लखनऊ: नवाबों के शहर लखनऊ में ईद-उल-फितर के त्योहार की आहट के साथ ही बाजारों की फिजा बदल गई है। चिलचिलाती धूप और रोजे की मशक्कत के बावजूद, खरीदारी का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा। इस बार लखनऊ के पारंपरिक फैशन में फिल्मी तड़का और पड़ोसी मुल्कों के स्टाइल का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। जहाँ पुरुष 'रहमान डकैत' के रफ-एंड-टफ लुक के दीवाने हैं, वहीं महिलाओं में फरसी सलवार और अलीना कट का जादू चल रहा है।
ईद में अब गिनती के दिन शेष हैं, ऐसे में राजधानी के प्रमुख व्यापारिक केंद्र जैसे अमीनाबाद, नक्खास, निशातगंज और हजरतगंज ग्राहकों से खचाखच भरे हुए हैं। लखनऊ ही नहीं, बल्कि बाराबंकी, सीतापुर और उन्नाव जैसे आसपास के जिलों से भी लोग खास ईद की शॉपिंग के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं। नक्खास बाजार जहाँ घर की सजावट, सेवई और खजूर के लिए मशहूर है, वहीं अमीनाबाद और गदबदियां महिलाओं और बच्चों के कपड़ों का गढ़ बना हुआ है।
इस साल ईद के मौके पर पुरुषों, खासकर युवाओं के फैशन में फिल्मी पर्दे का जबरदस्त असर देखने को मिल रहा है। फिल्म 'धुरंधर' के चर्चित किरदार रहमान डकैत ने लखनऊ के युवाओं के बीच एक नया क्रेज पैदा कर दिया है। अमीनाबाद के दुकानदार मोहम्मद गुलजार के अनुसार, इस बार काले रंग के पठानी सूट और उसके साथ कंधे पर रखे जाने वाले विशेष रुमाल (स्कार्फ) की मांग इतनी अधिक है कि कई दुकानों पर स्टॉक समय से पहले ही खत्म हो गया है। युवा इस रफ-एंड-टफ और रॉयल लुक को अपनाने के लिए काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। इस खास सूट की लोकप्रियता की बड़ी वजह इसका कपड़ा है, जो बलूचिस्तान के पठानों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फैब्रिक से प्रेरित है। यह कपड़ा न केवल अत्यंत मुलायम और हल्का है, बल्कि स्ट्रेचेबल होने के कारण काफी आरामदायक भी है, जो गर्मियों की ईद के लिए एकदम मुफीद है। हालांकि, इस स्टाइल को पाना हर दर्जी के बस की बात नहीं है। मास्टर दर्जी मोहम्मद सुफियान बताते हैं कि रहमान डकैत स्टाइल पठानी सूट की सिलाई में काफी बारीकियां और विशेष कटिंग शामिल होती है। यही कारण है कि इसकी सिलाई के लिए सामान्य पठानी सूट की तुलना में ग्राहक खुशी-खुशी लगभग 200 रुपये अतिरिक्त दे रहे हैं।
लखनऊ के बाजारों में इस बार महिलाओं के फैशन की दुनिया में वैरायटी की जबरदस्त भरमार देखने को मिल रही है। ईद की तैयारियों के बीच अमीनाबाद और निशातगंज जैसे बाजारों में महिलाओं की पहली पसंद फरसी सलवार बनी हुई है। बाजार में खरीदारी करने आईं इकरा बताती हैं कि फरसी सलवार न केवल देखने में शाही लुक देती है, बल्कि इसकी 500 से 1000 रुपये की किफायती रेंज इसे मिडिल क्लास बजट के लिए भी एकदम फिट बना रही है। इसके साथ ही लखनवी नजाकत को आधुनिकता के साथ पेश करने वाले 'अलीना कट' चिकन के सूट भी महिलाओं को खूब लुभा रहे हैं। सिर्फ पारंपरिक ही नहीं, बल्कि इस बार पाकिस्तानी सूट और काफ्तान जैसे फ्लोई और आरामदायक डिजाइन्स की भी भारी मांग है। गर्मी के मौसम को देखते हुए महिलाएं हल्के और स्टाइलिश कपड़ों को तरजीह दे रही हैं, जिसमें पाकिस्तानी कढ़ाई वाले सूट और सदाबहार शरारा-अनारकली का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है। दुकानों पर उमड़ रही भीड़ और नए-नए डिजाइन्स की डिमांड ने दुकानदारों के चेहरों पर भी चमक ला दी है, जो इस बार ग्राहकों की पसंद को देखते हुए खास स्टॉक मंगवा रहे हैं।
कपड़ों के साथ-साथ एक्सेसरीज में भी नयापन है। सना के मुताबिक, कश्मीरी चूड़ियां और इयररिंग्स महिलाओं को लुभा रहे हैं। इन चूड़ियों में छोटे-छोटे मेटल के घुंघरू लगे होते हैं, जो एक मधुर ध्वनि पैदा करते हैं। लंबे कश्मीरी इयररिंग्स इस ईद पर ज्वेलरी बॉक्स की पहली पसंद बने हुए हैं।
बाजारों में रौनक तो है, लेकिन महंगाई की टीस भी महसूस की जा रही है। दुकानदारों का मानना है कि पिछले साल के मुकाबले कपड़ों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद, साल में एक बार आने वाले इस बड़े त्योहार के लिए लोग अपने बजट से समझौता कर खरीदारी कर रहे हैं।
जैसे-जैसे सूरज ढलता है और इफ्तार का समय होता है, लखनऊ की फिजाओं में लजीज पकवानों की खुशबू घुलने लगती है। शाम होते ही शहर के मशहूर होटलों और खान-पान की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। विशेष रूप से रात की तरावीह की नमाज मुकम्मल करने के बाद लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ पुराने लखनऊ की गलियों का रुख कर रहे हैं। यहाँ का माहौल ऐसा है कि शाम 4 बजे से खुलने वाले ये होटल सुबह सहरी के वक्त 4 बजे तक लगातार गुलजार रहते हैं। जायके के शौकीनों के लिए इस समय मोबीन की निहारी, टुंडे कबाबी और इदरीस की बिरयानी जैसे ऐतिहासिक ठिकाने पहली पसंद बने हुए हैं। इन दुकानों के बाहर लंबी कतारें इस बात का सबूत हैं कि महंगाई के बावजूद लखनवी नफासत और स्वाद का जादू बरकरार है। लोग देर रात तक कुल्चा-निहारी, कबाब और बिरयानी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं, जो ईद के इस मुकद्दस महीने के जश्न को और भी यादगार बना रहे हैं।
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