नई दिल्लीः सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग 2026 के दौरान भारत की रक्षा कूटनीति को नई मजबूती मिली। इस वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कई देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों, रणनीतिक नेताओं और रक्षा विशेषज्ञों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, सामरिक सहयोग, उभरती चुनौतियों और रक्षा साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो से मुलाकात की। इस बैठक में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने सैन्य साझेदारी बढ़ाने, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने और नई सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने पर सहमति जताई।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती सामरिक साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा तकनीक और संयुक्त सैन्य सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।
इसी क्रम में रक्षा सचिव ने नाटो मिलिट्री कमेटी के अध्यक्ष एडमिरल ग्यूसेप्पे कावो ड्रागोने के साथ भी बैठक की। इस दौरान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और सामरिक संवाद को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने प्रमुख बहुपक्षीय रक्षा संगठनों के साथ रचनात्मक और संतुलित सहयोग जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
शांगरी-ला डायलॉग के दौरान राजेश कुमार सिंह ने कई प्रतिष्ठित थिंक टैंकों और शिक्षाविदों के साथ भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने “स्थिर, सुरक्षित और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए भारत की रक्षा कूटनीति” विषय पर संबोधन दिया। अपने भाषण में उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच और सुरक्षा दृष्टिकोण को विस्तार से रखा।
उन्होंने कहा कि भारत एक मुक्त, समावेशी और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था का समर्थक है। भारत क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग, नई तकनीकों और बहुपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना चाहता है। इस कार्यक्रम में सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले भी मौजूद रहे। उन्होंने भारत की सक्रिय विदेश और रक्षा नीति को क्षेत्रीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा सचिव ने कनाडा के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के सीनियर एसोसिएट डिप्टी मिनिस्टर केल्विन ब्रोसो से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत और कनाडा के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देने और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सामरिक हितों को आगे बढ़ाने और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसके अलावा रक्षा सचिव ने सेशेल्स सशस्त्र बलों के प्रमुख मेजर जनरल माइकल रोसेट के साथ भी वार्ता की। इस दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। दोनों देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि शांगरी-ला डायलॉग 2026 के दौरान हुई ये उच्चस्तरीय बैठकें भारत की सक्रिय रक्षा कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा ढांचे में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती हैं। भारत लगातार अपने मित्र देशों और रणनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाकर क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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