Abhishek Sharma 3 Consecutive Ducks : क्रिकेट में जब कोई बल्लेबाज फॉर्म में होता है, तो वह 'मिडास' की तरह जिस गेंद को छूता है, वह बाउंड्री के पार जाती है। लेकिन जब किस्मत और तकनीक साथ छोड़ दें, तो विश्व का नंबर-1 टी20 बल्लेबाज भी एक-एक रन के लिए मोहताज हो जाता है। टी20 विश्व कप 2026 में अभिषेक शर्मा की कहानी कुछ ऐसी ही है। दो देश, तीन ऐतिहासिक मैदान, लेकिन नतीजा वही- 'शून्य'।
अभिषेक ने इस टूर्नामेंट में लगातार तीन डक (शून्य) दर्ज कर एक ऐसा शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज के लिए एक डरावना सपना हो सकता है।
अभिषेक की इस 'डक हैट्रिक' ने यह साबित कर दिया है कि उनकी समस्या किसी विशेष पिच से नहीं, बल्कि उनके शॉट सिलेक्शन और मानसिक दबाव से जुड़ी है:
वानखेड़े (मुंबई): अमेरिका के खिलाफ घर में टूर्नामेंट की शुरुआत। उम्मीदें आसमान पर थीं, लेकिन अली खान की गेंद पर 'गोल्डन डक' ने वानखेड़े के सन्नाटे को और गहरा कर दिया।
आर. प्रेमदासा (कोलंबो): चिर-प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ महा-मुकाबला। यहाँ पिच पर ग्रिप थी, लेकिन अभिषेक ने सलमान अली आगा की गेंद पर गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेला और 4 गेंदों में फिर 'जीरो' पर चलते बने।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम (अहमदाबाद): नीदरलैंड के खिलाफ वापसी का मौका। यहाँ तक कि वह मोहम्मद सिराज की जर्सी पहनकर 'किस्मत' बदलने की कोशिश में उतरे, लेकिन आर्यन दत्त की फिरकी ने उनकी गिल्लियां बिखेर दीं। 3 गेंदें, 0 रन।
टूर्नामेंट शुरू होने से पहले अभिषेक शर्मा आईसीसी रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 टी20 बल्लेबाज थे। लेकिन सांख्यिकी का यह गौरव अब उनके गले की फांस बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल के बीच के फासले को अभिषेक अब तक समझ नहीं पाए हैं। आईपीएल की सपाट पिचों पर 'आँखें बंद और बल्ला चालू' वाली रणनीति विश्व कप के तनावपूर्ण माहौल में पूरी तरह बेअसर रही है।
एक वरिष्ठ खेल समीक्षक के तौर पर देखें, तो अभिषेक की बल्लेबाजी में 'ईगो' (अहंकार) साफ झलकता है। वह हर गेंद पर अपना प्रभुत्व जमाना चाहते हैं।
"अहमदाबाद में आर्यन दत्त के खिलाफ जब पहली दो गेंदें मिस हुईं, तो एक समझदार बल्लेबाज सिंगल लेकर छोर बदलता। लेकिन अभिषेक ने अगली ही गेंद पर 'वाइल्ड स्वाइप' किया। यह साहस नहीं, बल्कि तकनीक और मैच की समझ का दिवालियापन है।"

लगातार तीन विफलताएं यह सवाल उठाती हैं कि क्या टीम इंडिया यशस्वी जायसवाल जैसे स्थापित और परिपक्व ओपनर को बेंच पर बैठाकर खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार रही है? सुपर-8 के मुकाबले अब सिर पर हैं और वहां एक भी 'डक' पूरी टीम के मनोबल को ध्वस्त कर सकती है।