Prabhat Kumar Tiwari
‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ पर विशेष
तम्बाकू एक धीमा जहर है। तम्बाकू चबाने से मुंह, जीभ, मसूड़े और होठों में कैंसर हो सकता है। तम्बाकू के सेवन से हृदय रोग, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती है। यह हमारी हड्डियों के बीच के घनत्व को कम करता है, जिसकी वजह से उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग अधिक मात्रा में तम्बाकू का सेवन करते हैं, उनकी आंखों की रोशनी कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। इन सब बातों को हर इंसान अच्छी तरह जानता है। जब वो तम्बाकू उत्पाद खरीदता है, तो उस पर भी बड़े अक्षरों में चेतावनी लिखी होती है-‘तम्बाकू एक जहर है इसका सेवन करने से बचें’, ‘तम्बाकू का सेवन करने से कर्क रोग होता है’, ‘तम्बाकू से कैंसर होता है’, इन सबके बावजूद इंसान तम्बाकू का सेवन करता है।
तम्बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति को समाज में हेय दृष्टि से देखा जाता है, लोग ऐसे व्यक्तियों के पास बैठने से बचते हैं। ये लोग जहां कहीं भी जाते हैं, गंदगी फैलाते रहते हैं, जो बीमारियों का कारण बनता है। यह बुरी आदत तम्बाकू का सेवन करने वाले व्यक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के लिए भी खतरनाक साबित होती है। किसी को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो जाए, तो उसका इलाज कराने में ही लाखों का खर्च आता है। परिवार सड़कों पर आ जाता है। इसलिए तम्बाकू के सेवन से होने वाले खतरों के बारे में जानें औऱ सेवन करने से बचें।
भारत तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और उत्पादक है। भारत में तम्बाकू का सेवन करने वालों की कोई निर्धारित उम्र नहीं है। इसके बावजूद 15 वर्ष या उससे अधिक की आयु वर्ग के लोगों का आंकड़ा सरकार के पास मौजूद है, जिसके अनुसार देश में लगभग 26 करोड़ 70 लाख लोग तम्बाकू का सेवन करते हैं, जो देश की कुल वयस्क आबादी का 29 प्रतिशत है। तम्बाकू के सेवन से हर साल लगभग 13 लाख 50 हजार लोगों की मृत्यु हो जाती है, जो कि कुल मौतों का करीब 9.5 प्रतिशत है। तम्बाकू से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है, इसीलिए हर साल 31 मई को ‘विश्व तम्बाकू निषेध’ दिवस मनाया जाता है। सरकार, सरकारी संस्थाएं, एनजीओ और समाज के जागरूक व्यक्ति लोगों को तम्बाकू का सेवन करने से होने वाले नुकसान के बारे में बताते हैं। तम्बाकू का सेवन श्वांस रोग समेत कई पुरानी बीमारियों का कारण बनता है। भारत में धूम्रपान और धूम्रपान रहित तम्बाकू दोनों तरह के उत्पादों का उपयोग किया जाता है। ये दोनों ही मौतों का कारण बनते हैं। तम्बाकू के सेवन से कैंसर, हृदय रोग, फेफड़े की बीमारी, सीओपीडी और स्ट्रोक जैसी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। तम्बाकू का सेवन भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। धूम्रपान करने वाले पुरुषों में ब्रोंकाइटिस और एंफिसेमा से मरने का जोखिम 17 गुना तक बढ़ जाता है। इसके साथ ही श्वासनली, फेफड़े और ब्रोन्कस के कैंसर से मरने का जोखिम 23 गुना से भी अधिक बढ़ जाता है।
हमारे देश में धूम्रपान से मध्यम आयु वर्ग के पुरुषों में कोरोनरी हृदय रोग से मरने का जोखिम लगभग चार गुना बढ़ गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कैंसर रोगों में होंठ, गले, मुंह, ग्रास नली, पेट, अग्न्याशय, स्वरयंत्र, गुर्दे, मूत्राशय, यकृत, बड़ी आंत, गर्भाशय और मलाशय का कैंसर शामिल है। इसके अलावा तम्बाकू का सेवन फेफड़ों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। यह फेफड़ों के कैंसर का एक प्रमुख कारण माना जाता है। तम्बाकू का सेवन करने से मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन सही से नहीं पहुंच पाती है, जो हमारे तंत्रिका तंत्र को बुरी तरह प्रभावित करता है। तम्बाकू के सेवन से त्वचा पर झुर्रियां आने लगती हैं। त्वचा के रंग में भी बदलाव आने लगता है। यदि कोई महिला तम्बाकू का सेवन अधिक मात्रा में करती है, तो उसे गर्भधारण में समस्या हो सकती है। यही नहीं, गर्भवती स्त्री में गर्भपात का खतरा भी बढ़ जाता है। तम्बाकू का सेवन करने वाली महिला के बच्चे में जन्मजात दोष और विकास संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। विश्व भर में तेजी से बढ़ रही गंभीर बीमारियों और मृत्यु का सबसे व्यापक कारण तम्बाकू है।
हर साल 31 मई को ‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ मनाया जाता है। ‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ की घोषणा विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने अपने सदस्य राष्ट्रों के साथ मिलकर वर्ष 1987 में तम्बाकू से होने वाली मौतों तथा बीमारियों पर पूरी दुनिया का ध्यान खींचने के लिए की थी। इसका उद्देश्य उन लोगों को सुविधा, संसाधन और सहायता प्रदान करना है, जो तम्बाकू छोड़ना चाहते हैं। इस दिन जनता को तम्बाकू का सेवन करने से होने वाले खतरों के बारे में जानकारी दी जाती है। भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत सभी सरकारी अस्पतालों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
देश के सभी राज्यों और जिलों में तम्बाकू व नशा विरोधी गतिविधियां संचालित की जाती है, इसके लिए गोष्ठियां होती है, रैली निकाली जाती है, पेंटिंग व अन्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन अभियानों में छात्रों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी रहती हैं, लेकिन ये सभी प्रयास वहां दम तोड़ देते हैं, जहां हम तम्बाकू के खतरों को जानते हुए भी उनका सेवन करने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। जब तक तम्बाकू की बुरी लत को छोड़ने के लिए हमारे अंदर से आवाज नहीं उठेगी और हम स्वयं प्रयास नहीं करेंगे, कोई भी अभियान और जागरूकता कार्यक्रम तम्बाकू की वजह से होने वाली गंभीर बीमारियों और मौतों के खतरे को कम नहीं कर सकता है। इसलिए हमें खुद ही तम्बाकू को ‘ना’ और जीवन को ‘हां’ कहने का दृढ़ संकल्प लेना होगा। अपने संकल्प को पूरा करने में शत-प्रतिशत योगदान भी देना होगा।
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