Taxpayers के लिए खुशखबरीः Income Tax फॉर्म्स का मेकओवर, ITR फाइलिंग होगी आसान

खबर सार :-
इनकम टैक्स नियमों में प्रस्तावित नई फॉर्म नंबरिंग व्यवस्था टैक्स सिस्टम को सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे न सिर्फ ITR फाइलिंग आसान होगी, बल्कि टैक्स अनुपालन और जांच प्रक्रिया भी मजबूत बनेगी। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद, यह बदलाव लंबे समय में टैक्सपेयर्स और प्रशासन-दोनों के लिए लाभकारी साबित होगा।

Taxpayers के लिए खुशखबरीः Income Tax फॉर्म्स का मेकओवर, ITR फाइलिंग होगी आसान
खबर विस्तार : -

New Income Tax Act 2025: इनकम टैक्स विभाग ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। विभाग ने इनकम टैक्स नियमों का नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें टैक्स से जुड़े लगभग सभी प्रमुख फॉर्म्स की नंबरिंग बदलने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और डिजिटल सिस्टम के अनुरूप बनाना है। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 आगामी 1 अप्रैल से लागू होने जा रहा है।

क्यों जरूरी था फॉर्म्स की नई नंबरिंग

विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा इनकम टैक्स फॉर्म्स की नंबरिंग दशकों में कई बार बदली गई, जिससे सिस्टम जटिल और भ्रमित करने वाला हो गया था। अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग फॉर्म्स, बार-बार एक जैसी जानकारी भरने की मजबूरी और तकनीकी दिक्कतें टैक्सपेयर्स के लिए परेशानी का कारण बनती थीं। नई नंबरिंग से न सिर्फ फॉर्म्स को तार्किक क्रम में लाया गया है, बल्कि दोहराव भी काफी हद तक खत्म होगा।

नए फॉर्म टेम्पलेट भी हुए जारी

ड्राफ्ट नियमों के साथ इनकम टैक्स विभाग ने नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी किए हैं। इनका डिजाइन इस तरह किया गया है कि टैक्स से जुड़ी जानकारी सीधे डिजिटल सिस्टम से लिंक हो सके। इससे रीयल-टाइम डेटा मिलान, ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन और जांच की प्रक्रिया पहले से ज्यादा तेज और सटीक होगी।

टैक्स ऑडिट और इंटरनेशनल टैक्स में बड़ा बदलाव

ड्राफ्ट के अनुसार, टैक्स ऑडिट से जुड़े कई अहम फॉर्म्स को मर्ज कर दिया गया है। पहले टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के लिए फॉर्म 3सीए, 3सीबी और 3सीडी भरने होते थे, लेकिन अब इन सभी की जगह एक ही फॉर्म 26 इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह, ट्रांसफर प्राइसिंग ऑडिट रिपोर्ट अब फॉर्म 3सीईबी की बजाय फॉर्म 48 में दी जाएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय लेनदेन से जुड़े मामलों में रिपोर्टिंग आसान होगी।

MAT और टैक्स रेजिडेंसी से जुड़े फॉर्म बदले

मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) से जुड़ा सर्टिफिकेट, जो पहले फॉर्म 29बी में दिया जाता था, अब फॉर्म 66 में जमा करना होगा। उल्लेखनीय है कि MAT उन कंपनियों पर लगता है जिनका सामान्य टैक्स उनकी बुक प्रॉफिट के 15 प्रतिशत से कम होता है। वहीं, टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के लिए अब फॉर्म 10एफए की जगह फॉर्म 42 का उपयोग किया जाएगा। दो देशों के बीच टैक्स संधि (DTAA) से संबंधित जानकारी भी अब फॉर्म 10एफ की बजाय फॉर्म 41 में देनी होगी।

Nirmala Sitharaman-Income Tax

TDS और TCS फॉर्म्स की नई पहचान

ड्राफ्ट में टीडीएस से जुड़े फॉर्म्स की नंबरिंग में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब कम या शून्य टीडीएस के लिए आवेदन फॉर्म 128 में होगा। सैलरी से संबंधित टीडीएस सर्टिफिकेट को फॉर्म 130 कहा जाएगा। इसके अलावा, टीडीएस रिटर्न के पुराने फॉर्म 24क्यू, 26क्यू और 27क्यू अब क्रमशः फॉर्म 138, 140 और 144 के नाम से जाने जाएंगे। टीसीएस रिटर्न के लिए भी अब फॉर्म 27ईक्यू की जगह फॉर्म 143 दाखिल करनी होगी।

26AS और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन फॉर्म में बदलाव

सालाना टैक्स स्टेटमेंट, जिसे आमतौर पर फॉर्म 26AS कहा जाता है, अब फॉर्म 168 के नाम से जाना जाएगा। वहीं, वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने वाला फॉर्म 61ए अब फॉर्म 165 कहलाएगा। इससे हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन की निगरानी और रिपोर्टिंग और बेहतर होगी।

विदेशी रेमिटेंस फॉर्म्स भी बदले, सिस्टम अपग्रेड की चुनौती

विदेश पैसे भेजने से जुड़े फॉर्म्स में भी बदलाव किया गया है। अब फॉर्म 15सीए की जगह फॉर्म 145 में विदेशी रेमिटेंस की जानकारी देनी होगी, जबकि चार्टर्ड अकाउंटेंट का सर्टिफिकेट फॉर्म 15सीबी की बजाय फॉर्म 146 में जमा करना होगा। हालांकि यह बदलाव टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद है, लेकिन नियोक्ताओं, टैक्स सलाहकारों, रजिस्ट्रार और कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर और आंतरिक सिस्टम में तेजी से बदलाव करने होंगे। शुरुआती दौर में इसके लिए प्रशिक्षण और तकनीकी अपडेट की जरूरत पड़ेगी।

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