WMO रिपोर्ट में चेतावनी: रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका, वैश्विक तापमान में आएगी इतनी बढ़ोत्तरी
खबर सार :-
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 और 2030 के बीच कोई एक साल, 2024 को पीछे छोड़कर अब तक का सबसे गर्म साल बन जाएगा—इसकी 86 प्रतिशत संभावना है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्कटिक क्षेत्र में तापमान में वृद्धि वैश्विक औसत से अधिक होने की संभावना है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ब्रिटेन के मौसम विभाग (मेट ऑफिस) की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में आने वाले वर्षों में वैश्विक तापमान को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार अगले पांच वर्षों, यानी 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान रिकॉर्ड स्तर पर या उसके बेहद करीब बना रह सकता है। वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि इस दौरान जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और अधिक तीव्र हो सकते हैं।
तापमान का रिकॉर्ड टूटने की प्रबल संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत सतही तापमान पूर्व-औद्योगिक काल (1850-1900) के औसत स्तर से 1.3 डिग्री सेल्सियस से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। इसका अर्थ है कि दुनिया लगातार एक गर्म दौर में प्रवेश कर सकती है, जहां सामान्य मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इस अवधि में औसत तापमान का 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाना संभव है, लेकिन इसे पेरिस समझौते के औपचारिक उल्लंघन के रूप में नहीं माना जाएगा। कारण यह है कि पेरिस समझौता लंबे समय यानी लगभग 20 वर्षों के औसत तापमान को आधार मानकर लक्ष्य तय करता है, न कि किसी एक वर्ष या छोटे समय-खंड को।
डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में किसी एक वर्ष के 2024 को पीछे छोड़ते हुए अब तक का सबसे गर्म वर्ष बनने की संभावना लगभग 86 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड तापमान टूटने की प्रबल संभावना बनी हुई है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 91 प्रतिशत संभावना है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा, जब वैश्विक औसत सतही तापमान अस्थायी रूप से पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक चला जाएगा। यह स्थिति वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि यह संकेत देता है कि पृथ्वी लगातार उच्च तापमान की सीमा के करीब पहुंच रही है।
अल नीनो जैसी परिस्थितियों का संकेत
गौरतलब है कि वर्ष 2024 में ही वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से लगभग 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया था। यह पहले से ही संकेत देता है कि दुनिया एक स्थायी रूप से गर्म होती जलवायु की ओर बढ़ रही है।
रिपोर्ट के प्रमुख लेखक डॉ. लियोन हरमैनसन ने कहा कि 2026 के अंत तक अल नीनो जैसी परिस्थितियों के विकसित होने की संभावना है, जो वैश्विक तापमान को और बढ़ा सकती हैं। उनके अनुसार, इस बदलाव के कारण 2027 में एक और रिकॉर्ड तोड़ गर्म वर्ष देखने की आशंका भी बढ़ जाती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मध्य उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के नीनो 3.4 क्षेत्र में अगले पांच वर्षों के तापमान पूर्वानुमान अल नीनो जैसी परिस्थितियों की ओर संकेत कर रहे हैं। विशेष रूप से 2027 और 2028 के दौरान इन प्रभावों का असर अधिक स्पष्ट हो सकता है, जिससे वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित हो सकती है।
पूरे विश्व को दी जा रही चेतावनी
पेरिस समझौते के तहत दुनिया के देशों ने यह लक्ष्य तय किया है कि वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखा जाए और इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयास किए जाएं। लेकिन नई रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि यह लक्ष्य अब और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
वैज्ञानिक समुदाय लगातार चेतावनी देता रहा है कि यदि वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक स्थायी रूप से बढ़ता है, तो इसका असर चरम मौसम घटनाओं, समुद्री स्तर में वृद्धि, सूखे, बाढ़ और हीटवेव जैसी स्थितियों पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। साथ ही, इससे कई क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन की क्षमता भी कमजोर हो सकती है।
इस रिपोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की एक गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुका है, जिसके लिए तत्काल और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कदमों की आवश्यकता है।
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