Air India flights cut due to Iran war : ईरान युद्ध के कारण एअर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में की 22 फीसदी की भारी कटौती, यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

खबर सार :-
Air India flights cut due to Iran war : ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट के चलते एअर इंडिया ने जून और जुलाई के लिए अपनी घरेलू उड़ानों में 22% की भारी कटौती की है। जानिए कैसे जेट फ्यूल की बढ़ती कीमतों ने बिगाड़ा एयरलाइन का पूरा गणित।
Air India flights cut due to Iran war : ईरान युद्ध के कारण एअर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में की 22 फीसदी की भारी कटौती, यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी
खबर विस्तार : -

Air India flights cut due to Iran war :  पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और अमेरिका-ईरान युद्ध की आहट ने वैश्विक बाजार को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा और सबसे बड़ा असर अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई चेन टूटने और ईंधन की आसमान छूती कीमतों के चलते देश की प्रमुख विमानन कंपनी एअर इंडिया ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने आगामी जून और जुलाई के महीनों के लिए अपनी घरेलू उड़ानों में कुल 22 प्रतिशत की कटौती करने का आधिकारिक ऐलान किया है। एयरलाइन के इस अचानक उठाए गए कदम से गर्मियों की छुट्टियों में यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों का गणित पूरी तरह से बिगड़ सकता है।

Air India flights cut due to Iran war : ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट ने बिगाड़ा विमानन कंपनियों का बजट

दुनिया भर के देशों के लिए तेल आपूर्ति का सबसे मुख्य जरिया माना जाने वाला होर्मुज स्ट्रेट इस समय पूरी तरह से ठप पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण इस समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल की भारी किल्लत हो गई है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई इस अचानक रुकावट का खामियाजा भारतीय विमानन कंपनियों को भुगतना पड़ रहा है।

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जेट फ्यूल (एविएशन टरबाइन फ्यूल) के दामों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बेतहाशा खर्च ने एअर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर बहुत बुरा असर डाला है। लगातार हो रहे आर्थिक नुकसान को नियंत्रित करने के लिए ही प्रबंधन को आनन-फानन में उड़ानों की संख्या घटाने का यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है।

Air India flights cut due to Iran war : जून और जुलाई में एअर इंडिया की फ्लाइट्स कम, अगस्त पर अभी सस्पेंस

एअर इंडिया ने साफ किया है कि उड़ानों में यह 22% की कटौती फिलहाल जून और जुलाई 2026 के महीनों के लिए ही लागू की गई है। अगस्त महीने के शेड्यूल को लेकर कंपनी अभी 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है।

आमतौर पर जून और जुलाई का समय भारत में पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं के लिए बेहद व्यस्त माना जाता है। ऐसे पीक सीजन में उड़ानों के फेरे कम होने से न केवल टिकटों की मारामारी बढ़ेगी, बल्कि हवाई किराए में भी भारी उछाल आने की पूरी आशंका है। सूत्रों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम जल्द ही सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में इंडिगो समेत दूसरी घरेलू एयरलाइंस भी अपनी उड़ानों में इसी तरह की कटौती का रास्ता चुन सकती हैं।

आम जनता पर चौतरफा मार, केंद्र सरकार भी पूरी तरह अलर्ट

इस युद्ध संकट का असर सिर्फ हवाई सफर तक ही सीमित नहीं है। भारत के आम नागरिक भी इसकी तपिश महसूस कर रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। हालांकि, इस राष्ट्रीय संकट के बीच केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दे रही है।

सरकार ने देश के भीतर ईंधन की सुचारू आपूर्ति बनाए रखने और आम लोगों को राहत देने के लिए तुरंत कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। वैकल्पिक देशों से कच्चे तेल के आयात की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, ताकि घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को एक निश्चित दायरे में रखा जा सके। इसके बावजूद, एविएशन सेक्टर पर पड़ा यह तात्कालिक दबाव बेहद गंभीर माना जा रहा है।

एयरलाइंस के परिचालन पर वित्तीय दबाव और आगे की चुनौतियां

हवाई कंपनियों का लगभग 40 प्रतिशत परिचालन खर्च अकेले जेट फ्यूल पर ही होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में मामूली बढ़त भी करोड़ों रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल देती है। **ईरान युद्ध के कारण एअर इंडिया ने घरेलू उड़ानों में की 22 फीसदी की भारी कटौती** का जो निर्णय लिया है, वह कंपनी को बड़े वित्तीय घाटे से बचाने का एक सुरक्षात्मक उपाय है। उड्डयन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारतीय विमानन उद्योग को वापस पटरी पर आने में लंबा समय लग सकता है। आने वाले दिनों में यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट्स और मुख्य रूटों पर उड़ानों के कम विकल्प देखने को मिलेंगे।

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