नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव की शुरुआत करने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने हाल ही में घोषणा की थी कि बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025, 01 अगस्त यानी कल से लागू हो जाएगा। यह संशोधन भारतीय बैंकिंग प्रणाली को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो न केवल बैंकों के संचालन में सुधार लाएंगे, बल्कि निवेशकों और जमाकर्ताओं को भी अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेंगे।
बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत सार्वजनिक और सहकारी बैंकों में कई सुधारों का प्रस्ताव किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है सहकारी बैंकों के निदेशकों के कार्यकाल में विस्तार। अब इन बैंकों के निदेशक, अध्यक्ष और पूर्णकालिक निदेशकों को छोड़कर, अधिकतम 10 वर्ष तक पद पर बने रह सकते हैं। यह बदलाव 97वें संविधान संशोधन के अनुरूप किया गया है, जो निदेशकों के कार्यकाल को और अधिक लचीला और स्थिर बनाता है। इसके अतिरिक्त, इस संशोधन के तहत बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज की सीमा को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह कदम भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय लेन-देन की प्रक्रियाओं को अधिक लचीला और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। 1968 से अपरिवर्तित रही यह सीमा अब आधुनिक बैंकिंग प्रणाली की जरूरतों के अनुरूप होगी।
बैंकिंग कानून में संशोधन के बाद एक और महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बिना दावे वाले शेयरों, ब्याज और बॉन्ड रिडेम्पशन राशि को इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (आईईपीएफ) में ट्रांसफर करने का अधिकार मिलेगा। यह कदम निवेशकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा और बैंकों की वित्तीय प्रथाओं को और अधिक पारदर्शी बनाएगा।
संशोधन के तहत बैंकों को लेखा परीक्षा मानकों को बेहतर बनाने, उच्च गुणवत्ता वाले लेखा परीक्षकों की नियुक्ति करने और लेखा परीक्षकों को पारिश्रमिक देने का अधिकार भी प्राप्त होगा। यह कदम भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को बढ़ाने के लिए उठाया गया है, जो अंततः बैंकों की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 के माध्यम से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के कानूनी, नियामक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलेगी। इस कानून के लागू होने से बैंकों की कार्यप्रणाली में स्पष्टता आएगी, जो निवेशकों और जमाकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगा। संशोधन में भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 और बैंकिंग कंपनियां (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 तथा 1980 में कुल 19 संशोधन किए गए हैं। इन सभी बदलावों के लागू होने से भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप एक नई दिशा मिलेगी।
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