General MM Naravane : भारत की राजनीति में अक्सर चर्चा का विषय बनने वाले व्यक्तित्वों में से एक नाम है जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (General MM Naravane)। हाल ही में, उनके बारे में संसद में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul) के भाषण के दौरान उठे विवाद ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया। राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान जनरल नरवणे के संस्मरण का जिक्र किया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया। आइए, हम जानते हैं जनरल नरवणे के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण और दिलचस्प पहलुओं के बारे में। Gandhi
मनोज मुकुंद नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को पुणे में हुआ था। उनके पिता भी भारतीय वायुसेना में अधिकारी रहे थे, जिससे बचपन से ही सेना के प्रति उनका झुकाव था। उन्होंने अपनी शिक्षा एनडीए (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) पुणे और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से प्राप्त की। साथ ही, उन्होंने डिफेंस स्टडीज में एमफिल भी किया। नरवणे को भारतीय सेना में कमीशन 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में मिला। इसके बाद उन्होंने जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की दूसरी बटालियन और 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। उनके कार्यकाल में, वह असम राइफल्स और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी शामिल रहे। जनरल नरवणे को 31 दिसंबर 2019 को भारतीय सेना के 28वें प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे पहले जनरल विपिन रावत सेना प्रमुख थे, जिनकी मृत्यु के बाद जनरल नरवणे ने उनका स्थान लिया। 15 दिसंबर 2021 से 30 अप्रैल 2022 तक, जनरल नरवणे चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अस्थायी चेयरमैन भी रहे। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों को सफलता से अंजाम दिया।
राहुल गांधी ने संसद में जनरल नरवणे के संस्मरण का उल्लेख किया था, जिसका नाम था "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी"। यह एक मेमोयर था, जिसमें जनरल नरवणे के सेना प्रमुख बनने की यात्रा को लेकर कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया गया था। हालांकि, यह पुस्तक सरकारी अनुमतियों की वजह से प्रकाशित नहीं हो पाई। पेंगुइन द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले इस संस्मरण के कुछ अंश 2023 में मीडिया में प्रकाशित हुए थे। यह पुस्तक (अप्रकाशित) जनरल नरवणे के जीवन के उन पहलुओं को उजागर करती है जो कम ही लोग जानते हैं। इसमें उनकी सेना में प्रवेश, विभिन्न सैन्य अभियानों में उनकी भूमिका, और भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की चुनौतीपूर्ण यात्रा का विवरण है।
बजट सत्र के दौरान, जब राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की पुस्तक का उल्लेख किया, तो संसद में हंगामा मच गया। राहुल गांधी ने एक मैग्जीन के आर्टिकल का हवाला दिया था, जिसमें इस किताब के अंश थे। इस टिप्पणी के बाद भारतीय राजनीति में विभिन्न प्रतिक्रिया उत्पन्न हुईं। कुछ ने इसे राजनीति से प्रेरित माना, तो कुछ ने इसे सही संदर्भ में लिया। जनरल एमएम नरवणे भारतीय सेना के एक महान अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने अपनी बहादुरी, नेतृत्व क्षमता और देश के प्रति समर्पण से भारतीय सेना को नई ऊचाइयों तक पहुँचाया। उनकी जीवन यात्रा से प्रेरणा लेना न केवल सेना के अधिकारियों के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी के भाषण में उठे विवाद के बावजूद, जनरल नरवणे का योगदान भारतीय सैन्य इतिहास में हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
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