भुज: भारतीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एमटी नंदा देवी मंगलवार को एलपीजी लेकर वाडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार, यह जहाज सुबह लगभग 11:25 बजे सुरक्षित रूप से बंदरगाह पर लंगर डाल चुका था। इस सप्ताह पश्चिमी तट पर एलपीजी लेकर पहुंचने वाला यह दूसरा जहाज है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के प्रयासों को दर्शाता है।
इससे एक दिन पहले एमटी शिवालिक लगभग 40,000 से 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। दोनों जहाजों का आगमन ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। इन जहाजों के सुरक्षित पहुंचने से भारत को राहत मिली है।
दोनों जहाजों ने अपनी यात्रा के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया, जो वर्तमान में संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही में फरवरी के अंत से काफी कमी आई है। ऐसे में इन जहाजों का सुरक्षित गुजरना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सोमवार को कांडला बंदरगाह के अधिकारियों ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि एलपीजी लेकर आने वाले सभी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर लंगर डालने की अनुमति दी जाए। इसका उद्देश्य माल की अनलोडिंग प्रक्रिया को तेज करना और संभावित देरी को कम करना है, ताकि देश में गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।
इसी क्रम में दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण ने भी जहाज एजेंटों को परिपत्र जारी कर यह निर्देश दिया कि एलपीजी से लदे जहाजों को प्राथमिकता दी जाए। यह कदम पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है, जिससे देशभर में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
एमटी शिवालिक ने कतर से अपनी लगभग नौ दिन की यात्रा पूरी कर मुंद्रा पहुंचकर यह संकेत दिया कि भारत ऊर्जा आयात के अपने नेटवर्क को सक्रिय बनाए हुए है। अधिकारियों ने पहले से ही डॉक्यूमेंटेशन और डॉकिंग की व्यवस्था कर ली थी, जिससे जहाज के पहुंचते ही माल उतारने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि ये जहाज घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है, ऐसे में इस तरह के समय पर पहुंचने वाले जहाज देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं।
इस बीच, जग लाडकी नामक एक अन्य जहाज संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन कच्चा तेल लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। इसके भी जल्द भारतीय तट पर पहुंचने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में इस समय 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद हैं, जिनमें कुल 611 नाविक सवार हैं। इन जहाजों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी प्रकार की सुरक्षा चुनौती का समय रहते समाधान किया जा सके।
एमटी नंदा देवी का सुरक्षित भारत पहुंचना हाल के दिनों में दूसरा ऐसा उदाहरण है, जिसने यह साबित किया है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में सक्षम है। इससे पहले एमटी शिवालिक का सफल आगमन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मुंद्रा में उतारे गए एलपीजी के एक हिस्से को वहीं उपयोग में लाया जाएगा, जबकि शेष को मैंगलोर भेजा जाएगा। यह वितरण प्रणाली देश के विभिन्न हिस्सों में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में सहायक होगी।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जहां समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है, ऐसे में भारत द्वारा उठाए गए ये कदम उसकी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की मजबूती को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इस तरह की सतर्कता और त्वरित निर्णय क्षमता देश के लिए और भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
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