। भारत समेत पड़ोसी देशों की सुरक्षा एजेंसियां भी इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कट्टरपंथी संगठनों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क को भी मजबूती मिल सकती है।
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि उनके शासन में चरमपंथी तत्वों को खुलकर सक्रिय होने का अवसर मिला। हालांकि सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद पर सख्ती बरतने का दावा किया जा रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
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