कोलंबो। क्रिकेट के मैदान पर जब भी भारत और पाक की टीमें आमने-सामने होती हैं, तो रोमांच अपने चरम पर होता है। वह केवल 22 गज की पट्टी का खेल नहीं रह जाता, बल्कि वह नसों के नियंत्रण और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा बन जाता है। श्रीलंका के मैदान पर खेले गए इस हालिया मुकाबले में पाक ने न केवल मैच गंवाया, बल्कि अपनी पुरानी कमजोरी 'दबाव में बिखरना' का एक ऐसा प्रदर्शन किया जिसने प्रशंसकों को निराश और विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।

भारत के हाथों मिली 61 रनों की यह करारी शिकस्त पाक के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। यह हार इसलिए भी चुभने वाली है क्योंकि रनों का यह अंतर भारत के खिलाफ उनकी पिछली सबसे बड़ी हार (11 रन) के मुकाबले पांच गुना से भी ज्यादा है। टॉस जीतने से लेकर बल्लेबाजी के पावरप्ले तक, पाक की रणनीति में वे कौन से छेद थे जिनसे जीत की उम्मीदें बह गईं? टीम के हेड कोच माइक हेसन ने मैच के बाद जो विश्लेषण किया, वह पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति का एक कड़वा सच बयां करता है।

मैच के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या पाक मैच की शुरुआत में ही हार गया था? जब कप्तान ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया, तो लगा कि शायद पिच की नमी का फायदा उठाया जाएगा। लेकिन भारतीय सलामी बल्लेबाज ईशान किशन के इरादे कुछ और ही थे। पारी के 5वें से 8वें ओवर के बीच किशन ने पाकिस्तानी गेंदबाजी की बखिया उधेड़ते हुए महज 24 गेंदों में 52 रन बटोर लिए। यहीं से मैच का मोमेंटम पाक के हाथ से फिसलना शुरू हुआ। कोच माइक हेसन ने माना कि भारत ने बोर्ड पर जो स्कोर टांगा था, वह पार स्कोर (औसत स्कोर) से लगभग 30-25 रन ज्यादा था। हेसन के अनुसार, हार की मुख्य वजह टॉस नहीं, बल्कि खेल के वे दो महत्वपूर्ण हिस्से थे जहाँ खिलाड़ियों ने दबाव में आकर गलत फैसले लिए।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत किसी त्रासदी से कम नहीं थी। जसप्रीत बुमराह की एक सनसनाती यॉर्कर ने सईम अय्यूब के डंडे उखाड़ दिए, लेकिन असली समस्या इसके बाद शुरू हुई। साहिबजादा फरहान, सलमान आगा और खुद कप्तान बाबर आजम ने जिस तरह के शॉट खेलकर अपने विकेट गंवाए, उसने ड्रेसिंग रूम में खलबली मचा दी।
पावरप्ले खत्म होते-होते पाकिस्तान 38 रन पर 4 विकेट खो चुका था। कोच हेसन ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा:
"जब आपके ऊपर दबाव होता है, तब क्या आप अपनी बुनियादी तकनीक (Basics) पर टिके रहते हैं या उससे भटक जाते हैं? आज दबाव ने हमें अपनी राह से भटका दिया। हमारे खिलाड़ी 'सुपरमैन' की तरह खेलकर मैच को परिस्थितियों से पहले ही खत्म करना चाहते थे, जो संभव नहीं था।"
हेसन का इशारा साफ था 'पाकिस्तानी बल्लेबाज स्कोरबोर्ड के दबाव में इतना दब गए कि उन्होंने अपनी स्वाभाविक शैली छोड़ दी और गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेले।'

भारत के खिलाफ इस तरह की हार केवल एक मैच की हार नहीं होती, यह खिलाड़ियों के मनोबल पर गहरी चोट करती है। माइक हेसन ने स्वीकार किया कि ड्रेसिंग रूम में फिलहाल बहुत निराशा है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी जानते हैं कि पाक के लिए इस मैच की अहमियत क्या थी।
विदेशी कोच के रूप में हेसन ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ महीनों में पाक ने विभिन्न परिस्थितियों में ढलने की अच्छी कोशिश की थी, लेकिन भारत के खिलाफ उन्होंने "एक कदम पीछे" खींच लिया। यह 'पीछे हटना' सामरिक (Tactical) कम और मानसिक ज्यादा नजर आता है।

इस हार के बाद पाक के लिए टूर्नामेंट के समीकरण काफी पेचीदा हो गए हैं। ग्रुप चरण का आखिरी मुकाबला 18 फरवरी को नामीबिया के खिलाफ एसएससी (SSC) मैदान पर खेला जाना है।
अंक तालिका का गणित: फिलहाल भारत शीर्ष पर है, जबकि अमेरिका (USA) अपने चारों मैच खेलकर दूसरे स्थान पर काबिज है।
अनिवार्य जीत: पाक को सेमीफाइनल की रेस में बने रहने के लिए नामीबिया को हर हाल में हराना होगा। अगर यहाँ कोई उलटफेर होता है, तो पाक टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा।
कोच हेसन के लिए चुनौती अब खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करने की है। उन्होंने कहा, "टूर्नामेंट में हमेशा चीजें आपके पक्ष में नहीं होतीं। हमारा काम अब खुद को फिर से खड़ा करना और अगले दो-तीन दिनों में सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना है।"

पाकिस्तान क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि वे अनिश्चितताओं के राजा हैं, लेकिन आधुनिक क्रिकेट में केवल 'प्रतिभा' (Talent) के दम पर मैच नहीं जीते जाते। भारत जैसी क्लिनिकल टीम के खिलाफ आपको अपनी रणनीति पर अडिग रहना पड़ता है। माइक हेसन के शब्दों में छिपा संदेश स्पष्ट है कि यदि पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट में आगे बढ़ना है, तो उन्हें 'सुपरमैन' बनने की बजाय परिस्थितियों के अनुसार ढलना सीखना होगा।
क्या बाबर आजम और उनकी सेना नामीबिया के खिलाफ वापसी कर पाएगी? या भारत से मिली यह जख्मी हार उनके विश्व अभियान का अंत कर देगी? जवाब 18 फरवरी को मैदान पर मिलेगा।