बिहू पेपा समेत असम के 4 उत्पादों को मिला GI टैग, सीएम ने कहा- कारीगरों को मिलेंगे ज्यादा आर्थिक अवसर
खबर सार :-
असम के 4 उत्पादों को GI टैग मिला है। इनमें बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हैंडलूम, बाह शिल्पा और देओरी हैंडलूम उत्पाद शामिल हैं। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि और गर्व का क्षण बताया।
खबर विस्तार : -
गुवाहाटी: असम के चार और उत्पादों को 'जियोग्राफिकल इंडिकेशन' (GI) टैग मिला है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया और इसे राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि असम के चार खास उत्पादों—बिहू पेपा, कार्बी आंगलोंग हैंडलूम, बाह शिल्पा (असमिया बांस शिल्प) और देओरी हैंडलूम उत्पादों को आधिकारिक तौर पर GI सर्टिफिकेशन मिला है। राज्य की विरासत को सुरक्षित रखने के प्रयासों को "एक और बड़ा बढ़ावा" बताते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि GI टैग इन उत्पादों की असलियत को बनाए रखने में मदद करेंगे और साथ ही कारीगरों और पारंपरिक उत्पादकों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा करेंगे।
असम के उत्पादों को मिल रही पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहचान ऐसे समय में मिली है जब असम के विरासत उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी से पहचान मिल रही है। CM के अनुसार, यह सर्टिफिकेशन यह सुनिश्चित करेगा कि असली उत्पादकों को उनके सामान के लिए उचित दाम मिलें और उनके नाम से केवल असली चीजें ही बेची जाएं।
बिहू त्योहारों का एक अहम हिस्सा 'बिहू पेपा'
GI टैग मुख्य रूप से खास गुणों, प्रतिष्ठा या विशेषताओं के आधार पर दिए जाते हैं। भैंस के सींग से बना पारंपरिक वाद्ययंत्र 'बिहू पेपा', राज्य के मशहूर बिहू त्योहारों का एक अहम हिस्सा है। कार्बी आंगलोंग हैंडलूम कार्बी समुदाय की बुनाई परंपराओं को दर्शाता है, जबकि देओरी हैंडलूम उत्पाद देओरी जनजाति की खास कपड़ा विरासत को दिखाते हैं।
बांस के कारीगरों का सदियों पुराना हुनर 'बाह शिल्पा'
'बाह शिल्पा' या असमिया बांस शिल्प, बांस के कारीगरों के सदियों पुराने हुनर को उजागर करता है; उनकी बनाई चीजें राज्य भर में रोजमर्रा की जिंदगी और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का एक अहम हिस्सा बनी हुई हैं।
आर्थिक विकास के नए रास्ते खुलने की संभावना
नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) जैसी एजेंसियां असम के पारंपरिक उत्पादों के लिए GI पहचान हासिल करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से मदद कर रही हैं। इन चार उत्पादों के लिए GI टैग हासिल करके, असम अनोखी सांस्कृतिक और कारीगरी विरासत के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा, साथ ही परंपरा पर आधारित आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खोलेगा।
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