लखनऊ : नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली फेंसेडिल कफ सीरप की अवैध तस्करी का नेटवर्क पहले से कहीं बड़ा और संगठित निकल रहा है। शुभम जायसवाल, बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और अमित सिंह टाटा की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ को इस रैकेट में तीन और संदिग्धों के शामिल होने के जानकारी और सबूत मिले हैं। जांच में पहली बार यह खुलासा हुआ है कि तस्करी की जांच की आंच असम तक पहंुच रही है, जहां एक फर्म के जरिए बड़ी मात्रा में माल मंगाए जाने की आशंका है। एसटीएफ उस फर्म के लेन-देन और सप्लाई चेन की गहन जांच कर रही है।
एसटीएफ की माने तो, यह गिरोह लखनऊ, वाराणसी और आसपास के जिलों में फेंसेडिल की बड़े पैमाने पर सप्लाई करता था। नेटवर्क का संचालन मुख्य रूप से वाराणसी व उसके आसपास के लगभग 10 जिलों से होता था, इस गोरखधंधे का करीब 100 करोड़ रुपये का अवैध व्यापार का अनुमान है। मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के पिता भोला प्रसाद जायसवाल के नाम पर सबसे ज्यादा लेन-देन की जानकारी मिली है जिससे जांच और तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।ेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूर्वांचल की कुल 173 फर्मों को फेंसेडिल की आपूर्ति की थी। इनमें वाराणसी की 126, जौनपुर की 28, आजमगढ़ की तीन, चंदौली की सात, गाजीपुर की पांच और भदोही की चार फर्में शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई फर्में पहले से बंद थीं, लेकिन उनके नाम का इस्तेमाल कर तस्करी जारी रखी गई। अब तक बनारस की 40 फर्मों का रिकॉर्ड भी नहीं मिला है, जबकि 30 से अधिक फर्मों के मोबाइल नंबर बंद हैं। इस मामले में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
एसटीएफ और स्थानीय पुलिस अमित सिंह टाटा से जुड़े हर ठिकाने की लगातार कड़ी निगरानी कर रही है। गिरफ्तारी के बाद उसके गांव में छापा भी मारा गया, और सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के इलाकों में पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई है। जांच एजेंसियां उसके राजनीतिक और कारोबारी नेटवर्क की भी गहराई से छानबीन कर रही हैं ताकि पूरे तस्करी तंत्र का खुलासा हो सके।
गिरोह पकड़े जाने से बचने के लिए फेंसेडिल की बोतलों को चावल की बोरियों में छिपाकर भेजता था। इसके लिए गिरोह बड़ी मात्रा में चावल खरीदता था, जिससे शिपमेंट सामान्य दिखे। इस पूरे नेटवर्क और उसके फंडिंग मॉडल को समझने के लिए एसटीएफ की कई टीमें लगातार अलग-अलग जिलों में तैनात हैं।
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