Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में आस्था का महासंगम, गंगा घाटों पर उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
खबर सार :-
Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाई। हरिद्वार के लगभग सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस-प्रशासन की टीमें भी मुस्तैद हैं।
खबर विस्तार : -
हरिद्वार: सोमवती अमावस्या के शुभ अवसर पर पवित्र शहर हरिद्वार में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ हर की पौड़ी समेत गंगा के प्रमुख घाटों की ओर उमड़ पड़ी।
लाखों भक्तों ने मां गंगा में पवित्र डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा और हर कोने पर सुरक्षा बल तैनात किए गए। जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने खुद मौके पर जाकर इंतजामों का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए।
300 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने बताया कि ऐसा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग लगभग तीन सौ साल बाद बना है। यह अनोखा संयोग ग्रहों की मौजूदा स्थिति, सोमवती अमावस्या और 'अधिक मास' (एक अतिरिक्त चंद्र मास) के कारण बना है। यह एक बेहद अहम घटना है, जिसका हरिद्वार, प्रयागराज, सरयू तट (अयोध्या) और अन्य सभी तीर्थ स्थलों के लिए विशेष महत्व है। अमावस्या पर 'पितृ-तर्पण' करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और व्यक्ति को अपने पूर्वजों की मुक्ति और कल्याण के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। यह खगोलीय दृष्टि से बेहद शुभ और सुलभ संयोग है।
पीपल के पेड़ का विशेष स्थान
रवींद्र पुरी ने आगे कहा कि भगवान कृष्ण ने भगवद गीता में कहा है, "वृक्षों में मैं अश्वत्थ (पीपल) हूं; देवर्षियों में मैं नारद हूं; सिद्धों में मैं कपिल मुनि हूँ; और गंधर्वों में मैं चित्ररथ हूँ।" इसलिए, दुनिया के सभी पेड़ों में पीपल के पेड़ का विशेष स्थान है। इसे चौबीसों घंटे ऑक्सीजन देने वाला पेड़ माना जाता है, इसीलिए हमारे ऋषियों ने इसकी पूजा करने और इसे संरक्षित करने की परंपरा शुरू की थी। पीपल के पेड़ का अभिषेक करना चाहिए और उसे जल चढ़ाना चाहिए।
तर्पण और दान-दक्षिणा से पुण्य
उन्होंने बताया कि सोमवती अमावस्या के दिन पहले गंगा में पवित्र स्नान करना चाहिए और फिर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद, दोपहर के समय—लगभग सुबह 11:30 बजे से 12:00 बजे के बीच पूर्वजों (पितरों) के लिए तर्पण करना चाहिए। साथ ही, अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद ब्राह्मणों को दान और दक्षिणा देनी चाहिए और उन्हें भोजन कराना चाहिए। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।
SDRF, NDRF, BDS और डॉग स्क्वॉड की टीमें तैनात
जिला मजिस्ट्रेट मयूर दीक्षित ने बताया कि स्नान की प्रक्रिया चल रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने सुनिश्चित किया है कि घाटों पर सभी जरूरी इंतजाम हों। वहीं, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि कार्यक्रम के सुरक्षित समापन के लिए इलाके को 6 सुपर-जोन, 16 जोन और 40 सेक्टर में बांटा गया है, जहां डिप्टी एसपी, सर्कल ऑफिसर (CO), इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों को तैनात किया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए SDRF, NDRF, BDS और डॉग स्क्वॉड की टीमें भी तैनात की गई हैं। SSP नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि सुरक्षा के लिए SDRF और NDRF की टीमें तैनात की गई हैं। सुरक्षा जांच के लिए बम निरोधक दस्ते (BDS) और डॉग स्क्वॉड भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, अन्य सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया है और PAC तथा CPA की टीमें भी मौजूद हैं।
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