नई दिल्ली/रियाद: दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए इबादत और बरकत का महीना 'रमजान' अपने अंतिम पड़ाव पर है। अब हर निगाह आसमान की ओर टिकी है, क्योंकि शव्वाल के चांद का दीदार होते ही खुशियों का त्योहार ईद-उल-फितर शुरू हो जाएगा। आज यानी 19 मार्च 2026 को सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों में चांद देखे जाने की प्रबल संभावना है। यदि आज वहां चांद नजर आता है, तो सऊदी में कल ईद मनाई जाएगी। भारत में इसके आधार पर त्योहार की तारीख तय होगी।
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, त्योहारों की सटीक तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए अनुमान इस प्रकार हैं:
सऊदी अरब में स्थिति: यदि 19 मार्च को चांद दिख जाता है, तो वहां 20 मार्च को ईद होगी। यदि चांद नजर नहीं आता है, तो 30 रोजे पूरे करने के बाद भी 20 मार्च को ही वहां ईद का जश्न मनाया जा सकता है।
भारत में ईद की तारीख: भारत में आमतौर पर सऊदी अरब के एक दिन बाद ईद मनाई जाती है। अगर सऊदी में 20 मार्च को ईद होती है, तो भारत में 21 मार्च 2026 को ईद-उल-फितर का पर्व मनाया जाएगा।
रमजान के कठिन उपवास (रोजे) के बाद आने वाली इस ईद को 'मीठी ईद' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मुस्लिम घरों में विशेष रूप से सेवइयां और खीर बनाई जाती है। यह त्योहार केवल पकवानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी भाईचारे, क्षमा और दान (जकात) का प्रतीक है। सुबह मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करने के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर 'ईद मुबारक' कहते हैं।
इस्लामिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो ईद-उल-फितर की जड़ें मदीना के उस दौर से जुड़ी हैं, जब पैगंबर मोहम्मद (स.) वहां तशरीफ लाए थे। सन् 624 ईस्वी में, जो हिजरत का दूसरा वर्ष था, इस पाक त्योहार को मनाने की औपचारिक शुरुआत हुई। दरअसल, जब पैगंबर साहब मदीना पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि स्थानीय लोग साल के दो विशेष दिनों में खेल-कूद और मनोरंजन के जरिए उत्सव मनाते थे। इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने घोषणा की कि अल्लाह ने इन दो दिनों के स्थान पर समुदाय को दो कहीं अधिक बेहतर और रूहानी दिन अता किए हैं, जिन्हें हम ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा के नाम से जानते हैं। ऐतिहासिक रूप से यह पर्व उस पहली जीत और संतोष का प्रतीक बना, जब मुसलमानों ने अपनी जिंदगी में पहली बार रमजान के पूरे महीने के रोजे मुकम्मल किए थे। यह दिन केवल खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि एक महीने के कठिन आत्म-संयम और खुदा की इबादत के बदले मिले रूहानी इनाम का जश्न है।
ईद केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि धैर्य और समर्पण का प्रतिफल है। इसके मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं:
ईद-उल-फितर का इंतजार अब खत्म होने को है। चाहे वह 20 मार्च हो या 21 मार्च, यह त्योहार अपने साथ अमन और भाईचारे का पैगाम लेकर आता है। पल-पल की अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें।
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