दिल्ली हवाई अड्डे पर लगा देश का पहला ‘स्काईकास्ट’ सिस्टम, मिलेगी रियल-टाइम मौसम की जानकारी

खबर सार :-
अब कोहरे और खराब मौसम की वजह से फ्लाइट्स में देरी और डायवर्जन में कमी आएगी। दिल्ली हवाई अड्डे पर देश का पहला ‘स्काईकास्ट’ सिस्टम लाॅन्च किया गया, इससे रियल-टाइम मौसम की जानकारी मिलेगी।
दिल्ली हवाई अड्डे पर लगा देश का पहला ‘स्काईकास्ट’ सिस्टम, मिलेगी रियल-टाइम मौसम की जानकारी
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: कोहरे के कारण उड़ानों में होने वाली देरी अब कम होने वाली है। शुक्रवार को दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 पर भारत का पहला 'स्काईकास्ट' सिस्टम लॉन्च किया गया। इस सिस्टम से पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल को रियल-टाइम मौसम से जुड़ी जानकारी मिलेगी।

भारत अब दुनिया का 19वां ऐसा देश बन गया है जिसने इतना उन्नत और इंटीग्रेटेड एविएशन वेदर मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्काईकास्ट सिस्टम का उद्घाटन किया और इसे भारतीय एविएशन सेक्टर के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया।  इस तकनीक के इस्तेमाल से कोहरे, खराब विजिबिलिटी और दूसरे खराब मौसम की वजह से होने वाली फ्लाइट में देरी, डायवर्जन और कैंसलेशन कम हो जाएंगे।

जेवर हवाई अड्डे पर लगेगा स्काईकास्ट सिस्टम

उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली के बाद अगला स्काईकास्ट सिस्टम जेवर हवाई अड्डे पर लगाया जाएगा। इसके बाद, इस तकनीक का विस्तार देश भर के अन्य हवाई अड्डों पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मिशन मौसम" विजन के तहत भारत अब "कोहरे-मुक्त उड़ानें" हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आधुनिक तकनीकों से लैस

यह सिस्टम न केवल एविएशन सेक्टर में, बल्कि मौसम के पूर्वानुमान, प्रदूषण प्रबंधन, शहरी मौसम की निगरानी और आपदा प्रबंधन में भी अहम भूमिका निभाने वाला है। इस सिस्टम को "मिशन मौसम" के दायरे में विकसित किया गया है। इसमें रडार, फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर, LiDAR सीलोमीटर, माइक्रोवेव रेडियोमीटर और SODAR सिस्टम सहित कई आधुनिक मौसम निगरानी तकनीकों को इंटीग्रेट किया गया है।

3 किमी की ऊंचाई तक निगरानी

ये उपकरण हवाई अड्डे से लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक वायुमंडलीय स्थितियों की लगातार निगरानी करते हैं। इससे हवा की दिशा, गति, आर्द्रता, कोहरे की स्थिति और टर्बुलेंस से जुड़ा जरूरी डेटा तुरंत उपलब्ध हो सकेगा। इस सिस्टम के लागू होने से कोहरे की स्थिति में भी सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग संभव हो पाएगी।

 

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