Vande Mataram:'वंदे मातरम' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। मोदी सरकार पर हमला करेत हुए कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, "वंदे मातरम को लागू करने में कांग्रेस ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। भाजपा की शुरू से सबकी चीजें छीनने की आदत गलत है। वंदे मातरम के प्रति सबसे बड़ी भक्ति कांग्रेस की है। भाजपा इस मुद्दे पर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।"
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने धार्मिक आजादी का हवाला देते हुए कहा कि वंदे मातरम पहले से ही पढ़ा जाता है, लेकिन उन्हें सभी छह आयतों के अनिवार्य पाठ पर आपत्ति है। "अगर मुझसे सभी छह आयतें पढ़ने के लिए कहा जाता है, तो मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगा क्योंकि मेरा धर्म इसकी इजाजत नहीं देता। मैं यहां सिर झुकाऊंगा; इसमें कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, संविधान मुझे अपने तरीके से अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है।" किसी के भी खिलाफ किसी भी तरह की ज़बरदस्ती संविधान की भावना के खिलाफ है।
इस संदर्भ में, इमरान मसूद ने पार्लियामेंट में राहुल गांधी के बयान का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी ने डेटा वेरिफिकेशन के लिए कहा, तो उन्हें रोक दिया गया, लेकिन बाद में उन्होंने इंडिया-US ट्रेड डील को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सरकार के पास इन सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है और वह विपक्ष की आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही है। इस बीच, पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू के बयान पर भी विपक्ष ने रिएक्शन दिया। राजीव शुक्ला ने कहा कि विपक्षी MP गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं करते और स्पीकर के सामने अपनी बात रखना बदतमीज़ी नहीं है। विपक्ष पर कमेंट करने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए।
कांग्रेस MP जेबी माथेर ने पार्लियामेंट की कार्यवाही और स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस स्थिति से बचा जा सकता था। उनके मुताबिक, अगर स्पीकर ने दखल दिया होता और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका दिया होता, तो नो-कॉन्फिडेंस मोशन पास नहीं होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के खिलाफ कथित अन्याय ने उन्हें एक साथ स्टैंड लेने के लिए मजबूर किया।
गौरतलब है कि देश की राष्ट्रीय भावना को दिखाने वाला 'वंदे मातरम' अब सिर्फ़ एक रस्मी गीत नहीं रहेगा, बल्कि हर सरकारी कार्यक्रम का ज़रूरी हिस्सा होगा। गृह मंत्रालय ने साफ़ निर्देश जारी किए हैं कि 'वंदे मातरम' का पूरा वर्शन अब सरकारी कार्यक्रमों, सरकारी स्कूल के कार्यक्रमों और दूसरे औपचारिक मौकों पर बजाया जाएगा। अब तक, पहले दो पद आम तौर पर गाए जाते थे, लेकिन नई गाइडलाइंस के मुताबिक, सिर्फ़ पूरा वर्शन, जिसमें छह पैराग्राफ़ होंगे और जो 3 मिनट 10 सेकंड का होगा, बजाया जाएगा। इस दौरान सभी का खड़े रहना जरूरी। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों साथ हों तो पहले वंदे मातरम्। इसका मकसद राष्ट्रीय सम्मान और एकरूपता का संदेश देना बताया गया है।
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