West Bengal SIR case Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई वोटर लिस्ट की डेडलाइन, लापरवाही पर DGP को थमाया नोटिस

खबर सार :-
West Bengal SIR case Supreme Court : पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए वोटर लिस्ट फाइनल करने की डेडलाइन एक सप्ताह बढ़ा दी है। कोर्ट ने राज्य के डीजीपी को नोटिस जारी किया है और ग्रुप-बी अधिकारियों को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं।

West Bengal SIR case Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ाई वोटर लिस्ट की डेडलाइन, लापरवाही पर DGP को थमाया नोटिस
खबर विस्तार : -

 West Bengal SIR case Supreme Court : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने अंतिम मतदाता सूची जारी करने की समयसीमा को एक सप्ताह के लिए आगे बढ़ा दिया है। अब राज्य में फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी के बजाय संशोधित तारीख पर जारी की जाएगी। इसके साथ ही, चुनाव आयोग की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने बंगाल के डीजीपी (DGP) से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों की पड़ताल और मतदाता सूची को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रभावित व्यक्तियों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की सघन जांच के लिए ईआरओ (ERO) को अब 14 फरवरी के बाद एक अतिरिक्त सप्ताह का समय मिलेगा।

 West Bengal SIR case Supreme Court : 8500 से अधिक अधिकारी चुनाव आयोग को करेंगे रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपनी सूची में शामिल 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करे। इन अधिकारियों को मंगलवार शाम 5 बजे तक जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को रिपोर्ट करना होगा।  सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए इन ग्रुप-बी अधिकारियों का उपयोग मुख्य रूप से माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में किया जा सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि इन अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी पर तैनात करने से पहले एक या दो दिनों का संक्षिप्त प्रशिक्षण (Short Training) दिया जाए, ताकि वे प्रक्रिया को बारीकी से समझ सकें। हालांकि, कोर्ट ने अधिकारियों की शक्तियों को लेकर एक स्पष्ट लक्ष्मण रेखा भी खींची है। पीठ ने जोर देकर कहा कि इन अधिकारियों की भूमिका केवल निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (ERO) की सहायता करने तक सीमित होगी। वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़ा कोई भी अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल ईआरओ के पास ही सुरक्षित रहेगा, जिससे चुनावी प्रक्रिया की शुचिता और न्यायिक निष्पक्षता बनी रहे।

 West Bengal SIR case Supreme Court : DGP को कारण बताओ नोटिस और कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने गंभीर आरोप लगाए कि राज्य में ऑब्जेक्शन फॉर्म जलाने वालों के खिलाफ कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया और हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया। सुनवाई की शुरुआत में वकीलों के बीच आपसी तालमेल की कमी और एक साथ बोलने पर सीजेआई सूर्यकांत ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि "सब एक साथ बोल रहे हैं, जिससे कार्यवाही में बाधा आ रही है।" इसके बाद ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान और राज्य की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं।

 West Bengal SIR case Supreme Court : क्या था मुख्य विवाद?

विवाद की जड़ में मतदाता सूची के ड्राफ्ट में लगभग 70 लाख मतदाताओं के नामों में स्पेलिंग की गलतियां और मैनपावर की कमी है। राज्य सरकार का दावा है कि उन्होंने पर्याप्त अधिकारियों की सूची सौंप दी थी, जबकि आयोग ने देरी का आरोप लगाया। राज्य के वर्तमान प्रधान सचिव मनोज पंत ने कोर्ट को बताया कि 292 ईआरओ और 8,525 सहायक ईआरओ (AERO) की व्यवस्था की गई है, जिनमें से 65 प्रतिशत ग्रुप-बी के अधिकारी हैं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि यदि नए अधिकारी जांच प्रक्रिया में शामिल होते हैं, तो निर्णय की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसी भी वैध मतदाता का अधिकार प्रभावित नहीं होगा।

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