Niti Aayog Report: भारत के लिए खेल उपकरण उद्योग आने वाले वर्षों में बड़ा आर्थिक इंजन बन सकता है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश के पास 8.1 अरब डॉलर तक के खेल उपकरण निर्यात का विशाल अवसर मौजूद है। यदि इस दिशा में रणनीतिक कदम उठाए जाते हैं, तो वर्ष 2036 तक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्लस्टर्स में करीब 54 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित हो सकते हैं।
‘भारत के खेल उपकरण निर्माण की निर्यात क्षमता को साकार करना’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में हो रहे बदलाव भारत के लिए अवसरों का नया द्वार खोल रहे हैं। आने वाले दशक में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की बढ़ती संख्या और सरकार की सक्रिय नीतिगत पहल भारत को इस क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिला सकती है। भारत इस समय ऐसे निर्णायक मोड़ पर है, जहां सही रणनीति के जरिए आयात पर निर्भरता कम करते हुए निर्यात को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अवसर केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि रोजगार और औद्योगिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए कुछ प्रमुख चुनौतियों पर काम करना होगा। इनमें उत्पादन लागत में कमी, वैश्विक ब्रांड्स के साथ साझेदारी, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रांड पहचान मजबूत करना शामिल है। यदि इन पहलुओं पर समन्वित तरीके से काम किया जाए तो भारत अगले दशक में खेल उपकरण निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग और खेल संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता बताई गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक खेल उपकरण बाजार वर्तमान में लगभग 140 अरब डॉलर का है और 2036 तक इसके 283 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इस बाजार में फिटनेस और स्ट्रेंथ उपकरणों का 33% हिस्सा है, जबकि बॉल गेम्स उपकरण 32% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके अलावा एथलेटिक ट्रेनिंग उपकरण (14%) और रैकेट एवं नेट गेम्स (10%) भी प्रमुख हिस्सेदारी रखते हैं। यह दर्शाता है कि फिटनेस और खेलों के प्रति वैश्विक रुझान तेजी से बढ़ रहा है।
खेल उपकरणों के वैश्विक निर्यात का मूल्य 2024 में लगभग 52 अरब डॉलर था, जो 2.4% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। इस निर्यात में जिम और एथलेटिक उपकरण (27%) तथा साइकिल (17%) का बड़ा योगदान है। हालांकि, भारत की हिस्सेदारी इस विशाल बाजार में मात्र 0.5% है। वर्ष 2024 में भारत ने करीब 275 मिलियन डॉलर के खेल उपकरणों का निर्यात किया, जिसमें क्रिकेट उपकरण, फिटनेस मशीनें और फुलाए जाने वाले बॉल प्रमुख रहे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वैश्विक खेल उपकरण बाजार में चीन का वर्चस्व बना हुआ है। इसके अलावा अमेरिका, ताइवान, जर्मनी और वियतनाम भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। इसके बावजूद भारत के लिए इस क्षेत्र में बड़ा अवसर मौजूद है, खासकर तब जब वैश्विक कंपनियां अपनी सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने की कोशिश कर रही हैं। भारत अपनी लागत प्रतिस्पर्धा और कुशल श्रमबल के जरिए इस मौके का लाभ उठा सकता है।
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