नई दिल्ली। क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि वही टीम चैंपियन बनती है जो अपनी प्लानिंग को मैदान पर पूरी तरह लागू करे। लेकिन इस टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की कहानी थोड़ी अलग और फिल्मी लग रही है। इस फिल्म में उतार-चढ़ाव हैं, गलतियाँ भी हो रही हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि अंत हमेशा सुखद (हैप्पी एंडिंग) हो रहा है। भारतीय टीम फिलहाल उस दौर में है जहाँ वह अपना सौ फीसदी दिए बिना भी विरोधियों को आसानी से हरा रही है।

ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच में जब नीदरलैंड्स को जीत के लिए आखिरी 5 गेंदों में 26 रन चाहिए थे, तब मैदान पर एक ऐसी बात हुई जिसने टीम के नए मिजाज को दिखाया। शिवम दुबे (Shivam Dubey) की गेंद पर बल्लेबाज ने हवा में शॉट खेला। गेंद लपकने के लिए रिंकू सिंह (Rinku Singh) और सूर्यकुमार यादव (Surya Kumar Yadav) दोनों दौड़े, तालमेल बिगड़ा और दोनों आपस में टकरा गए, जिससे एक आसान सा कैच छूट गया। आमतौर पर ऐसे समय में मैदान पर गुस्सा या तनाव दिखता है, गेंदबाज परेशान हो जाता है। लेकिन यहाँ नजारा अलग था। रिंकू और सूर्या एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराए, 'हाई-फाइव' किया और चुपचाप अपनी जगह पर लौट गए। यह छोटी सी बात दिखाती है कि टीम का माहौल कितना शांत है। खिलाड़ी जानते हैं कि गलतियाँ होंगी, लेकिन उन पर दुखी होने के बजाय आगे बढ़ना ही असली जीत है।

India T20 World Cup Analysis : जब फेल हुआ पुराना अंदाज
भारत पिछले एक साल से बेखौफ होकर पहली गेंद से ही हमला करने की रणनीति पर चल रहा है। लेकिन इस वर्ल्ड कप की पिचों ने टीम को अपनी चाल बदलने पर मजबूर कर दिया है।

भारतीय बल्लेबाजी में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) को लेकर है। अपनी आक्रामक बैटिंग के लिए मशहूर अभिषेक पिछली 8 पारियों में 5 बार शून्य पर आउट हुए हैं। उनके रन न बनाने से टीम के मिडिल ऑर्डर पर दबाव बढ़ रहा है। उनके जल्दी आउट होने की वजह से तिलक वर्मा को पावरप्ले में ही बल्लेबाजी के लिए आना पड़ रहा है। आंकड़ों में देखें तो बीच के ओवरों (7 से 10) में भारत की रन बनाने की रफ्तार दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों से काफी पीछे है। हालांकि, टीम मैनेजमेंट को उन पर पूरा भरोसा है। प्रैक्टिस में वे गेंद को अच्छे से हिट कर रहे हैं और टीम को लगता है कि ईशान किशन की अच्छी फॉर्म अभिषेक के इस खराब दौर को संभाल लेगी।

अगर भारत की बल्लेबाजी थोड़ी कमजोर दिख रही है, तो उसकी भरपाई गेंदबाज बखूबी कर रहे हैं। वर्तमान में जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती विरोधी कप्तानों के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं हैं। एक तरफ जहाँ बुमराह इतनी सटीक गेंदबाजी कर रहे हैं कि बल्लेबाज उनके खिलाफ रन बनाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे, वहीं दूसरी तरफ वरुण चक्रवर्ती अपनी 'मिस्ट्री' स्पिन से बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि भारत ने अब तक इन दोनों का पूरा कोटा इस्तेमाल किए बिना ही मैच जीत लिए हैं। कप्तान ने रिंकू सिंह, तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा से भी कुछ ओवर डलवाकर यह पक्का किया है कि टीम के पास गेंदबाजी में हमेशा बेहतरीन विकल्प मौजूद रहें।
ग्रुप स्टेज की जीत अच्छी है, लेकिन असली टक्कर अब शुरू होगी। भारत का सामना अब उन टीमों से होगा जो छोटी सी गलती का भी फायदा उठाना जानती हैं। वरुण चक्रवर्ती का भी मानना है कि "असली टूर्नामेंट अब अगले मैच से शुरू हो रहा है।" रविवार को भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा। पुराने रिकॉर्ड देखें तो अर्शदीप सिंह (23 विकेट) और वरुण चक्रवर्ती (22 विकेट) का पलड़ा इस टीम के खिलाफ भारी रहा है, जो भारत को मनोवैज्ञानिक बढ़त देगा। अक्सर देखा गया है कि जो टीमें शुरुआत में बहुत परफेक्ट खेलती हैं, वे बड़े मैचों के दबाव में टूट जाती हैं। टीम इंडिया फिलहाल ठोकरें खा रही है, गिर रही है, लेकिन फिर संभलकर जीत रही है। यह लचीलापन टीम को मजबूत बना रहा है। प्रशंसकों के लिए सुकून की बात यह है कि टीम ने अभी तक अपना सबसे बेहतरीन खेल नहीं दिखाया है, फिर भी वह हारी नहीं है। सोचिए, जब यह टीम पूरी लय में होगी, तब नजारा क्या होगा!