Australia T20 World Cup equation : कभी क्रिकेट की दुनिया में अपनी मर्जी चलाने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम आज टी20 विश्व कप के मैदानों पर अपनी साख बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। पल्लेकेले के मैदान पर श्रीलंका ने जिस तरह उन्हें 8 विकेट से धूल चटाई, उसने न केवल टीम के मनोबल को चोट पहुंचाई है, बल्कि पूर्व चैंपियन को टूर्नामेंट से बाहर होने के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। तीन मैचों में से दो गंवाने के बाद, मिचेल मार्श की कप्तानी वाली इस टीम का दबदबा अब बीती बात लग रहा है। कल तक जो टीम अपने दम पर मैच का फैसला करती थी, आज उसकी किस्मत का ताला दूसरी टीमों की हार-जीत और 'कुदरत के करिश्मे' से ही खुल सकता है। यह देखना वाकई दर्दनाक है कि पांच बार की विश्व विजेता टीम आज खुद को बचाने के लिए दूसरों के नतीजों पर टिकी है।
श्रीलंका के खिलाफ आगाज देखकर किसी ने कल्पना नहीं की थी कि ऑस्ट्रेलिया की हालत इतनी पतली हो जाएगी। पहले 8 ओवरों में बिना किसी नुकसान के 97 रन बनाकर ऑस्ट्रेलिया 220 के स्कोर की ओर मजबूती से बढ़ रहा था। रन गति 12 प्रति ओवर से ऊपर थी और श्रीलंकाई गेंदबाज असहाय नजर आ रहे थे। लेकिन जैसे ही सलामी जोड़ी टूटी, ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी किसी ढलान पर लुढ़कती गाड़ी की तरह नजर आई। अगले 12 ओवरों में ऑस्ट्रेलिया ने मात्र 7 की औसत से रन बनाए और अपने सभी 10 विकेट गंवा दिए। जिस टीम के पास स्पिन को खेलने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी होने का दावा था, वह श्रीलंकाई फिरकी के सामने बेबस दिखी। 182 रनों का लक्ष्य टी20 में कभी भी सुरक्षित नहीं था, और श्रीलंका ने इसे महज 18 ओवरों में हासिल कर ऑस्ट्रेलिया के नेट रन रेट (NRR) को आईसीयू में पहुंचा दिया।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान मिचेल मार्श के चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी। उन्होंने बेहद भारी मन से कहा, "ड्रेसिंग रूम का माहौल पूरी तरह से टूट चुका है। खिलाड़ी हताश हैं। सच कहूं तो अब हम 'Lap of the gods' (भगवान की गोद) में हैं। सब कुछ हमारे हाथ से निकल चुका है।" मार्श ने मध्यक्रम की विफलता को हार का मुख्य कारण माना। उन्होंने स्वीकार किया कि 220 रन का स्कोर बनाया जा सकता था, लेकिन टीम की 'एक्जीक्यूशन' (रणनीति का क्रियान्वयन) बेहद खराब रही। उन्होंने कहा, "साझेदारियां खेल का आधार होती हैं, और सलामी जोड़ी के बाद हम एक भी टिकने वाली साझेदारी नहीं कर पाए। श्रीलंका ने शानदार वापसी की और हम पीछे रह गए।"
क्रिकेट की दुनिया में एक कहावत मशहूर है- "ऑस्ट्रेलिया को कभी मरा हुआ मत समझो।" लेकिन इस बार टी20 विश्व कप के मैदानों से जो खबरें आ रही हैं, वे ऑस्ट्रेलिया के कट्टर समर्थकों को भी डरा रही हैं। जिम्बाब्वे से हारने के बाद लगा था कि यह सिर्फ एक बुरा सपना है, लेकिन श्रीलंका के हाथों मिली करारी शिकस्त ने ऑस्ट्रेलियाई खेमे में खलबली मचा दी है। स्थिति अब ऐसी है कि दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली टीम अब खुद के भरोसे नहीं, बल्कि दूसरी टीमों की हार-जीत और 'किस्मत के खेल' पर टिकी है।
अब सवाल यह है कि क्या ऑस्ट्रेलिया अभी भी सुपर-8 में जा सकता है? जवाब है 'हाँ', लेकिन यह 'हाँ' बहुत सारे 'अगर-मगर' से घिरा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया का अगला और आखिरी मुकाबला ओमान से है। यहाँ केवल जीत से काम नहीं चलेगा। ऑस्ट्रेलिया को ओमान को इस कदर रौंदना होगा कि उनका नेट रन रेट (NRR), जो अभी पाताल (-0.420) में है, वह आसमान (+1.000 के पार) छूने लगे।
अगर ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाजी करता है: उसे कम से कम 200 रनों का पहाड़ खड़ा करना होगा। इसके बाद ओमान को 70 से 80 रनों के भीतर समेटना होगा। लगभग 120-130 रनों की जीत ऑस्ट्रेलिया के NRR को सीधे +1.200 के पार ले जा सकती है।
अगर ऑस्ट्रेलिया लक्ष्य का पीछा करता है: मान लीजिए ओमान ने 120 रन बनाए, तो ऑस्ट्रेलिया को यह लक्ष्य महज 8 से 9 ओवरों में हासिल करना होगा। अगर वे 15-16 ओवर तक मैच ले जाते हैं, तो रन रेट में वह उछाल नहीं आएगा जिसकी उन्हें जरूरत है। यह सुनने में आसान लगता है, लेकिन जिस मानसिक दबाव में टीम अभी है, वहां छोटी टीमें भी उलटफेर कर देती हैं।
ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी बाधा जिम्बाब्वे है। जिम्बाब्वे के पास अभी 4 अंक हैं और उनके दो मैच बचे हैं (आयरलैंड और श्रीलंका के खिलाफ)। ऑस्ट्रेलिया को दुआ करनी होगी कि जिम्बाब्वे अपने दोनों मैच हार जाए। अगर जिम्बाब्वे एक भी मैच जीत जाता है, तो वह 6 अंकों के साथ आगे निकल जाएगा और ऑस्ट्रेलिया का टिकट कट जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया की नजरें अब आज होने वाले आयरलैंड बनाम जिम्बाब्वे मैच पर हैं। मिचेल मार्श ने खुद स्वीकार किया कि वे अब 'भगवान के भरोसे' हैं। उन्हें उम्मीद है कि आयरलैंड की टीम जिम्बाब्वे को हरा दे। इसके बाद आखिरी मैच में श्रीलंका भी जिम्बाब्वे को मात दे दे। तभी अंक तालिका में ऑस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे दोनों 4-4 अंकों पर बराबर होंगे और फैसला नेट रन रेट से होगा। स्पिन के खिलाफ उनकी कमजोरी उजागर हो चुकी है, और ओमान जैसी टीमें भी अब इसी रणनीति पर काम करेंगी। क्रिकेट प्रेमियों के लिए आने वाले तीन दिन सांसें रोक देने वाले होंगे। क्या विश्व चैंपियन टीम इस अपमानजनक विदाई से बच पाएगी या फिर पल्लेकेले की पिच पर एक बड़े युग का अंत होगा? फिलहाल तो गेंद कुदरत के पाले में है।
वर्तमान स्थिति यह है कि ऑस्ट्रेलिया 3 मैचों में 2 अंक और -0.420 के नेट रन रेट (NRR) पर है। वहीं जिम्बाब्वे 2 मैचों में 4 अंक और +0.850 के NRR के साथ बहुत मजबूत है।
ऑस्ट्रेलिया बनाम ओमान (अनिवार्य विशाल जीत)
ऑस्ट्रेलिया को अपने आखिरी मैच में ओमान को केवल हराना नहीं है, बल्कि 'ध्वस्त' करना है।
कैलकुलेशन: यदि ऑस्ट्रेलिया पहले बल्लेबाजी कर 200 रन बनाता है, तो उसे ओमान को 80 रन या उससे कम पर रोकना होगा। इससे उनका NRR लगभग +1.100 के पार पहुँच जाएगा।
नतीजा: यदि वे करीबी अंतर से जीतते हैं, तो वे कभी जिम्बाब्वे को NRR में पीछे नहीं छोड़ पाएंगे।
जिम्बाब्वे का 'पतन' (दो मैचों में हार)
ऑस्ट्रेलिया की किस्मत पूरी तरह जिम्बाब्वे की हार पर टिकी है।
मैच 1 (जिम्बाब्वे बनाम आयरलैंड): आयरलैंड को जिम्बाब्वे को हराना ही होगा। यदि जिम्बाब्वे यह मैच जीत गया, तो वह 6 अंकों के साथ सीधे क्वालीफाई कर जाएगा और ऑस्ट्रेलिया टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा।
मैच 2 (जिम्बाब्वे बनाम श्रीलंका): यहाँ श्रीलंका को जिम्बाब्वे को बड़े अंतर से हराना होगा।
ऑस्ट्रेलिया के लिए गणितीय संभावना तभी जीवित है यदि:
जिम्बाब्वे अपने दोनों बचे मैच हार जाए (ताकि वह 4 अंक पर अटका रहे)।
ऑस्ट्रेलिया ओमान को कुचल दे (ताकि वह 4 अंक पर पहुँच जाए)।
NRR का पलड़ा: जिम्बाब्वे की दो हार उनके रन रेट को नीचे लाएंगी और ऑस्ट्रेलिया की एक बड़ी जीत उनके रेट को ऊपर ले जाएगी।
सावधानी: यदि जिम्बाब्वे अपना एक भी मैच जीतता है या ऑस्ट्रेलिया ओमान के खिलाफ साधारण जीत दर्ज करता है, तो ऑस्ट्रेलिया का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।
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