Dravid, Kumble, Rangaswamy: चिन्नास्वामी स्टेडियम में ‘द वॉल’ और ‘कुंबले’ का सम्मान, शांता रंगास्वामी के नाम भी होगा स्टैंड

खबर सार :-
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और शांता रंगास्वामी के नाम पर स्टैंड का नामकरण होगा। जानिए क्यों यह फैसला भारतीय क्रिकेट, खासकर महिला क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।

Dravid, Kumble, Rangaswamy: चिन्नास्वामी स्टेडियम में ‘द वॉल’ और ‘कुंबले’ का सम्मान, शांता रंगास्वामी के नाम भी होगा स्टैंड
खबर विस्तार : -

Dravid, Kumble, Rangaswamy: बेंगलुरु का ऐतिहासिक एम चिन्नास्वामी स्टेडियम (Chinnaswamy Stadium) अब अपने तीन महान क्रिकेट नायकों के नाम से और भी खास हो जाएगा। कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने घोषणा की है कि पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़, अनिल कुंबले और महिला क्रिकेट की अग्रणी हस्ती शांता रंगास्वामी के सम्मान में स्टेडियम के स्टैंड/एंड का नामकरण किया जाएगा। यह फैसला सिर्फ नाम बदलने का नहीं, बल्कि उस विरासत को सलाम करने का है जिसने भारतीय क्रिकेट को आकार दिया।

‘द वॉल’ और कुंबले: आंकड़ों से कहीं बड़ी कहानी

राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid), जिन्हें क्रिकेट जगत ‘द वॉल’ के नाम से जानता है। टेस्ट क्रिकेट में भारत के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ हैं। 164 टेस्ट मैचों में 13,288 रन और 344 वनडे में 10,889 रन… ये आंकड़े अपने आप में उनकी निरंतरता और धैर्य की गवाही देते हैं। वहीं अनिल कुंबले (Anil Kumble) का नाम आते ही 619 टेस्ट विकेट और 337 वनडे विकेट की याद ताज़ा हो जाती है। भारत के सबसे सफल गेंदबाज़ों में शुमार कुंबले ने अपने करियर में कई बार मैच का रुख अकेले दम पर पलटा।

द्रविड़ की भावुक यादें

स्टेडियम के 50 साल पूरे होने के मौके पर द्रविड़ ने कहा कि चिन्नास्वामी (Chinnaswamy Stadium) उनके लिए “दूसरा घर” रहा है। बचपन की यादों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता उन्हें टेस्ट ही नहीं, रणजी ट्रॉफी मैच भी दिखाने लाते थे। “आज अगर मेरे नाम पर एक एंड रखा जा रहा है, तो यह मेरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है,” द्रविड़ ने भावुक स्वर में कहा। उन्होंने खास तौर पर शांता रंगास्वामी के साथ यह सम्मान साझा करने पर खुशी जताई और महिला खेलों में उनके योगदान को सलाम किया।

शांता रंगास्वामी: जब महिला क्रिकेट की राह आसान नहीं थी

1976 में भारतीय महिला टीम की पहली कप्तान रहीं शांता रंगास्वामी (Shantha Rangaswamy) ने उस दौर में क्रिकेट खेला, जब महिलाओं के लिए संसाधन और अवसर बेहद सीमित थे। उन्होंने भारत को पहली टेस्ट सीरीज जीत दिलाई और महिला टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक भी जड़ा। उन्हें बीसीसीआई से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड पाने वाली पहली महिला क्रिकेटर होने का गौरव भी हासिल है। भारत में यह सिर्फ पांचवीं बार है जब किसी महिला क्रिकेटर के नाम पर स्टेडियम का स्टैंड या गेट रखा जा रहा है। इससे पहले झूलन गोस्वामी (कोलकाता), मिताली राज (विशाखापत्तनम), हरमनप्रीत कौर (मोहाली) और अंजुम चोपड़ा (दिल्ली) को यह सम्मान मिल चुका है।

सिर्फ नाम नहीं, एक संदेश

चिन्नास्वामी स्टेडियम (Chinnaswamy Stadium) में इन तीन दिग्गजों के नाम जुड़ना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक होगा। जब भी कोई युवा खिलाड़ी इन स्टैंड्स की ओर देखेगा, उसे यह याद रहेगा कि मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण क्या मायने रखता है। यह सम्मान क्रिकेट के इतिहास में दर्ज एक और खूबसूरत अध्याय है, जहां पुरुष और महिला, दोनों ने मिलकर भारतीय क्रिकेट को ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

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