भारत सरकार द्वारा दिए गए सफलतम मंत्र ' सबका साथ- सबका विकास' लोकतांत्रिक मूल्यों का सार अंश है। इस लोकतांत्रिक मंत्र में लोकतांत्रिक एवं लोक विश्वास रूपी अमृत मंत्र ' सबका विश्वास' योजित हुआ है। लोकतांत्रिक संस्कृति की सफलता एवं अनुनाद' सबका साथ ,सबका विकास एवं सबका विश्वास' रूपी तत्व विलयित होकर शासकीय संरचना को उत्तरदाई एवं जवाबदेह बना रहे हैं। सामयिक लोकतांत्रिक परिवेश में इस लोकतांत्रिक मंत्र की प्रासंगिकता सामाजिक क्षेत्र, आर्थिक क्षेत्र ,राजनीतिक क्षेत्र, सांस्कृतिक आयामों एवं वैदिक क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। इस मंत्र की उपादेयता से भारत अपने भू- भाग को सुरक्षित एवं हितों का उन्नयन कर रहा है। सरकार ने अपने अनेक नीतिगत निर्णयों एवं शासकीय नीतियों में "भारत प्रथम" के मंत्र पर निरंतर वैद्यता प्रदान किया है। आतंकवाद के प्रति ' शून्य सहिष्णुता' (जीरो टॉलरेंस) पर दूरगामी, दूरदर्शी एवं गुणात्मक परिवर्तन आ रहे हैं। नक्सलवाद जैसे संक्रमित बीमारी को मजबूत राजनीतिक शक्ति से समाप्ति की ओर अग्रसर है। सीमापार आतंकवाद एवं दहशतगर्दी में मात्रात्मक गिरावट हो रही है।
वैश्विक आतंकवाद सूचकांक प्रतिवेदन के अनुसार, वर्ष 2014 से वर्ष 2025 के बीच देश में आतंकवादी गतिविधियों में 90% की कमी आई हैं।आंकड़ों के अनुसार, उग्रवादी एवं दहशतगर्दी की घटनाओं में लगभग 75% की कमी आई है, वहीं वर्ष 2010 की तुलना में वर्ष 2025 में इस प्रकार की घटनाओं में हताहत हुए लोगों की संख्या में 92% की कमी आई हैं ।विगत 11 वर्षों में भारत में अंतरराष्ट्रीय वैश्विक मंचों एवं वैश्विक स्तर के देशों में ' कूटनीति' और राजनीति से आतंकवाद को ज्वलंत एवं खतरनाक ' मानवीय त्रासदी' का मुद्दा घोषित किया है। भारत कूटनीतिक वार्ता से वैश्विक स्तर पर आतंकवादी देशों एवं संगठनों को अलग-थलग करने में बड़ी मात्रा में सफलता प्राप्त किया है। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) जो आतंकवादी घटनाओं एवं कृत्यों से संबंधित मामलों का अन्वेषण करती है, जिसने आतंकवाद के वित्तपोषण मामलों में अपराध प्रमाणित होने की दर 94% बता रहा है।
वर्ष 2014 के पश्चात से गैर- प्रणव क्षेत्रों एवं गैर- संघर्ष क्षेत्रों वाले शहरों में कोई" दुर्दांत आतंकी हमला" नहीं हुए है। भारत ने गैर- कानूनी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम को संशोधित करके इसके' विधिक ढांचे' को अत्यधिक मजबूत किया है, जिससे आतंकवाद के प्रत्येक रूप पर कठोर प्रहार किया जा सकें। आतंकवादी आतंकी कृत्य को संपादित करने के लिए आतंक रूपी चेहरे को रूपांतरित करते रहते हैं।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में वही देश एवं राष्ट्रों का संगठन वाह्य हमलों एवं रक्षा चुनौतियों से' कारगर तरीके' से निपट सकते हैं जो हथियारों एवं रक्षा साजो- समान के मामले में ' आत्मनिर्भर' हैं। रक्षा स्वदेशीकरण सूची में 300 से अधिक वस्तुएं जोड़ी गई हैं। पिछले एक दशक में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति देश की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक बदलाव में से एक है। भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ के स्तर को पार कर चुका है, जिसमें निजी क्षेत्र के हिस्सेदारी 25% तक पहुंच चुकी है। भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2024 - 25 में 23622 करोड़ पहुंच चुका हैं ,जो एक दशक पहले की तुलना में 30 गुना ज्यादें हैं। भारतीय थल सेना की लगभग 90% गोला - बारूद आवश्यकता देश के भीतर ही पूरी हो रहे हैं। यह तथ्य युद्धकालीन तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिक निर्यात का मतलब है कि ' अधिक रोजगार ' का सृजन होना है, इससे भारत के युवाओं को अधिकाधिक रोजगार के शुभ अवसर प्राप्त होंगे, जिससे गरीबी और बेरोजगारी का पर नियंत्रण किया जा सकता है।
भारत वैश्विक मंचों पर' विकासशील एवं अल्प- विकसित' देशों के मुद्दों को मजबूती से उठाता रहा है। भारत सभी लोकतांत्रिक देशों के विकास में निरंतर सहयोग कर रहा है। लोकतांत्रिक संस्थाएं एवं प्रक्रियाएं वर्तमान में लोकतंत्र को स्थिरता, गति एवं व्यापकता प्रदान कर रहे हैं। भारत वैश्विक स्तर का तेजी से उभरता प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसकी अमेरिकी आयात पर कटौती शुल्क के बावजूद विकास दर 7% की रफ्तार से उदीयमान अर्थव्यवस्था बना हुआ है। भारत में जन- केंद्रित नीतियों एवं कल्याणकारी योजनाओं एवं विधियों से लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक संस्कृति में उन्नयन कर रहा है। इन पहलुओं से भारत को उदीयमान ज्वलंत मुद्दों पर ' ग्लोबल साउथ' के देशों का प्रबल समर्थन प्राप्त हो रहा है।
भारत ने स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से ही ' वैश्विक दक्षिण' की एकता के लिए काम किया हैं ,ताकि वह अपने नजरिए को सामने रखते हुए एकजुट तरीके से अपने हितों की सुरक्षा कर सके। वैश्विक स्तर पर हितों की सुरक्षा एवं संरक्षा " संगठित एकजुट एवं मंच" से ही हो सकती है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ( वैश्विक व्यवस्था की कार्यकारिणी, विकसित पांच का सदन, निषेधाधिकार का सदन एवं हितों के लिए असहमति का केंद्र) जिसमें भारत संरचनात्मक सुधार का प्रबल समर्थन करता है एवं सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए अपना प्रबल दावा प्रस्तुत कर रहा है। भारत वैश्विक स्तर पर शांति, सुरक्षा एवं स्थायित्व बनाए रखने में महत्ती भूमिका निभा रहा है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में लोगों की प्रति व्यक्ति आय ( पीसीआई) 13796 रुपए थीं,इसके पश्चात देश ने ' भूमि सुधार' को क्रियान्वित किया,' हरित क्रांति' से खाद्यान्न उत्पादन में गुणात्मक एवं मात्रात्मक उन्नयन हुए। 1990 में उदारीकरण, निजीकरण एवं भूमंडलीकरण (LPG को शासकीय नीतियों में क्रियान्वयन से ' निजी क्षेत्र' का त्रिव विस्तार हुआ एवं भारतीय लोगों के प्रति व्यक्ति आय तेजी से बढ़े।इस प्रयोजन के लिए भारत सरकार ने ' आर्थिक सुधारो' को लागू कर रही हैं,जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दिया जा रहा है।
वर्ष 1950 में भारत की जीडीपी का आकार 5 लाख करोड़ रुपए थे। तत्कालीन में भारत नवोदित स्वतंत्र देश था, जो विकासात्मक लक्ष्यों के लिए वैश्विक संस्थाओं और पहले दुनिया के राष्ट्रों( संयुक्त राज्य अमेरिका के गूट में) एवं दूसरी दुनिया के राष्ट्रों (संयुक्त सोवियत संघ गणतंत्र) पर "निर्भर" था। वर्तमान में एकीकृत कर संरचना, शासकीय नीतियों में पारदर्शिता, जवाबदेही व उत्तरदाई नौकरशाही,रिसाव विहीन योजनाएं एवं प्रत्यक्ष नगद हस्तांतरण योजना( डीबीटी) ने भारत को ' चौथी अर्थव्यवस्था' बनने में सहयोग किया है।
वैश्विक स्तर पर' प्रवासी भारतीयों' को पूर्ण विश्वास है कि उनकी भौतिक सुरक्षा, संरक्षा एवं हितों के प्रोत्साहन के लिए भारत सरकार सदैव उनके साथ हैं। प्रवासियों को यह प्रबल विश्वास है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भारत सरकार उनकी सुरक्षा एवं संरक्षा के लिए कोई कोर- कसर नहीं छोड़ेगी। भारत सरकार ने कई अवसरों पर प्रमाणित भी किया है। अनेक घटनाक्रम घटित हुए हैं, जिनमें भारत सरकार ने सहयोग एवं त्वरित कार्यवाही किया है।
सामयिक परिस्थितियों में भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए राजनीतिक, रणनीतिक, कूटनीतिक एवं राजनय से राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ानी चाहिए। वैश्विक स्तर पर ' भारत उभरता हुआ देश' एवं ' तीसरी अर्थव्यवस्था' की ओर अग्रसर है। ऐसी परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा के आयामों पर भारत को ' गंभीर चिंता' करनी चाहिए।
डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय
राष्ट्रीय संगठन सचिव,
अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना केशवकुंज झंडेवालान, नई दिल्ली ।
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