चेन्नईः तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक अनिश्चितता के बीच एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने पार्टी विधायकों से कहा कि राज्य में अगली सरकार एआईएडीएमके ही बनाएगी। पलानीस्वामी के इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है तथा नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राज्य में इस बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे अभी भी कम से कम 10 विधायकों के समर्थन की जरूरत है। बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं होने के कारण राज्यपाल आर. एन. रवि की जगह हाल ही में पदभार संभालने वाले राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय को सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं दिया है।
इसी बीच एआईएडीएमके ने अपने विधायकों को पड़ोसी केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के एक आलीशान रिसॉर्ट में ठहराया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक गुरुवार देर रात पलानीस्वामी ने रिसॉर्ट में मौजूद विधायकों के साथ बैठक की और राज्य की तेजी से बदल रही राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में विधायकों ने पलानीस्वामी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उन्हें विधायक दल का नेता चुना। बताया जा रहा है कि समर्थन में विधायकों ने हस्ताक्षरित पत्र भी सौंपे।
सूत्रों के अनुसार पलानीस्वामी ने विधायकों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं और सही समय आने पर एआईएडीएमके सरकार बनाने में सफल होगी। उन्होंने विधायकों को एकजुट रहने और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी।
एआईएडीएमके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है और चुनाव में पार्टी ने 47 सीटें जीती हैं। पार्टी के कुल 47 विधायकों में से लगभग 28 विधायक फिलहाल पुडुचेरी के रिसॉर्ट में मौजूद हैं। मन्नारगुडी सीट से जीत हासिल करने वाले एएमएमके विधायक एस. कामराज के भी एआईएडीएमके खेमे के साथ रहने की खबर है। सूत्रों का कहना है कि रिसॉर्ट के कमरे अगले सात दिनों के लिए बुक किए गए हैं और विधायकों को बिना अनुमति बाहर नहीं जाने के निर्देश दिए गए हैं।
तमिलनाडु में राजनीतिक असमंजस उस समय और बढ़ गया जब राज्यपाल ने संकेत दिया कि जो भी दल या गठबंधन आवश्यक संख्या बल साबित करेगा, उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद से डीएमके और एआईएडीएमके के बीच संभावित समझौते की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि अगर दोनों बड़े दल किसी तरह का गठबंधन करते हैं, तो टीवीके के विधायक सामूहिक इस्तीफा दे सकते हैं।
इस बीच विजय की पार्टी टीवीके ने भी सख्त रुख अपनाया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि डीएमके या एआईएडीएमके सरकार बनाने का दावा पेश करती है, तो उसके सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे। टीवीके का आरोप है कि जनता ने सबसे अधिक समर्थन उसे दिया है, इसलिए सरकार बनाने का पहला मौका भी उसी को मिलना चाहिए।
टीवीके का कहना है कि कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन उसे पहले ही मिल चुका है। इसके अलावा पार्टी वाम दलों और कुछ छोटे राजनीतिक दलों से भी संपर्क में है। हालांकि अब भी बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े से पार्टी पीछे है। सूत्रों के मुताबिक विजय की पार्टी कानूनी विकल्पों पर भी विचार कर रही है और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
तमिलनाडु की राजनीति फिलहाल बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है। राज्य में कौन सरकार बनाएगा, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सभी दल अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हैं और आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति की दिशा तय करने में बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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