झांसीः शिवराज सिंह चौहान ने रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कीं। इस अवसर पर उन्होंने कृषि क्षेत्र में नवाचार, खाद्य सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा तथा विद्यार्थियों से देश के कृषि विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को दुनिया का “फूड बास्केट” बनना होगा, ताकि वह वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अनिश्चितताओं और संकटों के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं, ऐसे में भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश को हर परिस्थिति में अपने नागरिकों के लिए पर्याप्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने में सक्षम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। उन्होंने दावा किया कि चावल उत्पादन में भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया है और गेहूं के मामले में भी देश आत्मनिर्भर है। अब केंद्र सरकार ने दालों में आत्मनिर्भर बनने का अभियान शुरू किया है, जिसमें बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरकों के वितरण में संभावित गड़बड़ियों की ओर संकेत करते हुए कहा कि सरकार खाद पर करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये का अनुदान खर्च करती है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में विचार कर रही है कि उर्वरक पर मिलने वाला अनुदान सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचाया जाए। इसके लिए देशभर में किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है। अब तक लगभग 8.30 करोड़ किसानों की आईडी तैयार की जा चुकी है, जबकि करीब 12 करोड़ किसानों की आईडी और बनाई जानी है।
उन्होंने बताया कि फार्मर आईडी प्रणाली लागू होने के बाद किसानों को बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने के लिए राजस्व अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उनकी पूरी जानकारी एकीकृत पहचान पत्र में उपलब्ध रहेगी, जिससे पारदर्शिता और सुगमता दोनों बढ़ेंगी।
कृषि मंत्री ने कृषि छात्रों और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाले शोध और नवाचारों को तीन वर्ष के भीतर खेतों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया जाना चाहिए। वर्तमान में कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचने में पांच वर्ष या उससे अधिक का समय लग जाता है, जिसे कम करना जरूरी है। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से जुड़े 16 हजार से अधिक वैज्ञानिकों से किसानों के साथ संवाद बढ़ाने और शोध को व्यवहारिक बनाने की अपील की।
युवा विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में योगदान दें। उन्होंने युवाओं से स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर रोडमैप बनाकर कार्य करने की सलाह दी। “अपने लिए तो सभी जीते हैं, लेकिन दूसरों के लिए जीना सीखें,” उन्होंने कहा। उन्होंने युवाओं से अपनी वास्तविक क्षमता पहचानने और बड़े लक्ष्य के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह का संचालन कुलसचिव द्वारा किया गया, जबकि कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर कार्यक्रम का शुभारंभ और समापन किया। समारोह में सांसद अनुराग शर्मा, विधायक रवि शर्मा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडे, विधायक जवाहरलाल राजपूत तथा पूर्व मंत्री रविंद्र शुक्ला सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह और गौरव का वातावरण रहा। केंद्रीय मंत्री के संबोधन ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और युवा शक्ति की भूमिका को नए सिरे से रेखांकित किया।
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