नई दिल्लीः राजस्थान के जेसलमेर में पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित पोखरण रेंज एक बार फिर भारतीय सैन्य शक्ति का साक्षी बना। यहां भारतीय वायुसेना ने ‘वायुशक्ति–26’ नामक विशाल युद्धाभ्यास का आयोजन कर अपनी सामरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और चौबीसों घंटे की युद्ध तत्परता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भी मौजूद रहीं। उनके साथ वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी अभ्यास का अवलोकन किया। यह उपस्थिति न केवल इस आयोजन की महत्ता को दर्शाती है, बल्कि देश की सर्वोच्च सैन्य तैयारी का प्रतीक भी है।
‘वायुशक्ति–26’ के पहले दिन कुल 18 महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निर्धारित किया गया। इन लक्ष्यों में आतंकवादी शिविर, दुश्मन की हवाई पट्टी, पेट्रोलियम भंडार, रडार स्टेशन, बंकर, टैंकों का काफिला, संचार केंद्र और रसद ठिकाने शामिल थे। वायुसेना के लड़ाकू विमानों और हथियार प्रणालियों ने इन सभी लक्ष्यों को अत्यंत सटीकता के साथ भेदा। यह प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत था कि भारतीय वायुसेना लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने और शत्रु की सामरिक संरचना को निष्क्रिय करने में पूरी तरह सक्षम है।
इस अभ्यास में भारत की अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली S-400 का भी विशेष उल्लेख रहा। एस-400 प्रणाली कई सौ किलोमीटर दूर से ही दुश्मन के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें मार गिराने की क्षमता रखती है। इसके अतिरिक्त ‘आकाश’ मिसाइल और स्पाइडर एयर डिफेंस सिस्टम ने भी अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन और एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग यह दर्शाता है कि वायुसेना पारंपरिक और आधुनिक, दोनों प्रकार की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है।
अभ्यास की एक और विशेषता इसका बहुआयामी स्वरूप है। यह युद्धाभ्यास दिन, सांझ और रात—तीनों परिस्थितियों में संचालित किया जा रहा है। अलग-अलग मिशनों के माध्यम से वायुसेना ने यह दिखाया कि वह किसी भी समय, किसी भी मौसम और किसी भी परिस्थिति में कार्रवाई करने में सक्षम है। इस व्यापक अभ्यास में 120 से अधिक एयरक्राफ्ट भाग ले रहे हैं, जो इसे अत्यंत विशाल और जटिल सैन्य अभ्यास बनाता है।
लड़ाकू विमानों की बात करें तो Dassault Rafale, Sukhoi Su-30MKI, MiG-29, Mirage 2000 और SEPECAT Jaguar जैसे अत्याधुनिक और अनुभवी विमान इसमें शामिल हैं। इन विमानों ने हवा से जमीन पर सटीक बमबारी, हवाई युद्ध और रणनीतिक हमलों का प्रदर्शन किया। इनके साथ ही Boeing C-17 Globemaster III, Lockheed Martin C-130J Super Hercules और Airbus C-295 जैसे भारी परिवहन विमान भी सक्रिय भूमिका में नजर आए। ये विमान त्वरित एयरलिफ्ट, सैनिकों और उपकरणों की ढुलाई तथा आपदा राहत अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हेलिकॉप्टर बेड़े में AH-64E Apache, CH-47F Chinook, HAL Prachand और Mil Mi-17 शामिल रहे। इन हेलिकॉप्टरों ने युद्धक्षेत्र में नजदीकी हवाई सहायता, भारी उपकरणों की ढुलाई और विशेष अभियानों का प्रदर्शन किया। आधुनिक ड्रोन और निगरानी प्रणालियों ने भी अभ्यास को तकनीकी दृष्टि से और अधिक सशक्त बनाया।
‘वायुशक्ति–26’ केवल आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन भर नहीं है, बल्कि यह मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन में वायुसेना की भूमिका को भी रेखांकित करता है। अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि किस प्रकार संकटग्रस्त क्षेत्रों से नागरिकों को सुरक्षित निकाला जाता है और राहत सामग्री पहुंचाई जाती है। वायुसेना ने यह संदेश दिया कि वह केवल युद्ध में ही नहीं, बल्कि आपदा और मानवीय संकट के समय भी देशवासियों के साथ खड़ी रहती है।
चूंकि यह अभ्यास भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट आयोजित किया जा रहा है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार नोटम (Notice to Airmen) भी जारी किया गया है, ताकि हवाई क्षेत्र में किसी प्रकार की असुविधा या गलतफहमी न हो। इस आयोजन के माध्यम से भारतीय वायुसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि वह “सबसे पहले, सबसे तेज और सबसे प्रचंड” जवाब देने की क्षमता रखती है। ‘वायुशक्ति–26’ देश को यह भरोसा दिलाता है कि भारत की वायु शक्ति हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार, सशक्त और सजग है।
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