नई दिल्ली : क्रिकेट के मैदान पर जिसे दुनिया 'किंग' मानती थी, आज उसी बाबर आजम के वजूद पर बन आई है। हालात ऐसे बदल गए हैं कि पाक टीम में उनकी जगह को लेकर ही अब सरेआम चर्चा होने लगी है। ये सुगबुगाहट अब केवल क्रिकेट फैंस के बीच नहीं, बल्कि टीम के भीतर से भी बाहर आने लगी है। टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 में न्यूजीलैंड से भिड़ने से पहले पाक कोच माइक हेसन ने बाबर को लेकर जो कुछ कहा, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है।
सीधी बात ये है कि बाबर अब पाकिस्तानी बैटिंग की जान नहीं, बल्कि एक 'मजबूरी' के तौर पर देखे जा रहे हैं। कोच के शब्दों से साफ है कि टीम को उनकी जरूरत अब तभी पड़ती है जब बाकी सब फेल हो जाएं, वरना वे प्लेइंग इलेवन में एक्स्ट्रा नजर आने लगे हैं।

माइक हेसन का बयान कोई साधारण बात नहीं है, बल्कि ये बाबर के टी20 करियर की वो सच्चाई है जिसे अब तक छिपाया जा रहा था। हेसन ने पहली बार खुलकर माना कि पावरप्ले के शुरुआती 6 ओवरों में बाबर की बल्लेबाजी आज के दौर की क्रिकेट के हिसाब से बिल्कुल फिट नहीं बैठती।
कोच ने दो टूक कह दिया, "बाबर खुद जानते हैं कि वर्ल्ड कप के पावरप्ले में उनका स्ट्राइक रेट 100 से भी नीचे है। हमें इस रोल के लिए उनकी जरूरत नहीं है।" अगर हम रिकॉर्ड्स को खंगालें, तो बात और भी साफ हो जाती है। बाबर ने पिछले पांच टी20 वर्ल्ड कप में पावरप्ले के दौरान 217 गेंदें खेली हैं, लेकिन रन सिर्फ 187 ही बनाए हैं। उनका 86.17 का स्ट्राइक रेट क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा बदनुमा दाग है, जो किसी और बड़े बल्लेबाज के नाम नहीं है। वे दुनिया के इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने पावरप्ले में 200 से ज्यादा गेंदें खेलीं और फिर भी उनकी रफ्तार 90 तक नहीं पहुंच पाई। आज के दौर में जहां टीमें शुरुआती 6 ओवरों में धुआंधार रन कूटती हैं, वहां बाबर की ये 'कछुआ चाल' पाक की हार की सबसे बड़ी वजह बन जाती है।

एशिया कप के बाद जब बाबर वापस आए, तो उनसे ओपनिंग की जिम्मेदारी छीन ली गई। जो बल्लेबाज कभी पारी की शुरुआत करता था, उसे अब नंबर 4 पर धकेल दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज हो या इस वर्ल्ड कप के शुरुआती मैच, बाबर नंबर 4 पर सिर्फ 'कामचलाऊ' साबित हुए हैं। यहाँ भी उनकी बल्लेबाजी में वो पुरानी धार नहीं दिखी। स्ट्राइक रेट 120 के आसपास ही अटका हुआ है। कोच हेसन का कहना है कि उन्हें मिडिल ऑर्डर में सिर्फ इसलिए रखा गया है ताकि अगर जल्दी विकेट गिरें, तो वे एक 'दीवार' बन सकें। लेकिन सवाल वही है, क्या पाकिस्तान को एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत है जो सिर्फ हार का अंतर कम करे, या ऐसे खिलाड़ी की जो जीत दिला सके?

बाबर आजम के गिरते ग्राफ का सबसे बड़ा सबूत नामीबिया के खिलाफ मैच में मिला। पाकिस्तान का दूसरा विकेट 13वें ओवर में गिरा, ये वो वक्त था जब बाबर को मैदान पर आना चाहिए था। लेकिन मैनेजमेंट ने उन्हें रोक दिया और उनकी जगह ख्वाजा नफे और शादाब खान को बल्लेबाजी के लिए भेज दिया। यह बाबर के करियर में पहली बार हुआ जब वे पूरी पारी के दौरान बैटिंग के लिए ही नहीं आए। हेसन ने सफाई दी कि उस वक्त टीम को तेजी से रन बनाने वाले 'फिनिशर्स' चाहिए थे, और टीम में ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो बाबर से बेहतर ये काम कर सकते हैं। यह बात बाबर के चाहने वालों के लिए किसी कड़वे घूंट जैसी है, क्योंकि कोच ने सीधे तौर पर कह दिया कि बड़े शॉट खेलने के मामले में बाबर अब भरोसेमंद नहीं रहे।

अब सामने न्यूजीलैंड की चुनौती है। मिचेल सेंटनर और रचिन रवींद्र जैसे स्पिनर बाबर के लिए बड़ी सिरदर्द साबित हो सकते हैं। रिकॉर्ड कहते हैं कि इन दोनों ने भले ही बाबर को आउट न किया हो, लेकिन उन्हें रन बनाने के लिए तरसा जरूर दिया है।
मिचेल सेंटनर: बाबर ने इनकी 56 गेंदों पर सिर्फ 61 रन बनाए हैं। यानी स्ट्राइक रेट 109 के करीब।
रचिन रवींद्र: इनके खिलाफ तो बाबर गेंद और रन के बराबर (12 गेंद, 11 रन) ही चल पाए हैं।
हेसन को डर है कि अगर पिच थोड़ी भी धीमी हुई, तो बाबर की रन न बना पाने की छटपटाहट पूरी टीम पर दबाव डाल देगी।

बाबर आजम की कहानी अब एक अजीब मोड़ पर है। आम तौर पर टीमें पहले जरूरत तय करती हैं और फिर खिलाड़ी चुनती हैं। लेकिन बाबर के साथ उल्टा हो रहा है। बाबर टीम में हैं, इसलिए अब उनके लिए कोई न कोई जगह ढूंढी जा रही है। वे पाकिस्तान क्रिकेट का सबसे बड़ा चेहरा हैं, लोगों के चहेते हैं, इसलिए उन्हें टीम से बाहर करना फिलहाल किसी के बस की बात नहीं है। यही वजह है कि उन्हें जबरदस्ती एक 'एंकर' (पारी संभालने वाला) बनाया जा रहा है। कोच ने भी साफ कह दिया कि वे केवल 'मुसीबत के वक्त' के साथी हैं। लेकिन क्या कोई टीम हमेशा मुसीबत में रहने के लिए ही मैदान पर उतरती है?

बाबर आजम आज उस दोराहे पर खड़े हैं जहां से पीछे मुड़ने का रास्ता नहीं है। या तो वे अपनी बल्लेबाजी का तरीका पूरी तरह बदलें और आज के जमाने के हिसाब से तेज खेलें, या फिर एक 'बैकअप प्लेयर' बनकर गुमनामी की ओर बढ़ जाएं। हेसन की बातों ने पाकिस्तान क्रिकेट की नई नीति साफ कर दी है। अब सिर्फ 'नाम' से काम नहीं चलेगा, 'काम' करके दिखाना होगा। आने वाले मैच तय करेंगे कि बाबर अपनी खोई हुई साख वापस पाते हैं या वे सिर्फ एक ऐसे खिलाड़ी बनकर रह जाएंगे जिसे पाकिस्तान केवल डर के साये में याद करता है।
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