CSR Spending: कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने राज्यसभा में देश की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बतया कि देश में सीएसआर के तहत कंपनियों का सामाजिक सरोकार लगातार मजबूत हो रहा है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच कंपनियों ने सीएसआर मद में 1,44,159 करोड़ रुपए से अधिक का खर्च दर्ज कराया है।
राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने बताया कि कंपनियों द्वारा किए गए सीएसआर खर्च से जुड़ी सभी सूचनाएं एमसीए21 रजिस्ट्री में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं। इन आंकड़ों में राज्यवार, वर्षवार, कंपनीवार और परियोजना-वार विस्तृत जानकारी शामिल है। इससे आम जनता, शोधकर्ता और नीति-निर्माता पारदर्शी तरीके से सीएसआर गतिविधियों का विश्लेषण कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएसआर गतिविधियों की योजना बनाना, उनका क्रियान्वयन और निगरानी करना संबंधित कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड) की जिम्मेदारी है। सरकार नियामक ढांचा प्रदान करती है, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने की जिम्मेदारी कंपनियों की होती है।
कंपनी (सीएसआर नीति) नियम, 2014 के नियम 8 के तहत उन कंपनियों के लिए प्रभाव मूल्यांकन (इम्पैक्ट असेसमेंट) अनिवार्य है, जिनकी पिछले लगातार तीन वित्तीय वर्षों में औसत सीएसआर देनदारी 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक रही हो। यह मूल्यांकन किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाना आवश्यक है। यह नियम उन परियोजनाओं पर लागू होता है, जिन पर कम से कम 1 करोड़ रुपए खर्च हुए हों और जो परियोजनाएं प्रभाव अध्ययन शुरू होने से कम से कम एक वर्ष पहले पूरी हो चुकी हों। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीएसआर फंड का उपयोग वास्तविक सामाजिक परिवर्तन लाने में हो रहा है या नहीं।
राज्य मंत्री ने बताया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच एमसीए 21 पोर्टल पर लगभग 3.84 करोड़ फाइलिंग दर्ज की गईं। इनमें से 3.33 करोड़ फाइलिंग सीधे प्रक्रिया के तहत स्वीकृत की गईं। करीब 40.8 लाख फाइलिंग संबंधित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) और क्षेत्रीय निदेशकों द्वारा मंजूर की गईं, जबकि लगभग 8.3 लाख फॉर्म विभिन्न कारणों से अस्वीकृत कर दिए गए। यह आंकड़े बताते हैं कि कॉरपोरेट क्षेत्र में अनुपालन (कंप्लायंस) की प्रक्रिया तेजी से डिजिटाइज हो रही है। बड़ी संख्या में ऑनलाइन फाइलिंग से यह भी स्पष्ट होता है कि कंपनियां नियामकीय आवश्यकताओं के प्रति अधिक सजग हुई हैं।

कारोबार को सुगम बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने एमसीए21 का नया संस्करण ‘एमसीए21 वी3’ शुरू किया है। इस उन्नत प्रणाली में वेब फाइलिंग, एलएलपी मॉड्यूल, कंपनी मॉड्यूल, ई-एन्फोर्समेंट, ई-एडजुडिकेशन, ई-कंसल्टेशन और ई-बुक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इन सुविधाओं के माध्यम से कंपनियों को ऑनलाइन सेवाएं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी ढंग से उपलब्ध कराई जा रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए दस्तावेजों की प्रोसेसिंग तेज हुई है और मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है, जिससे भ्रष्टाचार और त्रुटियों की संभावना घटती है।
एमसीए21 पोर्टल से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए एक समर्पित हेल्प डेस्क भी बनाई गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक कुल 3,16,877 हेल्प डेस्क टिकट दर्ज किए गए। इनमें से लगभग 98 प्रतिशत शिकायतों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर दिया गया। इन शिकायतों में तकनीकी खामियां, सूचना संबंधी दिक्कतें, प्रक्रिया से जुड़े अनुरोध और सुझाव शामिल थे। सरकार का कहना है कि एमसीए21 एक ऐसा मंच है, जहां हर वर्ष लाखों ऑनलाइन फॉर्म जमा किए जाते हैं, इसलिए इसे निरंतर अपडेट और मजबूत किया जा रहा है। एसआर खर्च में बढ़ोतरी और डिजिटल पारदर्शिता के इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कॉरपोरेट क्षेत्र सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और सरकार तकनीकी सुधारों के जरिए इस प्रक्रिया को और सुदृढ़ बना रही है।
अन्य प्रमुख खबरें
'वंदे मातरम' पर सियासी घमासान तेज, विपक्ष ने मोदी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
आईटी मंत्रालय का Deepfake पर सख्त प्रहार: भ्रामक एआई कंटेंट पर सरकार का बड़ा एक्शन
Pappu Yadav: जेल से बाहर आएंगे पूर्णिया सांसद, पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में मिली जमानत
Sharad Pawar: NCP प्रमुख शरद पवार की अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल के बाहर जुटी समर्थकों की भीड़
आतंकी अब्दुल रहमान की पत्थर से कुचलकर हत्या, न्यायिक जांच जारी
Taxpayers के लिए खुशखबरीः Income Tax फॉर्म्स का मेकओवर, ITR फाइलिंग होगी आसान
सेशेल्स के विकास में भारत का बड़ा कदम: 175 मिलियन डॉलर के आर्थिक पैकेज का ऐलान